प्रधानमंत्री मोदी का फर्जी गौरक्षकों को कड़ा सन्देश, तथाकथित सेकुलरों की भी बोलती हुई बंद!

प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को टाउनहॉल में जनता से रूबरू होते हुए सवालों का जवाब दे रहे थे। गौरक्षा को लेकर अपरोक्ष रूप से पूछे गये सवाल पर मोदी ने गौरक्षा के नाम पर अपना धंधा चलाने वालों को जमकर फटकार लगाई। प्रधानमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा है कि कुछ लोग गौरक्षा के नाम पर अपनी दुकान लेकर बैठ गए हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह वही लोग हैं, जो दिन में असामाजिक कार्य करते हैं और रात में गौ रक्षक का चोला पहन कर अपनी दुकान चलाते हैं। साथ ही, प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अगर गौरक्षा करनी है तो गाय को प्लास्टिक खाने से रोकिये। जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने तथाकथित गौरक्षकों को फटकर लगाई, वे सभी लोग शरमायें जा रहें हैं, जो गौरक्षकों को संघ से जोड़ कर देखते हैं।

सेकुलरिज्म के झंडाबरदारों ने सबसे ज्यादा चोट हिन्दू आस्था को पहुंचाई है। इन तथाकथित प्रगतिशीलों का हिन्दू आस्था को चोट पहुँचाना प्रमुख शगल रहा है। यहाँ एक स्थिति यह भी है कि यह बहुत ही योजनाबद्ध ढंग से हिन्दू आस्था पर हमला करते हैं। कभी हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर, तो कभी हिन्दू आस्था से सम्बंधित पवित्र ग्रंथों को अपमानित करके ये तथाकथित सेकुलर प्रगतिशील हिन्दू आस्था पर कुठाराघात करते रहते हैं। ऐसे में, वर्तमान प्रकरण के संदर्भ में भी इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों समेत हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ये गौरक्षा का वितंडा इन तथाकथित सेकुलरों की साज़िश हो। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकारों को इस सम्बन्ध में जांच-पड़ताल करने की बात कही, ताकि इन नकली गौरक्षकों की हकीकत देश के सामने आ सके।

गौर करें तो पिछले कुछ महीनों से देश में अचानक गौरक्षकों की बाढ़ सी आ गई है। जहां-तहां, खासकर भाजपा शासित राज्यों में गौसेवा के नाम पर यह कथित गौरक्षक न केवल लोगों को मारने–पीटने का बल्कि जबरन गौसेवा करने के लिए धमकाने का काम करते पाए हैं। सवाल यह है कि जब देश में गाय आस्था से सम्बद्ध पशु है और देश के हिन्दू समाज ने गाय को माँ का दर्जा दिया है, ऐसे में गौसेवा के लिए हिंसा करना कहाँ तक जायज है? इन कुछ तथाकथित गौसेवकों को लेकर सेक्युलर जमात ने यह अफवाह फ़ैलाने में तनिक भी देरी नहीं लगाई कि यह गौरक्षा का वितंडा केंद्र सरकार की शह पर हो रहा है। परन्तु, प्रधानमंत्री के बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार का इन नकली गौरक्षकों के प्रति एकदम कड़ा रुख है।

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साभार: गूगल

प्रधानमंत्री के फर्जी गौरक्षकों के सम्बन्ध में दिए इस बयान  से न केवल गौरक्षा के ठेकेदारों को कड़ा सन्देश गया है, बल्कि तमाचा उन फर्जी सेकुलरों के गाल पर भी पड़ा है जो निराधार आरोपों से सरकार को बदनाम कर रहे थे। सेकुलरिज्म के झंडाबरदारों ने सबसे ज्यादा चोट हिन्दू आस्था को पहुंचाई है। इन तथाकथित प्रगतिशीलों का हिन्दू आस्था को चोट पहुँचाना प्रमुख शगल रहा है। यहाँ एक स्थिति यह भी है कि यह बहुत ही योजनाबद्ध ढंग से हिन्दू आस्था पर हमला करते हैं। कभी हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर, तो कभी हिन्दू आस्था से सम्बंधित पवित्र ग्रंथों को अपमानित करके ये तथाकथित सेकुलर प्रगतिशील हिन्दू आस्था पर कुठाराघात करते रहते हैं। ऐसे में, वर्तमान प्रकरण के संदर्भ में भी इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि केंद्र और राज्यों की भाजपा सरकारों समेत हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए ये गौरक्षा का वितंडा इन तथाकथित सेकुलरों की साज़िश हो। इसीलिए प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य सरकारों को इस सम्बन्ध में जांच-पड़ताल करने की बात कही, ताकि इन नकली गौरक्षकों की हकीकत देश के सामने आ सके। कथित गौरक्षकों को यह समझ लेना चाहिए कि उनके गौरक्षक के स्वांग से गौवंश की रक्षा नहीं होने वाली। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि जो भी गौरक्षा के नाम पर दूसरों को परेशान करे या किसी भी तरह से कानून का उल्लंधन करे, उसके विरूद्ध राज्य सरकारों को कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए। देश में कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जहाँ गौरक्षकों ने सामजिक-सौहाद्र बिगाड़ने की पूरी कोशिश की। लेकिन, स्थानीय प्रसाशन की चुस्ती से अपने मकसद में पूरी तरह से कामयाब नहीं हो सके।

दरअसल इस पूरे मामले पर गौर करें तो आपको इसमें केंद्र सरकार को बदनाम करने की साज़िश ही नजर आएगी। इसके दो कारण हैं, पहला ऊना की घटना में दलितों को टारगेट किया गया तो एक और घटना मध्य प्रदेश में हुई जहाँ एक मुस्लिम महिला मार–पीट का शिकार हुई। समझा जा सकता है कि मोदी सरकार के सफल शासन से बौखलाया सेकुलर खेमा ऐसा माहौल बनाने में जुटा  हुआ है, जिससे कि इस सरकार को दलित व मुस्लिम विरोधी साबित किया जा सके। इससे पहले पुरस्कार वापसी प्रकरण के रूप में तथाकथित सेकुलर बुद्धिजीवियों द्वारा हम इस तरह की नौटंकी देख चुके हैं। बहरहाल, प्रधानमंत्री ने नकली गौरक्षकों को खरी–खरी सुना दी है और स्पष्ट कर दिया है कि ये सरकार किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य पर बेहद सख्त है और जाति-धर्म से इतर सबके लिए इस दृष्टि एक सामान है। अब राज्य सरकारों का दायित्व बनता है कि इन गौरक्षकों के सच को उजागर कर इनपर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें। इन सब के बीच प्रधानमंत्री ने सच्चे गौसेवकों से अपील की है कि कहीं यह नकली गौरक्षक उनका काम न ख़राब कर दें, इसलिए उन्हें सावधानीपूर्वक गौसेवा के करते हुए उन लोगों की सच्चाई आम लोगों के सामने लानी होगी, जो गौसेवा के नाम पर समाज मे हिंसा का माहौल बना रहें हैं।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

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