ग्रामीण विकास को गति दे रही दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना

ग्रामीण भारत के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने  दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरूआत की। सरकार की अन्य योजनाओं की तरह की इसका लाभ आम जनता को मिल सके, इसके लिए केंद्र सरकार ने इसे मजबूत बनाने के लिए प्रमुख भाग में अलग-अलग फीडर की व्यवस्था कर बिजली के वितरण नेटर्वक को मजबूत किया है। इसके साथ ही सभी घरों में बिजली की सप्लाई सही तरीके से हो सके, इसके लिए इनपुट पाइंट, फीडर और वितरण ट्रांसफार्मर पर मीटर लगाने का लक्ष्य रखा है।

इस योजना में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का भी विलय कर दिया गया है। ग्रामीणों के सपने साकार हो सकें इसलिए इस योजना को सफल बनाना अति आवश्वयक माना जा रहा है, जिसके लिए कुल 43 हजार 33 करोड़ के निवेश की आवश्यकता है। जिसमें से भारत सरकार (योजना की पूरी अवधि में) 33 हजार 4 सौ 53 करोड़ की सहायता देगी। निजी क्षेत्र एवं राज्य बिजली विभागों समेत सभी डिस्कॉम इस योजना के तहत वित्तीय सहायता के लिए बाध्य होंगे।

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का विकास होगा। अब जब ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली रहेगी तब वहां पर विकास के रास्ते खुलेंगे। भारत की अधिकांश आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, अगर वहां पर विकास होगा तो जाहिर सी बात है कि देश की बुनियाद मजबूत होगी। जिस तरह एक पेड़ जड़ के मजबूत होने से विकसित होता है, ठीक उसी तरह अपने गांवों के विकसित होने से भारत भी आगे बढ़ेगा।

इस योजना में किसी तरह का घोटाला ना हो और इसका समुचित ढंग से क्रियान्वयन हो सके, इसके लिए एक निगरानी समिति का गठन किया गया है। निगरानी समिति के अंतर्गत ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति, योजना के तहत परियोजनाओं को स्वीकृति देगी और इसको लागू किए जाने की निगरानी करेगी। इस योजना के तहत अनुशंसित दिशा-निर्देशों के अनुरूप योजना का क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए बिजली मंत्रालय, राज्य सरकार और डिस्कॉम के बीच एक उपयुक्त त्रिपक्षीय समझौता किया जाएगा जिसमें पावर फाइनेंस कार्पोरेशन एक नोडल एजेंसी होगी। राज्य बिजली विभागों के मामलों में द्विपक्षीय समझौते होंगे।

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केंद्र सरकार की बाकी अन्य योजनाओं से पहले इसको पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि आधार को मजबूत किया जा सकें। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना को लागू करने और जमीनी स्तर पर पूरा करने के लिए महज 24 महीने यानि की पूरे दो सालों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार की यह योजना बड़े ही अच्छे ढंग से सफलता की ओर बढ़ रही है। लगातार अविद्युतीकृत गाँवों का विद्युतिकरण किया जा रहा है। गरीब परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए जा रहे हैं। इस योजना की प्रगति के ताज़ा आंकड़ों को इसकी वेबसाइट (www.ddugjy.gov.in) व सरकार द्वारा जारी गर्व एप के जरिये बड़ी आसानी से देखा जा सकता है। अतः यह भी कह सकते हैं कि इस योजना में कुछ भी छिपा नहीं है, बल्कि सबकुछ बड़े ही पारदर्शी ढंग से जन-जन की निगरानी में है।

इस योजना की शुरूआत होने से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का विकास होगा। अब इसे दूसरे नजरिए से देखा जाए तो जब ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली रहेगी तब वहां पर विकास के रास्ते खुलेंगे। भारत की अधिकांश आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है, अगर वहां पर विकास होगा तो जाहिर सी बात है देश की बुनियाद मजबूत होगी। जिस तरह एक पेड़ जड़ के मजबूत होने से विकसित होता है, ठीक उसी तरह अपने गांवों के विकसित होने से भारत भी आगे बढ़ेगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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