दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए मोदी सरकार का एक और कदम

केंद्र की सत्ता का भार संभालते हुए मोदी सरकार ने अपने वादों को पूरा किया। पहले किसानों, फिर महिलाओं के अच्छे दिनों का वादा पूरा करते हुए अब सरकार दिव्यांगों के अच्छे दिन लाने वाली है। देश में दिव्यांगों के अधिकारों की सुरक्षा करने वाले विधेयक ‘निशक्त जन अधिकार विधेयक – २०१४’ को हंगामे की भेट चढ़े संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिनों में पारित कर दिया गया। विपक्ष ने सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए इस विधेयक को विशेष रूप से सक्षम लोगों के जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन लाने वाला बताया। 

इस विधेयक की खास बात यह है कि इसमें वर्तमान में मौजूद विकलांगता की 7 श्रेणियों को बढ़ाकर अब 19 कर दिया गया है। इस संशोधित विधेयक में  भी दो अन्य विकलांग वर्ग को जोड़ा गया है। यह दो केटेगरी है एसिड हमलों और पार्किंसंस रोग के कारण हुई विकलांगता। कोई भी व्यक्ति जो 40 प्रतिशत तक विकलांग है उसे शिक्षा और रोजगार समेत सरकारी योजनाओं में भी अब वरीयता सम्बंधित आरक्षण मिल सकता है।

इस विधेयक की खास बात यह है कि इसमें वर्तमान में मौजूद विकलांगता की 7 श्रेणियों को बढ़ाकर अब 19 कर दिया गया है। इस संशोधित विधेयक में  भी दो अन्य विकलांग वर्ग को जोड़ा गया है। यह दो केटेगरी है एसिड हमलों और पार्किंसंस रोग के कारण हुई विकलांगता। कोई भी व्यक्ति जो 40 प्रतिशत तक विकलांग है उसे शिक्षा और रोजगार समेत सरकारी योजनाओं में भी अब वरीयता सम्बंधित आरक्षण मिल सकता है।

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इस विधेयक को पास करने से सभी दिव्यांग जनों की पढ़ाई और रोजगार के अवसर सुनिश्चित होंगे। साथ ही, दिव्यांग व्यक्तियों के साथ हो रहे भेदभाव को खत्म किया जा सकेगा, ताकि सभी लोगों को पढ़ाई के समान अवसर प्राप्त हो। जाहिर सी बात है कि जब दिव्यांग शिक्षित होंगे तो वह अब अपने लिए खुद ब खुद रोजगार के लिए रास्ता तलाश लेंगे।  

इस विधेयक के पास होने से उन लोगों को भी फायदा होगा, जिनके अभिभावक नहीं है। मानसिक रूप से बीमार लोगों को जिला अदालतों द्वारा सीमित अभिभावक और पूर्ण अभिभावक नियुक्त कर सकता है। साथ ही, सीमित अभिभावक मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति के साथ विचार-विमर्श कर कोई भी निर्णय ले सकता है जबकि पूर्ण अभिभावक उनकी जानकारी के बिना उनके लिए निर्णय कर सकते है। इस विधेयक से पूरी तरह से देश के दिव्यांगों के अच्छे दिन आएंगे, जिससे दिव्यांग तक भी समाज में सबके साथ समान रूप से प्रगति की मुख्यधारा में सम्मिलित हो सकेंगे।

दरअसल मौजूदा सरकार भिन्न क्षमता वाले लोगों के प्रति अत्यंत सजग और संवेदनशील रही है प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल विकलांग लोगों के लिए दिव्यांग जैसा आत्मविश्वास से पूर्ण संबोधन दिया बल्कि अपने जन्मदिन पर दिव्यांग व्यक्तियों से मिलकर उन्हें आवश्यक उपकरण आदि प्रदान कर देश के समस्त दिव्यांगजनों के मन में आत्मविश्वास बढ़ाने का काम भी करते रहे हैं। अब इसी क्रम में ये विधेयक पारित करवाना भी एक बेहतरीन कदम कहा जा सकता है।

(लेखिका पेशे से पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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