लाल आतंक : कन्नूर में वामपंथी हिंसा ने ली आरएसएस स्वयंसेवक संतोष की जान

सी.पी.एम. शासित केरल के कन्नूर जिले में दिनांक 18 जनवरी 2017 की रात को हुई ताज़ा हिंसा में एक और स्वयंसेवक संतोष (५२) की जान चली गयी है। इसी हिंसा में एक और स्वयंसेवक रंजित की हालत काफी गंभीर बताई जा रही है। यह ताज़ा हिंसा केरल के निवर्तमान मुख्यमंत्री पी विजयन के चुनावी क्षेत्र धर्मादम में हुई है। सी.पी.एम. के आक्रमणकारी दस्ते ने आरएसएस स्वयंसेवक एवं बीजेपी कार्यकर्ता संतोष पर उनके घर में ही घुस कर इस हमले को अंजाम दिया। एक अन्य भाजपा कार्यकर्ता रंजित भी इन्ही गुंडों के आक्रमण का शिकार बना है । इलाज़ के क्रम में संतोष ने 18 की देर रात कन्नूर के इंदिरा गांधी कॉपरेटिव अस्पताल में दम तोड़ दिया जबकि इसी अस्पताल में रंजित  का इलाज़ चल रहा है।

अन्य राज्यों में मानवाधिकार, राजनैतिक विपक्ष एवं अभिव्यक्ति की आज़ादी का ढोंग रचने वाले वामपंथियों का असल चेहरा केरल में उजागर होता है, जहाँ वो लंबे समय से सत्त्ता में हैं या मजबूत दल के रूप में हैं। संतोष की हत्या के साथ केरल में मार्क्सवादियों के हाथो मारे गए संघ एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की संख्या 230 पहुँच गयी है। ग़ौरतलब हो कि अबतक संघ एवं भाजपा के कुल 293 कार्यकर्ता केरल में हो रही राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए हैं, जिनमें से 230 केवल वामपंथियों के शिकार हुए हैं।

इस जघन्य हत्या के बाद सारंग और विस्मया के सर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। कन्नूर जिला हमेशा से मार्क्सवादी आतंक के लिए कुख्यात रहा है। अभी इसी साल निकटवर्ती पलक्कड़ जिले में 6 जनवरी को भाजपा कार्यकर्ता राधाकृष्णन की जान मार्क्सवादी हिंसा में चली गयी थी। इसी घटना में 80% तक जल चुकी उनकी पत्नी विमला ने भी 16 जनवरी को दम तोड़ दिया था। गौरतलब हो यह घटना केरल के सी.पी.एम. के भूतपूर्व मुख्यमंत्री अच्युतानंदन के क्षेत्र में घटित हुई थी। मार्क्सवादियों की जब से सरकार बनी है, तब से भाजपा एवं आरएसएस कार्यकर्ताओं पर लगातार हिंसा जारी है। भाजपा के मत प्रतिशत में हुई अप्रत्याशित वृद्धि एवं मिल रहा जनसमर्थन मार्क्सवादियों को हज़म नहीं हो रहा है। इनकी नृशंसता ने अभी हाल ही में सामान्य जन की चेतना को तब झंकझोर दिया था जब इन्होंने एक भाजपा कार्यकर्ता के 3 साल के बच्चे को उनकी गोद से उठा कर कार से बाहर फेंक दिया था। सौभाग्य से बालु पे गिरने के कारण उसकी जान बच गयी।

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अन्य राज्यों में मानवाधिकार, राजनैतिक विपक्ष एवं अभिव्यक्ति की आज़ादी का ढोंग रचने वाले वामपंथियों का असल चेहरा केरल में उजागर होता है, जहाँ वो लंबे समय से सत्त्ता में हैं या मजबूत दल के रूप में हैं। संतोष की हत्या के साथ केरल में मार्क्सवादियों के हाथो मारे गए संघ एवं भाजपा कार्यकर्ताओं की संख्या 230 पहुँच गयी है। ग़ौरतलब हो कि अबतक संघ एवं भाजपा के कुल 293 कार्यकर्ता केरल में हो रही राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए हैं, जिनमें से 230 केवल वामपंथियों के शिकार हुए हैं।

भाजपा ने इस हत्या के बाद 19 जनवरी को कन्नूर में बंद का आह्वाहन किया है। कन्नूर में विपक्षी दल के कार्यकर्ता प्रतिदिन वामपंथी घात के डर में काम कर रहे हैं। मार्क्सवादियों की इस हत्या की राजनीति का विरोध केरल से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने भी अभी हाल में किया है। केरल की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में पुलिस एवं प्रशासन के अंदर वामपंथी समर्थक अधिकारी इस तरह भर दिए गए हैं कि सारी व्यवस्था ऐसी किसी घटना के बाद वामपंथी गुंडों को कानून की गिरफ्त से बचाने के उपाय करने में लग जाती है। केरल भाजपा के अध्यक्ष कुम्मानम् राजशेखरन ने इस हत्या की घोर निंदा की है। राज्य में चल रही वामपंथी हिंसा पर लगाम कौन लगायेगा अब यह एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बन चुका है, क्योंकि वर्तमान सी.पी.एम.सरकार अपने संवैधानिक दायित्वों की बजाय अपने हीरो स्टालिन से प्रेरणा लेते हुए कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो को ज्यादा तवज़्ज़ो दे रही है। संघ एवं भाजपा के कार्यकर्ताओं को अपने राजनैतिक विचार के कारण लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

(लेखक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी शोध अधिष्ठान में रिसर्च एसोसिएट हैं।)

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