उज्ज्वला योजना : महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में सार्थक कदम

मोदी सरकार द्वारा गत वर्ष आरम्भ की गयी उज्ज्वला योजना महिलाओं के स्वास्थ्य-संरक्षण  की दिशा में  एक सकारात्मक कदम है।  देश के गरीब परिवारों की अधिकांश महिलाएं आज भी मिट्टी के चूल्हे पर खाना पकाती हैं। ऐसे परिवारों को उज्ज्वला योजना के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा मुफ्त एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रखा गया है। ये एलपीजी कनेक्शन गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की महिलाओं को दिए जाएंगे। केंद्र सरकार की इस योजना के अंतर्गत 3 सालों में 5 करोड़ बीपीएल परिवारों को मुफ्त कनेक्शन दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य मुख्यतः भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। इस योजना का एक उद्देश्य वर्तमान में उपयोग में आने वाले अशुद्ध जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करना और शुद्ध ईंधन के उपयोग को बढ़ाकर प्रदूषण के स्तर को घटाना भी है। उल्लेखनीय होगा कि यह योजना गत वर्ष मई में आरम्भ हुई थी और नवम्बर तक के आंकड़ों के अनुसार, देश के ग्यारह राज्यों में एक करोड़ के आसपास कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। स्पष्ट है कि योजना बेहद शानदार ढंग से आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि शीघ्र ही ये अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर लेगी।

भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा गरीब लोगों के लिए इतने बड़े स्तर पर मुफ्त में गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया  जाएगा। उल्लेखनीय होगा कि सरकार की ‘पहल’ योजना के बाद लोगों की गैस सब्सिडी सीधे उनके खाते में भेजे जाने से बंद हुई कालाबाजारी से बची रकम तथा प्रधानमंत्री की अपील पर लाखों संपन्न लोगों द्वारा छोड़ी गयी अपनी गैस सब्सिडी से हुई बचत की रक़म में कुछ और धनराशी मिलाकर सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गयी है। ऐसे में, कहना गलत नहीं होगा कि उज्ज्वला योजना न केवल मोदी सरकार की लोककल्याणकारी दृष्टि को दिखाती है, बल्कि सरकार की रचनात्मक क्षमता को भी उजागर करती है।

वर्तमान समय में ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ियों को जलाकर खाना बनाया जाता है। लकड़ियाँ जलने से एक तरफ वातावरण दूषित होता है, तो दूसरी तरफ चूल्हे से धुआँ निकलने के कारण महिलाओं को कई तरह की बीमारियों का भी सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार रसोई में खुली आग जलाना प्रति घंटे चार सौ सिगरेट जलाने के समान है। यानी कि बिना किसी प्रकार का नशा किए ही हमारे देश की अनेक महिलाएं प्रतिदिन चार सौ सिगरेट जितने धुएं को ग्रहण कर रही है, अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इससे उनके स्वास्थ्य पर कितना प्रतिकूल असर पड़ता होगा। न केवल उनके बल्कि घर के अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर भी कमोबेश इसका घातक प्रभाव पड़ता होगा।  विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक भारत में प्रतिवर्ष 5 लाख लोगों की मृत्यु अस्वच्छ जीवाश्म ईंधन के कारण होती है। इनमें से अधिकतर की मृत्यु का कारण गैरसंचारी रोग जैसे ह्रदय रोग, हृदयाघात और फेफडे का कैंसर आदि शामिल है। घरेलू वायु प्रदूषण बच्चों को होने वाले तीव्र श्वास संबंधी रोगो के लिए बड़ी संख्या में जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री मोदी भी इस बात को अनेक बार कह चुके हैं और मुख्यतः इसी समस्या को नज़र में रखते हुए उनके द्वारा उज्ज्वला योजना की शुरुआत की गयी।

भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा गरीब लोगों के लिए इतने बड़े स्तर पर मुफ्त में गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया  जाएगा। देश में गरीबों की अभी तक खाने-पकाने की गैस (एलपीजी) तक सीमित पहुंच रही है। एलपीजी सिलेंडर की पहुंच मुख्य रूप से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक है और इनमें से भी औसतन परिवार मध्यम और समृद्ध वर्ग के हैं। उल्लेखनीय होगा कि सरकार की ‘पहल’ योजना के बाद लोगों की गैस सब्सिडी सीधे उनके खाते में भेजे जाने से बंद हुई कालाबाजारी से बची रक़म तथा प्रधानमंत्री की अपील पर लाखों संपन्न लोगों द्वारा छोड़ी गयी अपनी गैस सब्सिडी से हुई बचत की रक़म में कुछ और धनराशी मिलाकर सरकार द्वारा यह योजना शुरू की गयी है। यह देखते हुए कहना गलत नहीं होगा कि उज्ज्वला योजना न केवल मोदी सरकार की लोककल्याणकारी दृष्टि को दिखाती है, बल्कि सरकार की रचनात्मक क्षमता को भी उजागर करती है। गलत व्यवस्था के कारण बर्बाद हो रहे धन को सुव्यवस्था के जरिये बचाकर उसे एक सार्थक योजना के द्वारा जनकल्याण के लिए उपयोग में लाना सरकार की रचनात्मकता का ही उदाहरण है।  

(लेखिका पेशे से पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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