भारत-यूएई सम्बन्ध : बढ़ेगी भारत की ताक़त, हलकान होगा पाकिस्तान

मोदी सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से ही देश की विदेशनीति को नये आयाम मिले हैं। अमेरिका, यूरोप समेत एशिया के भी अनेक देशों से भारत के सम्बन्धों में एक नयी मजबूती आयी है। अपनी कामयाब विदेशनीति की कड़ी में पीएम मोदी ने एक और दोस्त बनाया है।  अब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत के सम्बन्धों को न केवल नये ढंग से मज़बूत बनाने बल्कि उनको सही दिशा में ले जाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है, जो कि काफी हद तक सफल होता भी नज़र आ रहा है।

साल 2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी यूएई दौरे पर गए थे, तब दोनों देशों के बीच भारत के मोस्ट वॉन्टेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम उठाने की बात कही गई थी। मोदी के दौरे के बाद यूएई ने दोस्ती निभाते हुए दाऊद की 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त कर ली थी। इस तरह समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासस्वरूप यूएई से भारत के सम्बन्धों में एक नयी ऊर्जा और ताज़गी आ रही है तथा दोनों देश परस्पर सहयोग के साथ विभिन्न मुद्दों पर आगे बढ़ रहे हैं।

इस दोस्ती का नजारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी देखने को मिला। नाहयान और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों के बीच ऊर्जा, निवेश, रक्षा, सुरक्षा सहित विभिन्न और अहम क्षेत्रों में कुल 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। साथ ही,  रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को बढ़ा कर दक्षिण एशिया में स्थिरता कायम करने के लिए मज़हबी कट्टरवाद एवं हिंसा का मिलकर सफाया करने के लिए भी दोनों देशो द्वारा संकल्प जताया गया।

अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मुहम्मद बिन जायेद अल-नाहियान के साथ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (साभार: गूगल)

दोनों देशों की तरफ से आतंकवाद को प्रायोजित करने के कारण परोक्ष रूप से पाकिस्तान पर निशाना भी साधा गया। दाऊद इब्राहीम  को ढूँढने में भी दोनों देशों के बीच सहयोग की बात कही गयी। चूंकि, दाऊद इब्राहीम के पाकिस्तान में छिपे होने की ही बात जब-तब की जाती रहती है, अतः कहीं न कहीं भारत-युएई के बीच दाऊद को ढूँढने गिरफ्तार करने सम्बन्धी सहयोग को पाकिस्तान पर एक परोक्ष हमला ही कहा जा सकता है। साथ ही, आंतकवाद के खिलाफ एक साथ कदम बढ़ाने पर भी चर्चा की गयी। दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारियां साझा करने और खुफिया जानकारी के आधार पर दाऊद को ढूँढने के लिए भी बातचीत हुई है। हालांकि इस मसले पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप साफ कर चुके हैं कि वो इस बारे में ज्यादा जानकारियों को साझा नहीं कर सकते हैं, लेकिन उक्त बातों को देखते हुए इतना समझा जा सकता है कि भारत और युएई के बीच आतंकवाद को लेकर भी कुछ न कुछ ठोस रणनीति बनी है।

अगर थोड़ा पीछे जाकर देखा जाए तो पता चलेगा कि साल 2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी यूएई दौरे पर गए थे, तब दोनों देशों के बीच भारत के मोस्ट वॉन्टेड अपराधी दाऊद इब्राहिम के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम उठाने की बात कही गई थी। मोदी के दौरे के बाद यूएई ने दोस्ती निभाते हुए दाऊद की 15 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी जब्त कर ली थी। इस तरह समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासस्वरूप यूएई से भारत के संबंधों में एक नयी ऊर्जा और ताज़गी आ रही है तथा दोनों देश परस्पर सहयोग के साथ विभिन्न मुद्दों पर आगे बढ़ रहे हैं। यूईए से सम्बन्धों में सकारात्मक ताज़गी आना पाकिस्तान को लेकर भारतीय कूटनीति की दृष्टि से काफी अच्छा माना जा सकता है। यूएई का साथ मिलने से भारत का पक्ष और मजबूत हो जाएगा, जिससे पाकिस्तान की मुश्किलें स्वाभाविक रूप से बढ़ेंगी।

(लेखिका पेशे से पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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