अखिलेश सरकार के विकास के दावों की पोल खोलते आंकड़े

उत्तर प्रदेश चुनाव में सत्तारूढ़ सपा के सर्वेसर्वा और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ‘काम बोलता है’ का नारा लगाते हुए राज्य  में अपने कथित विकास की ढोल पीट रहे हैं, लेकिन जब हम राज्य के विकास से सम्बंधित आंकड़ो पर नज़र डालते हैं, तो दूसरी ही तस्वीर सामने आती है। यूपी विकास केंद्रित मापदंडो पर बेहद पिछड़ा हुआ दिखाई देता है। गौरतलब है कि सन 2012 जब प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार बनी, तबसे लेकर अबतक प्रदेश की विकास दर 3.9 प्रतिशत से 6.5 प्रतिशत के बीच ही हिचकोले खाती रही, जबकि इसी अवधि में देश की विकास दर 5.6 प्रतिशत से 7.6 प्रतिशत रही है। तात्पर्य यह है कि अखिलेश राज के पूरे कालखंड में प्रदेश की विकास दर देश की आर्थिक वृद्धि दर के निकट तक नहीं हो पायी। ये देखते हुए अनुमान जताया जा रहा है कि अगर सूबे की विकास की गति ऐसी रही तो उसे विकास के रास्ते पर देश के साथ कदमताल करने में दशकों लग जाएंगे। यही नहीं, उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय का औसत भी देश की प्रति व्यक्ति आय की औसत से आधा है। राजस्थान जो कभी प्रति व्यक्ति आय के मामले में यूपी से पीछे हुआ करता था, अब वो भी आगे निकल गया है। जब विकास की ज़मीनी स्थिति ऐसी है, फिर सवाल उठता है कि अखिलेश यादव आखिर किस आधार पर राज्य में विकास की ढोल पीट रहे हैं ?

उल्लेखनीय होगा कि जिन बीमारू राज्यों की अवधारणा दशकों पहले प्रस्तुत की गयी थी, उसमें  शामिल मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्य भाजपा शासन में विकास के कीर्तिमान स्थापित कर खुद को इस श्रेणी से कबका बाहर कर चुके हैं, लेकिन सपा-बसपा शासन में उलझा उत्तर प्रदेश अब भी बीमारू राज्य की श्रेणी में ही बना हुआ है. ऐसे में, अखिलेश को बताना चाहिए कि जब यूपी अब भी ‘बीमारू’ राज्य बना हुआ तो वे कौन-से विकास का दावा कर रहे हैं ?

आधारभूत संरचना के मामले में जिस आगरा-लखनऊ 6 लेन राजमार्ग की बात अखिलेश यादव करते हैं, वह उनके निर्वाचन क्षेत्र के निकट है, जहाँ से उनकी पार्टी को सबसे ज्यादा वोट प्राप्त होते हैं। अब इस राजमार्ग के निर्माण कार्य में जो धन राशि व्यय हुई है, वह राजमार्ग के किमी निर्माण हेतु  निर्धारित राशि का लगभग दुगुना है। ऐसे में, इस परियोजना को लेकर अखिलेश सरकार को संदेह की दृष्टि से देखा जाना गलत नहीं होगा। अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि इस परियोजना में निर्धारित धन राशि से दुगुनी राशि क्यों लगी ?

यह भी उल्लेखनीय होगा कि जिन बीमारू राज्यों की अवधारणा दशकों पहले प्रस्तुत की गयी थी, उसमें  शामिल मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्य भाजपा शासन में विकास के कीर्तिमान स्थापित कर खुद को इस श्रेणी से कबका बाहर कर चुके हैं, लेकिन सपा-बसपा शासन में उलझा उत्तर प्रदेश अब भी बीमारू राज्य की श्रेणी में ही बना हुआ है। ऐसे में, अखिलेश को बताना चाहिए कि यूपी अब भी ‘बीमारू’ राज्य बना हुआ तो वे कौन-से काम के बोलने का दावा कर रहे हैं ?

दरअसल यूपी की बदहाली के लिए कांग्रेस और अखिलेश से लेकर मायावती तक सब  बराबर के जिम्मेदार हैं। क्योंकि, यूपी में सर्वाधिक शासन इन्हीं तीन दलों का रहा है। कांग्रेस और उसके बाद सपा व बसपा इन तीनों के शासनकाल में लोगों ने देखा है कि उत्तर प्रदेश सिर्फ भ्रष्टाचार, गुंडाराज और कुशासन का शिकार रहा है। वर्तमान में जब सपा सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, ऐसे वक़्त में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के मामले में उत्तर प्रदेश की हालत एकदम बदतर है। अतः सवाल उठता है कि जब प्रदेश के विकास के लिए अखिलेश सरकार ने इतना काम किया है कि उनका काम बोलने लगा है, तो फिर आंकड़ों में सूबे की ये दुर्दशा क्यों है ? अखिलेश यादव को इन सवालों का जवाब तो देना ही चाहिए।

(लेखिका पत्रकारिता की छात्रा हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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