केवल दूसरों पर आरोप ही लगाते रहेंगे या अपने वादे भी पूरे करेंगे, केजरीवाल !

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविन्द केजरीवाल को दिल्ली में सरकार बनाए और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किए दो साल से अधिक का समय हो चुका है। फ़रवरी, 2015 में वे 67 सीटें जीतकर बड़े बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता पर काबिज हुए थे। दिल्ली की जनता ने उनके बड़े-बड़े और लोक लुभावने वादों पर भरोसा कर उन्हें इतना बड़ा जनादेश दिया। लेकिन, सत्ता में आने के बाद से अबतक की अवधि में अगर देखें तो केजरीवाल ने काम के नाम पर तो अपना एक वादा भी ढंग से पूरा नहीं किया है, लेकिन दूसरों पर आरोप लगाने और बेवजह के विवाद खड़े करने में अग्रणी रहे हैं। मुफ्त पानी देने, बिजली के दाम आधे करने, दो लाख सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण करवाने जैसे वादे लोगों के लिए धोखा ही साबित हुए हैं। मुफ्त पानी के वादे की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि दिल्ली के बहुधा इलाकों में अभी पाइप लाइन पहुंची ही नहीं है, तो फिर सरकार मुफ्त पानी वहाँ कैसे पहुंचाएगी ? इसके मद्देनज़र पाइप लाइन बिछाने के लिए केजरीवाल सरकार ने एक इंच कदम भी नहीं बढ़ाया है। बिजली-पानी के इन वादों को कितना पूरा किया गया है, इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि अब एमसीडी चुनाव में उतरे केजरीवाल फिर यही वादे दिल्ली की जनता के सामने दोहरा रहे हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि दो साल में पूर्ण बहुमत की सरकार लेकर उन्होंने क्या किया कि अभी भी उन्हें अपने पुराने वादे ही दोहराने पड़ रहे हैं ?

महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरी दिल्ली में 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगवाने, 20 नए डीग्री कॉलेज खोलने, दिल्ली के मौजूदा विश्वविद्यालयों की सीटें दुगुनी करने, 15000 होम गार्ड जवानों के जरिये महिला सुरक्षा बल का गठन करने, 47 नयी फास्ट ट्रैक कोर्टों की स्थापना करने, अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित व सुव्यवस्थित करने, फ्री वाई-फाई देने, जैसे अनेक बड़े-बड़े वादे अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से किए थे। आज उनके शासन के दो साल हो जाने के बाद अगर हम देखें तो इनमें से किसी वादे के पूरा होने की दिशा में कोई सुगबुगाहट भी नज़र नहीं आती।

ये तो बिजली-पानी की बात हुई। केजरीवाल ने कुछ और बड़े हाई-फाई वादे दिल्ली के लोगों से किए थे। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पूरी दिल्ली में 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगवाने, 20 नए डीग्री कॉलेज खोलने, दिल्ली के मौजूदा विश्वविद्यालयों की सीटें दुगुनी करने, 15000 होम गार्ड जवानों के जरिये महिला सुरक्षा बल का गठन करने, 47 नयी फास्ट ट्रैक कोर्टों की स्थापना करने, अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित व सुव्यवस्थित करने, फ्री वाई-फाई देने, जैसे अनेक बड़े-बड़े और अद्भुत वादे अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से किए थे। आज उनके शासन के दो साल हो जाने के बाद अगर हम देखें तो इनमें से किसी वादे के पूरा होने की दिशा में कोई सुगबुगाहट भी नज़र नहीं आती। सीसीटीवी कैमरे और अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितिकरण के वादे का नाम भी अब आम आदमी पार्टी के नेता नहीं लेते। २० डिग्री कॉलेज खुलने का वादा तो ऐसे चर्चा से गायब है, जैसे कभी किया ही न गया हो। वाई-फाई के वादे की हालत ये है कि अब इसपर लोग चुटकुले बनाने लगे हैं। स्पष्ट है कि केजरीवाल सरकार दो साल के शासन में जनता से किए अपने वादों की कसौटी पर पूरी तरह से विफल साबित हुई है।

दरअसल वादे पूरे करने के लिए काम करना पड़ता है, मगर केजरीवाल दो साल से केवल दूसरों पर आधारहीन आरोप लगाने, विवाद मचाने और अलग-अलग राज्यों के विधानसभा चुनाव लड़ने में लगे हुए हैं। कभी दिल्ली के उपराज्यपाल से, कभी पुलिस आयुक्त से तो कभी केंद्र सरकार से बेवजह की लड़ाई ठानकर बैठ जाना उनका मुख्य शगल रहा है। अब इन दिनों वे ईवीएम में खराबी को लेकर बेवजह का हल्ला मचाए हुए हैं। यहाँ तक कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर भी उन्होंने सवाल उठा दिया है। दरअसल वादे पूरे न कर पाने के कारण अपने प्रति दिल्ली के लोगों के आक्रोश का अंदाज़ा केजरीवाल को है, इसलिए कहीं न कहीं वे ईवीएम में खराबी का बवाल मचाकर एमसीडी चुनाव में होने वाली अपनी संभावित हार से खुद का बचाव करने के लिए भूमिका तैयार करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल, कहना न होगा कि जिस उम्मीद से दिल्ली के मतदाताओं ने केजरीवाल के बड़े-बड़े वादों पर भरोसा करके उन्हें भारी बहुमत देकर सत्ता में भेजा था, केजरीवाल का अबतक का शासन उन उम्मीदों को धूमिल करने वाला है। सवाल यही उठता है कि क्या केजरीवाल सिर्फ दूसरो पर आरोप ही लगाते रहेंगे या अपने वादे पूरे करने की तरफ भी उनकी नज़र घूमेगी ?

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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