‘इंटरनेट से केवल सूचनाएं मिल सकती हैं, ज्ञान पुस्तकों से मिलता है’

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पुस्तकों की उपयोगिता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल की चर्चा की, जिसमें मोदी ने स्वागत कार्यक्रमों में अतिथियों को ‘बुके’ के स्थान पर ‘बुक’ भेंट करने का अनुरोध किया है। मेले के आयोजन के लिए विशेष पहल करने वाले उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि मेले की थीम ‘’पढ़ेगा उत्तराखंड, तो बढ़ेगा उत्तराखंड’’ रखी गई है। एनबीटी के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा ने मेले के आयोजन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा दिखाए गए उत्साह की सराहना की और भविष्य में और बेहतर आयोजन का आश्वासन दिया।

गूगल व इंटरनेट के दौर में डिजिटल तकनीक का बोलबाला भले ही हो, किंतु पुस्तकों की उपयोगिता आज भी कम नहीं हुई है। पुस्तकों के प्रति पाठकों का रूझान बरकरार है। गंभीर पाठकों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। समय के साथ पुस्तकों में रूचि और उनके खरीददारों की संख्या में अंतर आया है, किंतु पाठकों के उत्साह में नहीं। इसकी बानगी 28 अगस्त से 5 सितम्बर तक शिक्षा नगरी देहरादून में आयोजित नौ दिवसीय पुस्तक मेले में देखने को मिली।

नेशनल बुक ट्रस्ट (एनबीटी) के तत्वावधान और उत्तराखण्ड के उच्च शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से आयोजित यह पुस्तक मेला राज्य में पहली बार देखने को मिला। मेले का उद्घाटन प्रदेश के राज्यपाल डा.के.के.पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डा. धन सिंह रावत, एनबीटी के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा व भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने संयुक्त रूप से किया।

मेले में देश के नामी प्रकाशकों समेत करीब 115 प्रकाशकों के स्टाल लगे थे। मेले में बाल साहित्य से लेकर भारतीय-वैश्विक साहित्य, विज्ञान, कला, धर्म, राज व्यवस्था, आर्थिकी के अलावा उत्तराखंड के विविध विषयों को लेकर पुस्तकें नजर आई। प्रकाशकों द्वारा पुस्तकों की खरीद पर पाठकों के लिए 10 से 20 फीसदी तक की छूट दी गई थी।

अपने संबोधन में राज्यपाल डा. के.के. पाल ने पुस्तकों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला और कहा कि ज्ञान व सूचना में अंतर है। इंटरनेट व सोशल मीडिया से केवल सूचनाएं मिल सकती हैं। मगर, ज्ञान किताबों से प्राप्त होता है। उन्होंने इंटरनेट के प्रति अंधभक्ति से पैदा होने वाले खतरों को लेकर सचेत किया और कहा कि इंटरनेट के माध्यम से बहुत सूचनाएं प्रामाणिक नहीं होती हैं। ऐसे में प्रामाणिक सूचनाओं का चयन करना चुनौतिपूर्ण है। लिहाजा, इन चुनौतियों से पार पाने में पुस्तकें सहायक हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने पुस्तकों की उपयोगिता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस पहल की चर्चा की, जिसमें मोदी ने स्वागत कार्यक्रमों में अतिथियों को ‘बुके’ के स्थान पर ‘बुक’ भेंट करने का अनुरोध किया है। मेले के आयोजन के लिए विशेष पहल करने वाले उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने कहा कि मेले की थीम ‘’पढ़ेगा उत्तराखंड, तो बढ़ेगा उत्तराखंड’’ रखी गई है। एनबीटी के चेयरमैन बलदेव भाई शर्मा ने मेले के आयोजन को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा दिखाए गए उत्साह की सराहना की और भविष्य में और बेहतर आयोजन का आश्वासन दिया।

मेले के दौरान लेखकों व बुद्धिजीवियों के संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। वरिष्ठ लेखकों व साहित्यकारों ने छात्र-छात्राओं को लेखन कला का ज्ञान दिया। मेले में प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री रस्किन बांड की उपस्थिति आकर्षण का केन्द्र रही। रस्किन बांड ने बच्चों को लेखनी के टिप्स दिए और उनसे संवाद किया। बांड ने बच्चों से कहा, ‘मन में जो चल रहा होता है। बस उसे लेखनी का रूप देना चाहिए।‘ बांड ने माना कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों की उपयोगिता कम नहीं हुई है।

पुस्तक मेले में कई लेखकों व साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। एनबीटी द्वारा प्रकाशित युवा साहित्यकार मुकेश नौटियाल की कहानी संग्रह ‘‘धम्मचक्र के उस पार’’ चर्चा में रही। राजनेता व साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के कहानी मंचन, गीत, नृत्य आदि को लेकर ‘‘एक शाम-निशंक साहित्य के नाम’’ का आयोजन भी आकर्षक रहा।

हालांकि, भारी वर्षा के कारण एक-दो दिन मेले में पाठकों की उपस्थिति कुछ कम रही। फिर भी पहली बार आयोजित पुस्तक मेला पाठकों को अपनी ओर खींचनेमें सफल रहा। बहरहाल, एनबीटी व उच्च शिक्षा मंत्रालय के साझा प्रयासों से उत्तराखण्ड के पुस्तक प्रेमियों के लिए यह एक बड़ी सौगात थी।

(लेखक उत्तराखंड भाजपा के मीडिया संपर्क विभाग के प्रमुख हैं।)

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