सामाजिक-आर्थिक प्रगति को बुलेट ट्रेन से मिलेगी रफ्तार

भारत में हाई-स्पीड ट्रेन की शुरूआत निश्चित रूप से युवा भारतीयों के लिए नौकरी और कौशल का नया अवसर प्रदान करेगी, जिससे भारत के कौशलपूर्ण होने की आकांक्षाओं को भी बल मिलेगा। परियोजना को अमलीजामा पहनाने के बाद संचालन और रखरखाव के लिए 4,000 कर्मचारी प्रत्यक्ष रोजगार पायेंगे एवं लगभग 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। रोजगार सृजन के अलावा, ब्लास्टलेस ट्रैक निर्माण, बेहतर संचार व सिग्नलिंग उपकरण, बिजली वितरण प्रणाली आदि क्षेत्र में भी बेहतरी आयेगी।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अहमदाबाद में मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (एमएएचएसआर) परियोजना की आधारशिला रखी। इसके साथ ही भारत 20 देशों के एक खास समूह में शामिल हो गया। यह परियोजना लोगों के लिए सुरक्षा, गति और बेहतर सेवा के एक नये युग का सूत्रपात करेगी। माना जा रहा है कि विश्व में तीसरा सबसे लंबा नेटवर्क होने का फायदा उठाते हुए भारतीय रेल गति और कौशल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ने में सफल रहेगी।       

जापानी बुलेट ट्रेन प्रौद्योगिकी के शुरूआत को केवल आर्थिक अवसरों के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। इससे सामाजिक और कारोबारी सरोकार भी जुड़े हैं। इस नई तकनीक से आम जनता और अभिजात्य वर्ग के बीच मौजूदा खाई को पाटने में मदद मिलेगी। इस प्रौद्योगिकी की लागत अधिक होने के कारण तुरत-फुरत में आम लोगों को इसका फायदा नहीं मिलेगा, लेकिन आने वाले दिनों में आम लोग भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। कंप्यूटर, स्मार्ट फोन आदि जो कभी अभिजात्य वर्ग की सुविधा की चीजें मानी जाती थीं, आज आमजन के लिये भी अपरिहार्य हैं।

फिलवक्त बुलेट ट्रेन को जरूर अभिजात्य वर्ग का परिवहन साधन माना जा रहा है, पर धरातल पर उतरने के बाद जल्द ही परिवहन के क्षेत्र में यह क्रांति लाने का काम करेगी। गौरतलब है कि इस परियोजना की लागत 88,000 करोड़ रुपये की है, लेकिन इसे जापान ने भारत को लंबी पुनर्भुगतान अवधि के साथ महज 0.1% के ब्याज दर पर उपलब्ध कराया है, जो मौजूदा ब्याज दर जो करीब 5 से 7% है से काफी कम है। इस नजरिये से देखा जाये तो जापान ने भारत को यह पूँजी लगभग मुफ्त में उपलब्ध कराई है।

जापान की उच्च गति वाली शिंकासन प्रणाली विश्व में सबसे सुरक्षित, आरामदायक और समय की पाबंद है। इस प्रणाली से जुड़े हुए शहरों में कारोबार एवं आर्थिक विकास को बल मिलना निश्चित है, क्योंकि मोटे तौर पर महानगर की सुविधायें छोटे शहरों तक आसानी से पहुँच सकेंगी। मौजूदा समय में मुंबई एवं अहमदाबाद हवाई एवं सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़े हैं, लेकिन व्यस्त समय में लोगों के लिये हवाई अड्डा पहुँचने में मुश्किल होती है।

इधर,  हवाई यात्रा करना ज्यादातर भारतीयों के लिए आज भी एक सपना है, क्योंकि 10% से कम आबादी ही इस सुविधा का लाभ उठा पा रही है। राजधानी, दुरंतो सहित दूसरी तमाम तेज गति वाली ट्रेनों में भीड़ का भारी दबाव है। इन ट्रेनों में से कुछ ट्रेनें 160 से 170 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हैं। फिर भी वे समय पर अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पा रही हैं। बुलेट ट्रेन परियोजना के लागू होने के बाद इस सुविधा का लाभ लगभग 40,000 यात्री प्रति दिन उठा सकेंगे, जिसके वर्ष 2053 तक बढ़कर 156000 होने की संभावना है।

बुलेट ट्रेन के आने के बाद छोटे शहरों के लोग भी महानगर की सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्हें इसके लिये महानगर के महंगे घरों में रहने के लिये मजबूर नहीं होना पड़ेगा। इस प्रक्रिया के सक्रिय होने से कस्बाई एवं छोटे शहरों के लोग भी मुख्यधारा में आ सकेंगे। बिचौलिये उनका शोषण नहीं कर पाएंगे। इससे कस्बाई एवं छोटे शहरों में विकास की मंद हो गई बयार में तेजी आयेगी। यूरोप में उच्च गति वाले रेलमार्ग ने प्रांतीय शहरों में सबसे ज्यादा विकासात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया है। गौरतलब है कि दूरदराज के इलाकों को मुख्य बाज़ारों से जोड़ने से कारोबार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ विकास के वाहकों को भी बल मिलता है।

भारत में हाई-स्पीड ट्रेन की शुरूआत निश्चित रूप से युवा भारतीयों के लिए नौकरी और कौशल का नया अवसर प्रदान करेगी, जिससे भारत के कौशलपूर्ण होने की आकांक्षाओं को भी बल मिलेगा। परियोजना को अमलीजामा पहनाने के बाद संचालन और रखरखाव के लिए 4,000 कर्मचारी प्रत्यक्ष रोजगार पायेंगे एवं लगभग 16,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। रोजगार सृजन के अलावा, ब्लास्टलेस ट्रैक निर्माण, बेहतर संचार व सिग्नलिंग उपकरण, बिजली वितरण प्रणाली आदि क्षेत्र में भी बेहतरी आयेगी।

इस प्रणाली के रखरखाव के लिए आधुनिक एवं विश्वस्तरीय मानकों को अपनाया जायेगा। भारत में मौजूदा रेल ट्रैक के रखरखाव प्रणाली में भी बदलाव आने की उम्मीद है। भारत 6-सिग्मा प्रक्रिया से टर्मिनस पर सात मिनट के अंदर ट्रेनों की सफाई करने के साथ-साथ जापान के दूसरे कौशलों को भी सीख सकता है, जिससे सामान्य एवं मेट्रो ट्रेनों में बेहतर तरीके से साफ-सफाई की जा सकेगी।    

उच्च गति रेल (एचएसआर) प्रणाली से उल्लेखनीय पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। अध्ययन बताते हैं कि एचएसआर प्रणाली में विमानों की तुलना में करीब 3 गुना कम ईंधन की जरूरत होती है, वहीं कारों के मुक़ाबले इसमें 5 गुना कम ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि सड़कों एवं हवाई अड्डों में ट्रैफिक जाम एवं भीड़ की वजह से अमेरिका में ईंधन पर लगभग 87 अरब डॉलर खर्च किये जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) देशों ने वर्ष 2020 के बाद कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ-साथ दूसरे संबंधित मोर्चों पर कड़े कदम उठाने पर सहमति जताया है। ऐसा माना जा रहा है कि भारत में बुलेट ट्रेन को शुरू करने से यूएनएफसीसीसी द्वारा लक्षित लक्ष्य को हासिल करने में भारत को आसानी होगी।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र, मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में मुख्य प्रबंधक हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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