लोगों में स्वच्छता की ‘आदत’ विकसित करना है मोदी सरकार का मुख्य लक्ष्य

केंद्र सरकार स्वच्छता को सिर्फ़ साफ़-सफ़ाई रखने के भौतिक उपादानों तक सीमित न कर के लोगों में इसे एक आदत के रूप में विकसित करना चाहती है। सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को साफ़-सफ़ाई  के बारे में जागरूक कर उसे लोगों के जीवन में उतारने का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री लगातार प्रयासरत हैं। सरकार द्वारा शौचालय का निर्माण करा के दे भर देने मात्र से कार्य समाप्त नहीं हो जाता, यह कार्य तब पूर्ण  माना जाएगा जब लोग उसका उपयोग भी करें।

भारत के सबसे साफ़ माने जाने वाले शहर अगर विदेशों के साफ़ माने जाने वाले शहरों से बहुत पीछे दिखाई पड़ते हैं तो उसके पीछे एक बड़ा कारण है उस गंदगी को जो जगह-जगह,यहाँ-वहाँ पड़ी मिलती है, को दिया गया हमारा न्योता व उसको हमारे समाज द्वारा दी गयी स्वीकृति। हम छोटे से बड़े हो गए, शिक्षित हुए, समाज में साक्षरता दर लगातार बढ़ती गयी और आज एक संतोषजनक स्तर पर है, परंतु समाज में साफ़-सफ़ाई की स्थिति बेहद चिंताजनक है।

जब  हम पढ़-लिख रहे थे, तो साफ़-सफ़ाई को एक अच्छे लक्षण व मूल्य के रूप में हमारे मस्तिष्क  में आरोपित किया गया, परंतु एक आदत  के रूप में इसका विकास ना कर पाना  एक विफलता मानी जानी चाहिए।जिस दिन यह मूल्य एक आदत के रूप में तब्दील होगा, उस दिन इसके व्यावहारिक प्रभाव को हम अपने आस-पास,समाज में देख पाएँगे।

हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जो स्वच्छ परिवेश के पक्षधर थे, उनकी मृत्यु के 60 वर्ष बाद तक भी हमने लोगों व सरकारों में उनके स्वच्छता सम्बंधी मूल्यों को लेकर कोई विशेष रुचि नहीं देखी। परंतु, वर्तमान सरकार द्वारा इस विषय को गम्भीरता से लिया गया एवं एक अभियान के तहत इसे 2 अक्टूबर, 2014 को गांधी जयंती  के अवसर पर शुरू किया गया। केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छता को लेकर लगातार कई योजनाएँ शुरू की गयीं व उनका एक सकारात्मक परिणाम हमारे समक्ष उपस्थित है।

युद्ध स्तर पर शुरू किए गए इस अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अंतर्गत लगभग 5 करोड़ शौचालयों  का निर्माण किया गया। वहीं शहरी क्षेत्रों के अंतर्गत जहाँ शौचालयों की स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों से बेहतर थी, वहाँ 38 लाख शौचालयों  निर्माण किया गया व 14 लाख शौचालय निर्माणाधीन हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में  जहाँ  पहले शौचालयों की मौजूदगी 39 प्रतिशत थी, अब वह बढ़कर 69 प्रतिशत तक पहुँच गयी है जो इस अभियान की सफलता को धरातल पर स्थापित करता है। इस दौरान कुल 248000 गाँव, 203 जनपद व 5 राज्य (सिक्किम, हिमाचल प्रदेश,केरल,उत्तराखंड  व हरियाणा) पूर्ण रूप से खुले  में शौच से मुक्त हुए।

केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ये योजनाएँ निश्चित रूप से बेहतर कार्य कर रहीं हैं, जिनका परिणाम सबके सामने उपस्थित है; परंतु केंद्र सरकार का प्रयास इससे कहीं ज़्यादा है। वह स्वच्छता को सिर्फ़ साफ़-सफ़ाई रखने के भौतिक उपादानों तक सीमित न कर के लोगों में इसे एक आदत के रूप में विकसित भी करना चाहती है। सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को साफ़-सफ़ाई  के बारे में जागरूक कर उसे लोगों के जीवन में उतारने का है, जिसके लिए प्रधानमंत्री लगातार प्रयासरत हैं। सरकार द्वारा शौचालय का निर्माण करा के दे भर देने मात्र से कार्य समाप्त नहीं हो जाता, यह कार्य तब पूर्ण  माना जाएगा जब लोग उसका उपयोग भी करें।

सांकेतिक चित्र

इस अभियान की एक बड़ी विशेषता इसका विकेंद्रीकृत रूप है। अधिकतर योजनाएँ जो पूरे देश में एक साथ लागू होती हैं, उनमें शहरी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है, परंतु स्वच्छ भारत अभियान में शहरों के साथ ही साथ गाँवों को उसी मात्रा में महत्व दिया गया अपितु वहाँ शौचालयों का अधिक निर्माण किया गया। यह योजना सिर्फ़ शहरों तक ही सीमित होकर नहीं रह गयी। इस अभियान को ग्रामीणों द्वारा अपनाया जाना एक सुखद संकेत देता है।

बहुत सी महिलाएँ जो विवाह के बाद ससुराल गयीं व वहाँ शौचालय ना होने के कारण वापस अपने घर आ गयीं। राँची  के एक गाँव में खुले  में शौच करने वाले पुरुषों की लुंगी को ग्रामीणों द्वारा ज़ब्त किया जाना, स्वच्छता  को लेकर ग्रामीणों द्वारा एक सख्त क़दम  माना जाना चाहिए और वास्तव में ये उदाहरण इस अभियान के ग्रामीण स्तर पर मज़बूत होने को ही दिखाते हैं, लोगों की आदत में सुधार व उनके जागरूक हो जाने  का नमूना पेश करते हैं।

वास्तव में यह सरकार का हीं नहीं हम सबका सम्मिलित अभियान है। इसमें हम अपना जितना योगदान दें, वह अपने समेत समाज व देश के लिए बेहतर कार्य करेगा। इस अभियान में शामिल हमारे सभी सफ़ाईकर्मी कर्मचारी जो इस अभियान की रीढ़ हैं,उन्हें सम्मान देना हमारा कर्तव्य होना चाहिए न कि उन्हें हेय दृष्टि से देखें।

सेप्टिक टैंकों को साफ़ करते समय कई सफ़ाईकर्मियों की मृत्यु चिंताजनक है, सरकार को जल्द ही इसका उपाय तकनीक की सहायता से निकालना होगा ताकि सफ़ाई करते समय किसी के बहुमूल्य जीवन को संकट से  बचाया  सके। 2 अक्टूबर 2019 को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर भारत अगर लोगों की आदतों  में हुए बदलाव से स्वच्छता के संतोषजनक स्तर तक पहुँच सके तो यह देशवासियों द्वारा राष्ट्रपिता को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

(लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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