केदारनाथ का पुनर्निर्माण : मोदी जो ठान लेते हैं, उसे पूरा करके रहते हैं !

वर्ष 2013 की भीषण आपदा में केदारपुरी के बुरी तरह से तबाह होने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी उत्तराखंड आए थे। तब उन्होंने उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समक्ष केदारपुरी के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव रखा था। प्रदेश सरकार मोदी के प्रस्ताव पर सहमत हो गई थी। मगर मीडिया में इस खबर के प्रसारित होते ही तूफान मच गया और कांग्रेस हाईकमान के दबाव में उत्तराखंड सरकार ने मोदी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में कहा जाता है कि वह जिस बात को ठान लेते हैं, उसे पूरा करके रहते हैं। उनकी यह संकल्पबद्धता देश-विदेश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र श्री केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण के मामले में देखने को मिल रही है। वर्ष 2013 की भीषण आपदा में केदारपुरी के बुरी तरह से तबाह होने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी उत्तराखंड आए थे। तब उन्होंने उत्तराखंड की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समक्ष केदारपुरी के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव रखा था। प्रदेश सरकार मोदी के प्रस्ताव पर सहमत हो गई थी। मगर मीडिया में इस खबर के प्रसारित होते ही तूफान मच गया और कांग्रेस हाईकमान के दबाव में उत्तराखंड सरकार को मोदी के प्रस्ताव को अस्वीकृत करना पड़ा।

मोदी को अपने अधूरे संकल्प पर कार्य करने का अवसर तब मिला, जब इस वर्ष उत्तराखंड में प्रचंड बहुमत के साथ भाजपा की सरकार गठित हुई। भाजपा सरकार गठित होने के बाद इस वर्ष 3 मई को केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर मोदी ने बाबा केदार के दरबार में मत्था टेका और करीब साढ़े पांच माह बाद कपाट बंद होने से एक दिन पहले 20 अक्टूबर को मोदी ने केदारपुरी में करीब 700 करोड़ रूपये के पुनर्निर्माण कार्यों का शिलान्यास किया। 

गौरतलब है कि 16/17 जून, 2013 को हुए भीषण जल प्रलय में केदारनाथ धाम में भारी तबाही मची थी। आश्चर्यजनक ढंग से केदारनाथ मंदिर को छोड़कर अधिकांश केदारपुरी तहस-नहस हो गई थी। देश-विदेश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों तीर्थयात्री असमय काल-कवलित हो गए थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि केदारनाथ आपदा के नाम पर राजनीति बहुत हुई। केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य घोटालों को लेकर चर्चा में रहे। निर्माण कार्यों के लिए आया पैसा अनाप-शनाप तरीके से फूंका गया। मगर नई केदारपुरी के मामले में पूर्ववर्ती सरकार कोई ठोस पहल नहीं कर सकी। 

प्रदेश और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार गठित होने पर श्रद्धालुओं व स्थानीय जनता में नई केदारपुरी के मूर्त रूप लेने की उम्मीद जगीं। लोगों की उम्मीदों को बल इस वर्ष कपाट खुलने पर केदारनाथ में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति से मिला। मोदी की उपस्थिति का ही प्रभाव था कि आपदा के पश्चात पहली बार इस वर्ष करीब पांच लाख यात्री केदार बाबा के दर्शन को पहुंचे। हालांकि, मोदी ने नई केदारपुरी के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान अगले बरस श्रद्धालुओं की संख्या दुगनी होकर दस लाख तक पहुंचने की उम्मीद जताई है।

मोदी की इन उम्मीदों के पीछे कारण नई केदारपुरी को लेकर उनका ‘विजन’ है। उन्होंने नई केदार पुरी को ‘भव्य’ व ‘दिव्य’ बनाने का वादा किया है। मोदी ने घोषणा की कि पुनर्निर्माण कार्यों में धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने विभिन्न राज्य सरकारों व कॉरपोरेट घरानों से पुनर्निर्माण में सहयोग की अपील की। मोदी ने कहा कि हर देशवासी का सपना होता है केदारनाथ धाम की यात्रा का।  उन्होंने केदारनाथ की महत्ता को पूरे देश से जोड़ते हुए कहा कि उत्तराखंड की धरती में हो रहा यह कार्य जन-जन की आस्था से जुड़ा है। 

नई केदार पुरी के निर्माण और शिल्प पर प्रधानमंत्री ने खुद विशेष फोकस रखा हुआ है। नई केदारपुरी की मोदी की परिकल्पना में आधुनिकता के साथ-साथ आध्यात्मिक व सांस्कृतिक परम्पराओं का समन्वय दिखाई देगा। इसके साथ ही, जैसा खुद प्रधानमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों में पर्यावरण व प्रकृति की अनदेखी नहीं की जाएगी।

मोदी की नई केदारपुरी में  जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की समाधि स्थल का जीर्णोद्धार करके भव्य स्वरूप दिया जाएगा। मंदिर के समीप बह रही मंदाकिनी व सरस्वती नदियों के तट पर बाढ़ सुरक्षा व घाटों के निर्माण किए जाएंगे और साथ ही घाटों का सौंदर्यीकरण होगा। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के लिए तीन मंजिला आवास बनेंगे। मंदिर मार्ग पर समय के हिसाब से भक्तिमय संगीत बजेगा। केदारपुरी में यात्रियों की सुविधा के लिए एटीएम, बैंक, पोस्ट ऑफिस, कंप्यूटर सेंटर आदि की सुविधा मुहैया कराई जाएंगी।  पुरी में लेजर शो और यात्रियों को ध्यान केंद्र की सुविधा के लिए गुफाएं निर्मित होंगी। इसके साथ ही त्रासदी में मृत लोगों की स्मृति केंद्र भी बनेगा।

समुद्र तल से लगभग साढे़ ग्यारह हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारपुरी ठंड के दिनों में करीब छह माह तक पूरी तरह से भारी बर्फ से ढकी होती है। ऐसे में तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य को अंजाम देना चुनौती से कम नहीं है। मगर विशेषज्ञ मानते हैं कि आज तमाम निर्माण एजेंसिया/कंपनियां मौजूद हैं, जो ऐसी भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने में सक्षम हैं। इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिस कार्य के प्रति प्रधानमंत्री की इतनी प्रतिबद्धता हो, उसमें किसी भी प्रकार की चुनौती बाधक बनेगी, इसकी आशंका नहीं के बराबर है।  

प्रधानमंत्री नई केदारपुरी को लेकर तत्पर दिख रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 20 अक्टूबर को केदारनाथ में शिलान्यास करने के ठीक एक सप्ताह बाद मोदी उत्तराखंड स्थित लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे। दिल्ली वापसी में उन्होंने हवाई अड्डे के सेफ हाउस में ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व राज्य के आला अधिकारियों के साथ बैठक कर केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा की।

प्रधानमंत्री ने शिलान्यास के एक सप्ताह बाद केदारनाथ पुर्ननिर्माण कार्यों की समीक्षा कर यह जता दिया कि यह कार्य उनकी प्राथमिकता में है। उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन की नई केदारपुरी जब मूर्त रूप लेगी तो वह श्रद्धालुओं के साथ-साथ देश दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र भी होगी।

(लेखक उत्तराखंड सरकार में मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष रहे हैं और स्वतंत्र पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

 

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