मोदी सरकार के सुधारों से अपने लक्ष्यों को पाने में कामयाब हो रही मनरेगा योजना !

सत्ता में आने के बाद जैसे ही मोदी सरकार ने मनरेगा की कार्य-पद्धति में विभिन्न बदलावों के माध्यम से भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना शुरू किया, हालात बदलने लगे। अब इस योजना से अनेक फायदे सामने आने लगे हैं। मनरेगा का मकसद ग्रामीण इलाकों से रोजगार की तलाश के कारण विस्थापन करने वालों को रोकना या कम करना है, जिसमें अब यह योजना सफल हो रही है। साथ ही, इस योजना की सफलता से ग्रामीण क्षेत्र की आधारभूत संरचना में भी मजबूती आ रही है।

मोदी सरकार ग्रामीण क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिये शिद्दत के साथ कोशिश कर रही है। महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को मजबूत बनाना सरकार की इसी रणनीति का हिस्सा है। ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के लिये सरकार ने वित्त वर्ष 2016-17 के लिये पूरक मांग के द्वारा बजट आवंटन में बढ़ोतरी की थी, जिससे वित्त वर्ष 2016-17 में मनरेगा के तहत कुल रोजगार सृजन 235.77 करोड़ व्यक्ति दिवस हुआ, जो पिछले 6 सालों में सर्वाधिक है।

वित्त वर्ष 2017-18 में भी मनरेगा के तहत बजटीय आवंटन 48,000 करोड़ रूपये किया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास को मुमकिन बनाया जा सके। ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2017-18 के लिए द्वितीय अनुपूरक अनुदान मांग के तहत 6,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कोष आवंटित किया है। मनरेगा के तहत अमूमन सड़क निर्माण, वृक्षारोपण, तालाब की खुदाई, नहर निर्माण, अस्तपताल, स्कूल व सामुदायिक भवन का निर्माण आदि कार्य किये जाते हैं, जिनसे ग्रामीणों को रोजगार तो मिलता ही है साथ ही साथ ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में भी मजबूती आती है।  

ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के मुताबिक ग्रामीण मंत्रालय ने पिछले तीन सालों में मनरेगा के जरिये ग्रामीण बुनियादी ढांचा के निर्माण पर जोर दिया है। साथ ही, पिछले दो सालों  में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थियों के घरों में शौचालय, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के लिये बुनियादी ढांचा को भी बढ़ावा दिया गया है। इस में दो राय नहीं है कि मनरेगा से ग्रामीण इलाकों में अस्थायी रोजगार का सृजन हुआ है और इससे ग्रामीणों के विस्थापन पर भी कुछ हद तक लगाम लगा है। हालाँकि, इस दिशा में अभी भी बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है।

इंस्टीट्यूट आफ इकनॉमिक ग्रोथ (आईईजी) द्वारा कराये गये एक सर्वे के मुताबिक मनरेगा के तहत जल संरक्षण का ढांचा तैयार किये जाने से करीब 78 प्रतिशत परिवार के इलाकों में जल स्तर बढ़ा है। ग्रामीण आमदनी में भी 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालाँकि, 80 प्रतिशत जिलों में विस्थापन में किसी तरह की कमी नहीं आने की बात कही गई है, लेकिन सर्वे किये गये 20 प्रतिशत जिलों के आंकड़ों से पता चलता है कि मनरेगा की वजह से विस्थापन में कमी आई है।

सर्वे किये गये 30 जिलों में करीब 18 प्रतिशत लाभार्थी परिवार ऐसे हैं, जिन्हें मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) का फायदा मिला है। सर्वे के मुताबिक 30 जिलों में से 6 जिलों में विस्थापन में कमी आई है, जिसमें महाराष्ट्र के जालना में न्यूनतम 10 प्रतिशत विस्थापन हुआ है, जबकि 24 जिलों में विस्थापन के आंकड़ों में कोई बदलाव नहीं आया। सर्वे के अनुसार मजदूरी के भुगतान में निरपवाद ढंग से 15 दिनों में भुगतान अनिवार्य रूप से किया गया है। 

गौरतलब है कि मनरेगा को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सप्रंग) के कार्यकाल में शुरू किया गया था। यह एक अच्छी योजना थी, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण इसका फायदा ग्रामीणों को नहीं मिल सका। उस समय इस योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल पा रहा था, जिन्हें रोजगार मिले, उन्हें मजदूरी नहीं मिली। कागजों पर ज्यादा काम किये गये। फर्जी लाभार्थियों के खातों में मजदूरी जमा कराई गई और फर्जी हस्ताक्षर से उसकी निकासी भी कर ली गई। मनरेगा योजना का लाभ लेने के लिए शिक्षक, क्लर्क, अधिकारी आदि भी मजदूर बन गये। कागजों में एक ही तालाब को कई बार खोदा भरा गया। ऐसे काले कारनामों को सरपंच, मुखिया, अधिकारी एवं नेता सभी लोगों ने मिलकर अंजाम दिया। इस प्रकार उस समय मनरेगा भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गयी थी।

लेकिन, सत्ता में आने के बाद जैसे ही मोदी सरकार ने विभिन्न बदलावों के माध्यम से मनरेगा की कार्य-पद्धति में भ्रष्टाचार को नियंत्रित करना शुरू किया, हालात बदलने लगे। अब इस योजना से अनेक फायदे सामने आने लगे हैं। मनरेगा का मकसद ग्रामीण इलाकों से रोजगार की तलाश के कारण विस्थापन करने वालों को रोकना या कम करना है, जिसमें अब यह योजना सफल हो रही है। साथ ही, इस योजना की सफलता से ग्रामीण क्षेत्र की आधारभूत संरचना में भी मजबूती आ रही है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

 

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