मोदी सरकार के लिए कैसा रहेगा 2018 ?

2017 के जाते-जाते जीडीपी को लेकर चल रहा आसन्न संकट भी फिलहाल टल गया है; उम्मीद बंधी है कि भारत विकास की लम्बी छलांग लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने “इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस” के क्षेत्र में भी ज़बर्दस्त तरक्की की है। विश्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि भारत में व्यापार करने का माहौल बदला है और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में किये गए सुधारों के नतीजे मिलने लगे हैं। मोदी सरकार के प्रति विश्वास दुनिया भर में बढ़ा है।

वर्ष 2018 का देश में चहुँ ओर स्वागत हो रहा है। बीते साल ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को ही एक पूरे साल चौकस और चौकन्ना खड़ा रखा, लेकिन देश की जनता के सामने उम्मीद और संभावनाओं के द्वार भी खोल दिए। वर्ष का अंत गुजरात चुनाव के नतीजों के साथ हुआ, जिसमें आखिरी बाजी तो पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की करिश्माई जोड़ी ने फिर मार ली। एक बार तो ऐसा लगा कि जातिवाद और समाज को बाँटने की कांग्रेस की साजिश कामयाब हो जाएगी, लेकिन जनता का मत कुछ और था। भाजपा को गुजरात में पांच साल और सरकार चलाने का जनादेश मिल गया।

हालाँकि यह एक राज्य का चुनाव था, लेकिन यह चुनाव बाकी राज्यों से कुछ ज्यादा ही रोचक और अहम था। चुनाव के नतीजों ने लोकतंत्र के प्रति लोगों के विश्वास को और ज्यादा मजबूत किया। वो लोग जो लगातार मिल रही हार के बाद ईवीएम पर सवाल खड़ा कर रहे थे, इन नतीजों के बाद खामोश हो गए। इस चुनाव में जीएसटी और नोटबंदी को हथियार बनाकर भाजपा सरकार के खिलाफ इस्तेमाल किया गया, लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए उठाए गए कदम को लोगों ने सराहा। मोदी सरकार ने विकास पर जोर दिया है, वहीं विपक्ष ने अपनी पूरी ताक़त नकारात्मक राजनीति पर खर्च किया है।   

हां, यह बात तय है कि भाजपा को जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरना पड़ेगा, समय-समय पर अन्तरावलोकन भी करना होगा। आने वाले लोक सभा चुनाव से पहले कम से कम आठ राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिनको लेकर समीकरण उभरने शुरू हो गए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर दुनिया भर में एक निश्चित सोच बनी है, प्यू (PEW) रिसर्च सेंटर ने कहा है कि देश की 80 % जनता भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को लेकर आश्वस्त है। 10 लोगों में से 9 लोगों में मोदी के गवर्नेंस के तरीकों को लेकर पूरा विश्वास है।

मोदी सरकार के प्रति विश्वास दुनिया भर में बढ़ा है। एडेलमैन ट्रस्ट की तरफ से यह बताया जा रहा है कि भरतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विश्वास में 10 फीसद की बढोत्तरी हुई है। विकास के मानक इसलिए अहम हैं, क्योंकि भारत की जनता भी नौकारशाही से परेशान रही है और एक ऐसी व्यवस्था के पक्ष में है, जिससे देश को आगे बढ़ने की आस जगी है।

2017 के जाते-जाते जीडीपी को लेकर चल रहा आसन्न संकट भी फिलहाल टल गया है; उम्मीद बंधी है कि भारत विकास की लम्बी छलांग लगाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत ने “इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस” के क्षेत्र में भी ज़बर्दस्त तरक्की की है। विश्व बैंक ने उम्मीद जताई है कि भारत में व्यापार करने का माहौल बदला है और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में किये गए सुधारों के नतीजे मिलने लगे हैं।

शेयर बाज़ार वैसे अर्थव्यवस्था की मुकम्मल तरीके की तस्वीर पेश नहीं करता, लेकिन निवेश करने के हिसाब से भारत में ट्रांसपेरेंसी आई है। भाजपा आज 19 राज्यों में सरकार चला रही है, ऐसे में अगर पार्टी की नीतियों को लेकर कहीं असमंजस पैदा होता है, तो भाजपा लोगों की आशंकाओं को दूर करने की सबसे बेहतर स्थिति में है। जहाँ तक संरचनात्मक सुधार लाने की बात है, ये लक्ष्य दुरूह ज़रूर प्रतीत हो रहा है, लेकिन असाध्य कुछ भी नहीं है। मोदी चुनौती लेने में हिचकते नहीं हैं। वे चुनौती भी लेते हैं और पूरी प्रतिबद्धता से उसका सामना भी करते हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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