लोगों के अपने घर के सपने को साकार कर रही प्रधानमंत्री आवास योजना !

प्रधानमंत्री आवास योजना मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घरों के निर्माण में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। फिलहाल, बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्माल फाइनेंस वित्तीय संस्थान और बहुत से अन्य वित्तीय संस्थान इस योजना का लाभ ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। नेशनल हाउसिंग बैंक और हुडको भी इस योजना में शामिल हैं।

देश में घरों की कमी एक गंभीर समस्या है। आज भी करोड़ों लोग घरों के बिना फुटपाथ पर  अपना जीवन गुजर-बसर करने के लिये अभिशप्त हैं। समस्या की गंभीरता को देखते हुए मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना का शुभारंम 25 जून, 2015 को किया, जिसका उद्देश्य 2022 तक सभी को घर उपलब्ध कराना है। इस योजना को दो भागों यथा, शहरी और ग्रामीण में विभाजित किया गया है।

सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2018 के लिये हाल ही में आवेदन आमंत्रित किया है, जिसके तहत शहरी निकायों द्वारा निःशुल्क ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माँग सर्वेक्षण किया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों द्वारा स्वयं भी मंत्रालय की बेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कराया जा सकता है। राज्यों, संघ राज्य क्षेत्रों की सरकार द्वारा कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से पंजीकरण 25 रूपये (वस्तु एवं सेवा कर अतिरिक्त) का भुगतान करके कराया जा सकता है।

सांकेतिक चित्र

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का लाभ लेने के लिये आय को आधार बनाया गया है। आय के आधार पर लाभार्थियों को कमजोर आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) एवं लोअर इन्कम ग्रुप (एलआईजी) में बांटा गया है। ये दोनों वर्ग योजना का ज्यादा से ज्यादा फ़ायदा उठा सकें के लिये क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (ब्याज सब्सिडी) का लाभ लेने की अवधि को बढ़ाकर 31 मार्च 2019 किया गया है। इस योजना के तहत पहला घर बनाने या खरीदने के लिये गृह ऋण पर ब्याज सब्सिडी का लाभ लिया जा सकता है, जो औसतन 2.60 लाख रूपये तक हो सकता है।

जिनकी आय तीन लाख रुपये वार्षिक से कम है, वे ईडब्ल्यूएस वर्ग में आते हैं, जबकि 6 लाख रुपये वार्षिक आय वाले एलआईजी वर्ग में आते हैं। दोनों वर्ग वालों को 6 लाख रुपये तक के कर्ज  पर 6.5 प्रतिशत की दर से ब्याज प्रभारित किया जायेगा। बाद में योजना का लाभ अधिक से अधिक लोग उठा सकें के लिये कर्ज की सीमा को 6 लाख से बढ़ाकर 12 लाख रुपये और फिर 12 से 18 लाख रुपये किया गया। 12 लाख रुपये तक के आय वाले लोगों को एमआईजी-1 वर्ग में रखा गया और इससे अधिक आय वाले लोगों को एमआईजी-II वर्ग में। पहले वर्ग वाले 9 लाख रुपये तक के गृह ऋण पर ब्याज में चार प्रतिशत और दूसरे वर्ग वाले 12 लाख रुपये तक के गृह ऋण पर तीन प्रतिशत ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।

इस सीमा से अधिक कर्ज लेने पर शेष कर्ज की राशि पर ब्याज सामान्य दर से प्रभारित किया जायेगा और ऐसे कर्ज की अधिकतम अवधि 20 साल तक हो सकती है। कर्ज की राशि में से सब्सिडी की कुल राशि को शुरू में ही मूलधन से घटाने का प्रावधान है, ताकि लाभार्थी को कर्ज पर ज्यादा ब्याज नहीं लगे।    

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ग्रामीण भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिये उन्हें http://pmaymis.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण कराना होगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सरकार आगामी 3 सालों में ग्रामीण क्षेत्र में 1 करोड़ पक्के घरों का निर्माण करेगी। सरकार की योजना वर्ष 2022 तक देश के ग्रामीण इलाकों में कुल 4 करोड़ घरों का निर्माण करना है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

यह योजना वित्त वर्ष 2016-17 से चल रही है, जो वित्त वर्ष 2018-19 में समाप्त होगी। इन 3 वर्षों में 81,975 करोड़ रूपये योजना को लागू कराने में खर्च होने का अनुमान है, जिनमें 60,000 करोड़ रूपये की पूर्ति बजटीय प्रावधानों द्वारा की जायेगी और शेष राशि नाबार्ड द्वारा दी जायेगी। योजना के तहत घर बनाने पर अनुदान का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी और 40 प्रतिशत राज्य सरकार। उत्तरी–पूर्वी और पहाड़ी राज्यों में यह अनुपात 90:10 होगा।

सांकेतिक चित्र

वर्ष 2011 में की गई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ग्रामीण लाभार्थियों का चयन करने की व्यवस्था की गयी है। मैदानी इलाकों के लाभार्थियों को 120,000 रूपये और पहाड़ी इलाकों के लाभार्थियों को 130,000 रूपये की सहायता दी जायेगी। लाभार्थी घर पर स्वच्छ तरीके से खाना बना सकें के लिये घर के क्षेत्रफल को 20 वर्गमीटर से बढ़ाकर 25 वर्गमीटर किया जा सकता है। शौचालयों के निर्माण के लिये भी 12,000 रूपये की सहायता राशि लाभार्थियों को दी जायेगी, जो सीधे लाभार्थी के खाते में जमा होगी।   

लाभार्थियों का चयन ग्रामसभा के माध्यम से वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर किया जायेगा, जिसके लिये लाभार्थियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जायेगा। सरकार लाभार्थियों की हर साल सूची तैयार करेगी। ग्राम सभा द्वारा सूची का सत्यापन किया जायेगा और अपीलीय समिति द्वारा इस संबंध में प्राप्त शिकायतों का निपटारा किया जायेगा।

प्रधानमंत्री आवास योजना मोदी सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को घरों के निर्माण में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है। फिलहाल, बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियाँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्माल फाइनेंस वित्तीय संस्थान और बहुत से अन्य वित्तीय संस्थान इस योजना का लाभ ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। नेशनल हाउसिंग बैंक और हुडको भी इस योजना में शामिल हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत 20 मार्च, 2017 तक 82,048 घरों का निर्माण किया गया है, जिसमें 62,312 घरों में लोग रहने लगे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत वर्ष 2019 तक 10 मिलियन घरों का निर्माण किया जाना है, जिसमें कि मार्च, 17 तक 2.21 मिलियन घरों का निर्माण किया जा चुका है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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