काले धन पर एक और चोट, 3500 करोड़ की बेनामी संपत्ति हुई जब्त !

मोदी सरकार एकदम योजनाबद्ध ढंग से काले धन पर चोट कर रही है। पहले नोटबंदी के जरिये बाजार में मौजूद नकदी काले धन का निपटारा किया, फिर बेनामी संपत्ति क़ानून के माध्यम से अन्य संपत्तियों के रूप में छुपाए गए काले धन को उजागर किया जा रहा है। साथ ही नया काला धन सृजित न हो, इसके लिए भी सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसमें आधार-पैन लिंक करवाने से लेकर नकदी लेन-देन की सीमा निर्धारित करने जैसे कदम शामिल हैं।

नोटबंदी के बाद से काले धन की रोकथाम के लिए मोदी सरकार एकदम से कमर कस चुकी है। नोटबंदी, बाजार में मौजूद नकदी काले धन को बैंकिंग प्रणाली में सम्मिलित करवाने में कारगर रही। इसके बाद बात उठी कि बहुत सारा काला धन तो लोग नकदी से इतर बेनामी संपत्ति के रूप में इधर-उधर लगा चुके हैं, मगर इसके लिए भी मोदी सरकार पहले से ही तैयारी करके बैठी थी।

नोटबंदी से पूर्व 1 नवम्बर, 2016 से ही ‘बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम, 1988’ का संशोधित रूप लागू हो चुका था। संशोधित क़ानून में बेनामी संपत्ति को जब्त करने तथा दोषी को सात साल तक की सजा जैसे कई कठोर प्रावधान हैं। इस क़ानून के प्रभाव के विषय में और बेहतर ढंग से जानने से पहले आवश्यक होगा कि हम यह जान लें कि आखिर बेनामी संपत्ति किसे कहते हैं।

सांकेतिक चित्र

बेनामी संपत्ति

सरल शब्दों में समझें तो जो संपत्ति किसी व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खरीदी जाए, बेनामी संपत्ति कहलाती है। ऐसी संपत्ति में धन का लेनदेन भी आमदनी के अज्ञात माध्यमों से होता है। बेनामी संपत्ति का कानूनी मालिक कोई और होता है, लेकिन उसपर कब्ज़ा किसी और का रहता है। इस तरह की संपत्ति की खरीद लोग काले धन को छुपाने के लिए करते हैं। लेकिन, मोदी सरकार द्वारा लाए गए संशोधित क़ानून के अनुसार इस तरह की बेनामी संपत्ति को जब्त करने का अधिकार सरकार के पास आ गया है। 

क़ानून का दिखने लगा असर

जब यह क़ानून लागू हुआ था, तब इसपर किसीने बहुत ध्यान नहीं दिया, मगर अंदर ही अन्दर ये क़ानून अपना काम कर रहा था। आयकर विभाग द्वारा एक बयान जारी कर बताया गया है कि इस क़ानून के तहत उसने 3500 करोड़ की बेनामी संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें 2900 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है। इसके अलावा इनमें गहने, गाड़ी आदि चल संपत्तियां भी शामिल हैं। गौरतलब है कि बेनामी संपत्तियों का पता लगाकर उनपर त्वरित ढंग से कार्यवाही करने के लिए बीते वर्ष मई में आयकर विभाग द्वारा देश भर में अपनी चौबीस ‘बेनामी निषेध इकाइयां’ स्थापित की थीं। कहना न होगा कि अब इन इकाइयों की सक्रियता का नतीजा उपर्युक्त कार्यवाही के रूप में सामने आया है। यह कार्यवाही दिखाती है कि योजनाबद्ध ढंग से अगर कोई कदम उठाया जाए तो उसका प्रभाव पड़ता ही है।

दरअसल मोदी सरकार भी एकदम योजनाबद्ध ढंग से काले धन पर चोट कर रही है। पहले नोटबंदी के जरिये बाजार में मौजूद नकदी काले धन का निपटारा किया, फिर बेनामी संपत्ति क़ानून के माध्यम से अन्य संपत्तियों के रूप में छुपाए गए काले धन को उजागर किया जा रहा है। साथ ही नया काला धन सृजित न हो, इसके लिए भी सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। इसमें आधार-पैन लिंक करवाने से लेकर नकदी लेन-देन की सीमा निर्धारित करने जैसे कदम शामिल हैं। परिवर्तन अचानक नहीं होता, वो सतत प्रयासों से संपन्न होने वाली एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। काले धन के निर्मूलन को लेकर सरकार एकदम सही दिशा में यथासंभव तीव्रता से प्रयास कर रही है, जिसे देखते हुए उम्मीद कर सकते हैं कि भारत अपेक्षाकृत रूप से शीघ्र ही काले धन के कुचक्र से पूर्णतः मुक्ति प्राप्त कर लेगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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