इखलाक-जुनैद की हत्या पर जागने वाली असहिष्णुता अंकित-चन्दन की हत्या पर सो क्यों जाती है ?

देश का सेक्युलर मीडिया, सेक्युलर बुद्धिजीवी अब कहां गायब हो गए हैं जो कुछ दिनों पहले हुई जुनैद की हत्या के बाद देश में असहिष्णुता बढ़ने का राग अलाप रहे थे। अब उनके मुंह में से बोल नहीं फूट रहे जैसे सभी को सांप सूंघ गया है। जो सेक्युलर बिरदारी के लोग बोल रहे हैं, वे भी इसे सिर्फ ऑनर किलिंग कहने में लगे हैं। सवाल है कि अगर ये सिर्फ ऑनर किलिंग है और कासगंज में हुई चन्दन की हत्या झड़प का परिणाम थी, तो इसी तरह इखलाक और जुनैद की हत्याएं भी किसी आपसी रंजिश का परिणाम क्यों नहीं हो सकती थीं। मगर उन हत्याओं के बाद तो सेक्युलर बिरादरी ने तुरंत जज बनते हुए देश में असहिष्णुता का पैमाना ही छलका दिया था। फिर आखिर चन्दन और अंकित जैसों की हत्या पर देश में असहिष्णुता सो क्यों हो जाती है।

बीते शुक्रवार को पश्चिमी दिल्‍ली के ख्‍याला क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। एक 23 वर्षीय हिंदू युवक की मुस्लिमों ने सरेआम गला रेतकर हत्‍या कर दी। अंकित सक्‍सेना नाम का यह लड़का यू ट्यूब चैनल एवं फोटोग्राफी के प्रोफेशन में था। अपनी पड़ोसी मुस्लिम लड़की से प्रेम करता था। चूंकि अंकित हिंदू था, इसलिए मुस्लिम लड़की के परिजनों को इस रिश्‍ते पर आपत्ति थी और इसके चलते ही उन्‍होंने अंकित को सरेराह मार दिया। हत्‍या वाले दिन लड़की के घरवालों ने अंकित के माता-पिता से भी मारपीट की और मां के सामने ही बेटे का गला रेत दिया। यह एक अत्‍यंत दुर्दांत वारदात थी। चार लोगों ने मिलकर अंकित को मारा। किसी ने हाथ पैर पकड़े, किसी ने गर्दन तो किसी ने चाकू मारा।

अंकित सक्सेना

आश्‍चर्य की बात है कि हत्‍यारों में से एक नाबालिग लड़का भी था। यानी आरोपियों के घर में हत्‍या, हिंसा, खूनखराबे का मानो संस्‍कार ही मिलता रहा हो। इस पूरे मामले में पुलिस ने अपनी औपचारिकता पूरी करके तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। संबंधित लड़की की बातें भी संदिग्‍ध लग रही हैं। पुलिस को उसने बयान दिया है कि उसे भी जान का खतरा है, जबकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वह कुछ और कह रही है। उसके चेहरे पर शिकन तक नहीं है। ना ही प्रेमी की हत्‍या का गम। बताया जाता है कि यह लड़की एक दिन पहले लापता हो गई थी, जिसके चलते अंकित पर शक करते हुए उसके परिजनों ने इस दुर्दांत हत्‍या को अंजाम दिया लेकिन हैरत है कि हत्‍या के बाद लड़की एकदम से सामने आ गयी। ऐसे में सवाल लड़की पर भी उठते हैं।

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि राजधानी में सरेआम ऑनर किलिंग के नाम पर मुस्लिमों द्वारा एक हिन्दू युवक की हत्‍या कर दी जाती है और देश का तथाकथित सेकुलर खेमा मुंह में दही जमाये बैठा है। अब रवीश कुमार प्राइम टाइम पर नज़र नहीं आ रहे हैं। इखलाक और रोहित वेमुला मामलों में दादरी से लेकर हैदराबाद तक पहुँच जाने वाले अरविंद केजरीवाल दिल्ली के अंकित की हत्या पर जब खूब हो-हल्ला मचा तो ट्विटर पर संवेदना प्रकट किए कि अंकित के पिता से बात हुई है, उसे न्याय दिलवाएंगे वगैरह-वगैरह।

देश का सेक्युलर मीडिया, सेक्युलर बुद्धिजीवी अब कहां गायब हो गए हैं जो कुछ दिनों पहले हुई जुनैद की हत्या के बाद देश में असहिष्णुता बढ़ने का राग अलाप रहे थे। अब उनके मुंह में से बोल नहीं फूट रहे जैसे सभी को सांप सूंघ गया है। जो सेक्युलर बिरदारी के लोग बोल रहे हैं, वे भी इसे सिर्फ ऑनर किलिंग कहने में लगे हैं। सवाल है कि अगर ये सिर्फ ऑनर किलिंग है और कासगंज में हुई चन्दन की हत्या झड़प का परिणाम थी, तो इसी तरह इखलाक और जुनैद की हत्याएं भी किसी आपसी रंजिश का परिणाम क्यों नहीं हो सकती थीं। मगर उन हत्याओं के बाद तो सेक्युलर बिरादरी ने देश में असहिष्णुता का पैमाना ही छलका दिया था। फिर चन्दन और अंकित जैसों की हत्या पर देश में असहिष्णुता क्यों नहीं बढ़ती है।

चन्दन गुप्ता

यह दोहरा मापदंड है कि इखलाक मामले में स्‍वयं केजरीवाल मृतक के घर जाकर शोक संवेदना व्‍यक्‍त करते हैं जबकि अंकित की हत्‍या के दो दिन बाद हंगामा मचने पर उन्हें संवदना जताने की सूझती है। भाजपा नेता मनोज तिवारी ने मांग उठाई है कि केजरीवाल ने जिस प्रकार एक अन्‍य मामले में एक करोड़ रुपए की सहायता राशि मंजूर की थी, उसी प्रकार अंकित के परिवार के लिए भी एक करोड़ रुपए की आर्थिक मदद की जाए।

यहां यह उल्‍लेख करना भी ज़रूरी है कि मीडिया का एक वर्ग जो मुस्लिमों की हत्‍या पर शोरगुल मचाता है, वह अंकित की हत्‍या पर मुंह में दही जमाकर बैठ गया है। ऐसे तमाम मीडिया संस्थानों की ख़बरों में देखा जा सकता है कि हत्यारों के लिए मुसलमान शब्द का प्रयोग करने की बजाय ‘समुदाय या धर्म विशेष’ शब्द का प्रयोग हुआ है। जबकि किसी मुस्लिम की हत्या होने पर ये लोग खुलेआम इसे हिन्दू आतंकवाद से जोड़ने में लग जाते हैं। तब देश का तथाकथित सेकुलर मीडिया मारे गए व्यक्ति और उसके मजहब का नाम चीख चीखकर लेता है। आश्‍चर्य है कि अंकित मर्डर केस में यही मीडिया बस ऑनर किलिंग के एंगल से पत्रकारिता करने में लगा है।

पूरी सेकुलर बिरादरी मानो सुन्न हो गई है। इन्‍हें अब यह बोलने में तकलीफ हो रही है कि एक हिंदू को चार मुस्लिमों ने सरेआम बुरी तरह मार डाला। यही तकलीफ इन्हें अभी कासगंज में मारे गए चन्दन गुप्ता पर बोलने में भी हुई थी। असल में ये सारे सेक्युलर अब एक्‍सपोज हो चुके हैं। चन्दन के बाद अब अंकित हत्याकांड ने भी राजनेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों की इस तथाकथित सेक्युलर बिरादरी के हिन्दू विरोधी रूप को उजागर करके रख दिया है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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