पूर्वोत्तर चुनावों में सिद्ध हो गया कि भाजपा अब पूरे भारत पर राज करने वाली पार्टी बन गयी है !

पहले असम में बीजेपी की सरकार बनना कुछ लोगों को चमत्कार जैसा लग रहा होगा, लेकिन भाजपा कैडर ने अपने परिश्रम से कांग्रेस और लेफ्ट को इन चुनावों में इतना बड़ा झटका दे दिया है, जिससे बाहर निकलना अब उनके लिए संभव नहीं सकेगा। इसके साथ ही भाजपा ने इस दुष्प्रचारित भ्रम को भी तोड़ दिया है कि वह सिर्फ “cow-belt” में राज्य करने वाली पार्टी है। भाजपा ने इन चुनावों में यह सिद्ध कर दिया है कि वह अब संपूर्ण भारत पर राज करने वाली राजनीतिक पार्टी बन गई है।

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों की जनता ने कांग्रेस और वामपंथी दलों की झूठ और प्रपंच से भरी राजनीति को बेनकाब कर, वहाँ भगवा परचम लहरा दिया है। त्रिपुरा में 25 साल पुरानी “तथाकथित” इमानदार माणिक सरकार अब अतीत का हिस्सा बन गई है। इसी तरह नागालैंड में भी भाजपा ने अपने सहयोगी दल नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ मिलकर शानदार प्रदर्शन किया है। पूर्वोत्तर के महत्वपूर्ण त्रिपुरा राज्य में लेफ्ट का तो सफाया हो ही गया है, साथ-साथ कांग्रेस का भी इस तरह पत्ता साफ़ हो गया है जैसे कि यहाँ पहले कभी कांग्रेस का वजूद रहा ही नहीं हो। उल्लेखनीय है कि पिछले चुनाव में यहाँ भाजपा को सिर्फ 1.54 फीसद वोट पड़े थे, वहीं इस बार त्रिपुरा में 43 सीटें जीतकर भाजपा ने अपनी जीत का परचम फहरा दिया है।

पहले असम में बीजेपी की सरकार बनना कुछ लोगों को चमत्कार जैसा लग रहा होगा, लेकिन भाजपा कैडर ने अपने परिश्रम से कांग्रेस और लेफ्ट को इन चुनावों में इतना बड़ा झटका दे दिया है, जिससे बाहर निकलना अब उनके लिए संभव नहीं सकेगा। इसके साथ ही भाजपा ने इस दुष्प्रचारित भ्रम को भी तोड़ दिया है कि वह सिर्फ “cow-belt” में राज्य करने वाली पार्टी है। भाजपा ने इन चुनावों में यह सिद्ध कर दिया है कि वह अब संपूर्ण भारत पर राज करने वाली राजनीतिक पार्टी बन गई है।

पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के चुनावों में लहराया भगवा

त्रिपुरा की तरह ही नागालैंड में वहां की जनता ने बीजेपी को सरकार चलाने के लिए पर्याप्त बहुमत दे दिया है। मेघालय की जनता ने किसी भी पार्टी को साफ़-साफ़ बहुमत नहीं दिया है, पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ही सरकार बनाने के रास्ते खुले हुए हैं। त्रिशंकु की स्थिति में गेंद अब किसी भी पाले में जा सकती है। ऐसे में, भाजपा को भी समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास करना चाहिए।

त्रिपुरा में वाम दलों का हाल वैसा ही हुआ जैसा कि कभी पश्चिम बंगाल में हुआ था, यहाँ भी वाम दलों ने सिर्फ अपने पार्टी के कैडर को खुश रखने की कोशिश की, इसके परिणामस्वरूप सालों से कम्युनिस्ट दलों के खिलाफ संचयित लोगों का गुस्सा भाजपा के लिए जमीन तैयार करता गया। भाजपा की जीत में लोगों के इस गुस्से का बड़ा हाथ रहा है। इसके अलावा भाजपा की जीत का श्रेय सिर्फ बड़े नेताओं को नहीं, अपितु पार्टी की दीर्घकालिक नीतियों को जाता है, जिसके तहत संघ परिवार ने आदिवसियों की भलाई के लिए अपनी योजनाओं पर सालों तक काम किया।

नोटबंदी और जीएसटी लागू करने का अगर कोई नकारात्मक असर लोगों पर पड़ा होता तो भाजपा को इतनी बड़ी जीत नहीं मिलती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने फैसलों से जनता के बीच अपनी बेहतर और निर्णायक छवि पेश की है। त्रिपुरा में वामपंथी शासन के मॉडल को समझने के लिए यह एक उदाहरण पर्याप्त होगा कि वहाँ अब तक चौथा पे कमीशन ही लागू था, भाजपा ने लोगों को सातवाँ पे कमीशन लागू कराने का भरोसा दिलाया है।

नागालैंड में लोगों ने बीजेपी पर भरोसा जताया है और वो उत्तर-पूर्व में वाम दलों व कांग्रेस का विकल्प बन सकती है। यहाँ भी भाजपा-एनडीपीपी की सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो गया है।  नागालैंड में तो कांग्रेस को उम्मीदवार भी नहीं मिल रहे थे, वैसे भी कांग्रेस ने पहले इस बात को परख लिया था कि इस बार यहाँ दाल नहीं गलने वाली है।  

पूर्वोत्तर में भी चला मोदी-शाह का जादू (सांकेतिक चित्र)

इस जीत के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि उत्तर-पूर्व में बीजेपी की यात्रा शून्य से शिखर तक की यात्रा की तरह है, आने वाले समय में मोदी जी के नेतृत्व में विजय यात्रा जारी रहेगी। शाह ने कहा कि यह प्रधानमंत्री के एक्ट-ईस्ट पालिसी का नतीजा है, जिसके तहत केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व के राज्यों के विकास को ज्यादा तवज्जो देने का फैसला किया है।

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने जीत का श्रेय जहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया, वहीं राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए कहा कि जब यहाँ उत्तर-पूर्व के नतीजे आने वाले थे, राहुल गाँधी देश से बाहर इटली में छुट्टियाँ मना रहे हैं, इससे उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता जाहिर होती है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पहले सभी कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते थे, लेकिन अब लगता है कि वाम-मुक्त भारत होने वाला है।

आज के समय में पूरा उत्तर-पूर्व भाजपा के साथ खड़ा है, अब सिर्फ केरल में ही कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार बच गई है। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि आने वाले समय में दक्षिण के कर्णाटक राज्य के चुनाव होने वाले हैं, जहाँ कांग्रेस की सरकार है। पूर्वोत्तर से निकली  यह ताजा लहर निश्चित तौर पर भाजपा के लिए दक्षिण में भी रामबाण का काम करेगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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