फ्रांस के राष्ट्रपति की इस भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ है !

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मेक्रों  ने कभी  सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह महादेव और माँ विंध्यवासिनी की नगरी की यात्रा करेंगे। लेकिन, नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में ऐसे तत्व भी शामिल रहते हैं। वह विंध्याचल के पास छानवे ब्लाक गए। यहां विंध्याचल धाम की चुनरी से उनका स्वागत किया गया। यहाँ से वह दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी भोले बाबा की काशी पहुंचे। गंगा में नौका विहार किया। हर हर महादेव  का परंपरागत उद्घोष होता रहा। चौरासी घाटों पर भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप दिखाई दिया।

फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से दोनों देशों के  रिश्तों का नया अध्याय शुरू हुआ है। दोनों के बीच इतना विश्वास और सहयोग का माहौल पहले कभी नहीं था। इतना  विस्तार भी अभूतपूर्व है। इसमें  सुदूर मिर्जापुर के छानबे ब्लाक से लेकर हिन्द महासागर का इलाका भी शामिल है। फ्रांस बड़ी मात्रा में निवेश पर सहमत हुआ। जहाँ निवेश किया है, उस जगह जाना भी  विदेशी राष्ट्रपति के लिए सुखद रहा।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मेक्रों ने कभी  सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह महादेव और माँ विंध्यवासिनी की नगरी की यात्रा करेंगे। लेकिन, नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में ऐसे तत्व भी शामिल रहते हैं। वह विंध्याचल के पास छानवे ब्लाक गए। यहां विंध्याचल धाम की चुनरी से उनका स्वागत किया गया। यहाँ से वह दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी भोले बाबा की काशी पहुंचे। गंगा में नौका विहार किया। हर हर महादेव  का परंपरागत उद्घोष होता रहा। चौरासी घाटों पर भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप दिखाई दिया।

प्रधानमंत्री मोदी और फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों

अपने राजनीतिक जीवन में  वह दुनिया के अनेक स्थानों पर गए होंगे, लेकिन वसुधा को कुटुंब समझने वाली ऐसी संस्कृति के दर्शन उनको कहीं नहीं हुए होंगे। बहुत संभव है कि नरेंद्र मोदी भारत की इस  दार्शनिक धरोहर से दुनिया को परिचित कराना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस  इसका पहला चरण था। इसके पहले जापान के प्रधानमंत्री भी काशी आये थे। वह नरेंद्र मोदी के साथ गंगा आरती में शामिल हुए थे।

इसके पहले नई दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच उपयोगी वार्ता हुई। भारत और फ्रांस के बीच  रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहित चौदह अहम समझौते हुए। दोनों देश एकदूसरे के जंगी जहाजों के लिए अपने नौसैनिक  अड्डे खोलने के लिये राजी हुए। रक्षा और सामरिक जानकारी की उचित गोपनीयता भी कायम रखे जाने पर सहमति बनी जिससे अन्य देश उसका लाभ न उठा सके। जाहिर तौर पर यह  सहमति चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के मद्देनजर बनाई गई है।

इन सामुद्रिक और सामरिक समझौतों से चीन की विस्तारवादी  चाल का मुकाबला किया जा सकेगा। अनुमान है कि निकट भविष्य में अमेरिका का सहयोग भी भारत और फ्रांस के इस कदम को मिलेगा। इतना ही नहीं, दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल और साजो-सामान का आदान प्रदान भी कर सकेंगे। युद्ध अभ्यास, प्रशिक्षण, आपदा राहत कार्यो में दोनों देश सहयोग करेंगे। इसके अलावा शिक्षा,  पर्यावरण,  शहरी विकास, रेलवे, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग  बढ़ाया जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर अमल किया जाएगा। फ्रांस पर भी कई बार आतंकी हमले हो चुके हैं।

अंतरिक्ष  प्रौद्योगिक क्षेत्र  में आपसी सहयोग  तेज किया जाएगा। इसका प्रयोग समुद्री क्षेत्र में किया जाएगा। परमाणु सहयोग के तहत जैतापुर संयंत्र का कार्य जल्दी पूरा करने का करार हुआ है। यहाँ छह परमाणु संयंत्र लगाए जाएंगे। इसकी क्षमता सोलह सौ पचास मेगावाट होगी। महाराष्ट्र के तट पर बनने वाला यह देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क होगा। दोनों देशों का व्यापार अगले कुछ वर्षों में पन्द्रह अरब यूरो तक पहुँचने की संभावना है। इसका रोडमैप बना लिया गया  है। दोनों देशों की कम्पनियों ने अलग से पन्द्रह अरब डॉलर के समझौते किये।

मिर्जापुर जिले के छानवे ब्लॉक के दादरा कला में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया गया। फ्रांस के सहयोग से  यह  प्लांट  बना है। इसकी क्षमता पचहत्तर  मेगावाट है। इसे सौ मेगावाट तक  बढ़ाया जाएगा। तीन सौ बयासी एकड़ में बने इस संयंत्र से पांच लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अनेक अर्थों में उपयोगी साबित हुई। इससे द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में बहुत सुधार हुआ। आपसी सहयोग आगे बढ़ा। चीन की  विस्तारवादी  गतिविधियों के विरोध में अब फ्रांस भी भारत के साथ आ गया है।

फ्रांस ने माना कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति बहुत मजबूत हुई है। इसीलिए फ्रांस ने चीन के मुकाबले भारत का  खुलकर साथ देने का निर्णय किया है। हिन्द महासागर में चीन कृत्रिम बन्दरगाह और सैन्य ठिकाने बना रहा है। शांति चाहने वाले देशों के लिए यह चिंता का विषय है। ऐसे में फ्रांस के साथ हुआ समझौता बेहद महत्वपूर्ण है। फ्रांस और भारत मिलकर उपग्रह से भी यहां निगरानी करेंगे। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त कार्यवाई भी करेंगे। इसके साथ ही आतंकवाद के मुकाबले का साझा मंसूबा भी महत्वपूर्ण है। अन्य देशों के मुकाबले फ्रांस का इसे लेकर दोहरा मापदंड नहीं है।

फ्रांस फाइनेंसियल एक्सन  टास्क फोर्स द्वारा पाकिस्तान को आतंकवाद की ग्रे लिस्ट में डालने का खुला समर्थन कर चुका है। फ्रांस ने सीमापार के आतंकवाद की घोर निंदा की है। दरअसल इस्लामिक आतंकवाद से फ्रांस भी सुरक्षित नहीं रहा है। दोनों देश  इसके विरोध में साझा नीति बनायेगें। इसका भी सकारात्मक प्रभाव होगा। भारत की मानवता  और शांतिवादी संस्कृति को फ्रांस के राष्ट्रपति ने स्वयं देखा। वह इससे  प्रभावित भी हुए। संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए फ्रांस भारत का समर्थन करेगा। इस प्रकार कुल मिलाकर इस यात्रा ने सहयोग के सभी धरातलों पर दोनों देशों के सम्बन्ध प्रगाढ़ किये हैं।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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