रोजगार सृजन के लिए स्टार्टअप इंडिया को और सरल बनाने में जुटी सरकार !

“स्टार्टअप इंडिया” से लोग फायदा उठा सकें, इसके लिये इसके नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है। टैक्स छूट पाने वाले “स्टार्टअप इंडिया” के दायरे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के बाद एक निश्चित रकम तक के निवेश पर एंजेल टैक्स नहीं लगेगा। व्यक्तिगत तौर पर किये जाने वाले निवेश पर भी एंजेल टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन वास्तविक कीमत से ज्यादा कीमत पर शेयर खरीदने पर इस टैक्स को आरोपित किया जाएगा।

सरकार “स्टार्टअप इंडिया” के लिये पूँजी जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाने जा रही है। इस योजना की सफलता के लिये सरकार “स्टार्टअप इंडिया” शुरू करने वाले कारोबारियों को राहत देने की तैयारी कर रही है। आयकर विभाग और उद्योग मंत्रालय मिलकर “स्टार्टअप इंडिया” में लगने वाले एंजेल टैक्स में राहत देने जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे “स्टार्टअप इंडिया” की राह में आने वाली मुख्य समस्या, जो पूँजी की कमी है, दूर हो जायेगी। “स्टार्टअप इंडिया” भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में स्टार्टअप और नये विचारों के लिये एक ऐसे माहौल का निर्माण करना है, जिससे देश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को मुमकिन बनाया जा सकेगा। इसकी मदद से नवाचार, विकास, व्यवसायीकरण आदि प्रक्रियाओं को भी गति दी जा सकेगी।   

“स्टार्टअप इंडिया” से लोग फायदा उठा सकें, इसके लिये इसके नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव है। टैक्स छूट पाने वाले “स्टार्टअप इंडिया” के दायरे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाने के बाद एक निश्चित रकम तक के निवेश पर एंजेल टैक्स नहीं लगेगा। व्यक्तिगत तौर पर किये जाने वाले निवेश पर भी एंजेल टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन वास्तविक कीमत से ज्यादा कीमत पर शेयर खरीदने पर इस टैक्स को आरोपित किया जाएगा।   

“स्टार्टअप इंडिया” में निवेश करने वालों पर सरकार, जो टैक्स लगाती है उसको एंजेल टैक्स कहते हैं। मौजूदा समय में 10 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश पर एंजेल टैक्स लगाया जाता है, जिसे कम करके 20 प्रतिशत पर लाने का प्रस्ताव है। एंजेल टैक्स के लिये निवेश राशि की सीमा को भी 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। इसका यह अर्थ हुआ कि अगर कोई “स्टार्टअप इंडिया” के तहत म्युचुअल फंड या कोई संस्थागत निवेश 20 करोड़ रुपये तक का करता है, तो उसे एंजेल टैक्स नहीं देना होगा।

सरकार स्टार्टअप के अंतर्गत प्रति वर्ष 2500 करोड़ रुपये की एक प्रारंभिक निधि और 4 साल की अवधि में कुल 10,000 करोड़ रुपये की निधि की स्थापना करेगी। कारोबारियों को वेंचर ऋण देने हेतु बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिये राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट कंपनी के माध्यम से सिडबी द्वारा प्रति वर्ष 500 करोड़ के बजट का प्रावधान अगले चार सालों के लिये करने का विचार किया जा रहा है। स्टार्ट अप में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार निवेशक को कैपिटल गेन में छूट देगी। स्टार्ट अप से युवा ज्यादा लाभान्वित हों, इसके लिये स्टार्टअप के मुनाफे को 3 वर्ष की अवधि के लिए कर मुक्त रखा जाएगा।

इस आलोक में इन्क्यूबेटरों द्वारा निवेश को निवेश-कर से मुक्त रखा जाएगा, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा निवेश करने के लिये प्रोत्साहित हो सकें। “स्टार्टअप इंडिया” की संकल्पना “मेक इन इंडिया” से जुड़ी हुई है। “स्टार्ट अप इंडिया” के तहत वैसे उद्यमी, जो “मेक इन इंडिया” अभियान से जुड़े हैं, की मदद की जाती है। आमतौर पर किसी नये उद्योग को शुरू करने में अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इससे जुड़ी बाधाओं को दृष्टिगत करके ही “स्टार्टअप इंडिया” की संकल्पना को आकार दिया गया है।

माना जा रहा है कि “स्टार्टअप इंडिया” के संबंध में यदि मौजूदा दिशा-निर्देशों को आसान बनाया जाता है, तो इस योजना को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। लिहाजा, “स्टार्टअप इंडिया” के तहत सरकार वैसे कारोबारियों की सहायता करने के लिये तैयार है, जो खुद का कारोबार शुरू करना चाहते हैं। इस क्रम में सरकार उद्यमियों की राह में आने वाली बाधाओं को भी दूर करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि युवाओं को समय पर पूँजी उपलब्ध कराकर देश में तेज विकास दर को सुनिश्चित किया जा सकता है। जब देश का हर युवा आत्मनिर्भर होगा तो स्वाभाविक रूप से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और देश में खुशहाली आएगी।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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