विश्व बैंक की रिपोर्ट में आया सामने, तेजी से डिजिटल हो रहा इंडिया !

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट बैंक के माध्यम से बचत, उधारी, डिजिटल लेनदेन और वित्तीय तौर-तरीकों के बारे में दुनिया भर से जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में भारत की केवल 53 प्रतिशत आबादी के पास ही बैंक खाते थे, लेकिन 2017 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई। अब 83 प्रतिशत पुरुषों और 77 प्रतिशत महिलाओं के पास अपने बैंक खाते हैं, जो भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में किये जा रहे कार्यों की सफलता की कहानी बताते हैं।

विश्व बैंक ने 19 अप्रैल को जारी अपनी रिपोर्ट “ग्लोबल फिन्डेक्स” में भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में उठाये गये प्रयासों की सराहना की है। साथ ही, कहा कि भारत में डिजिटल लेनदेन में भी तेजी आ रही है। विश्व बैंक के अनुसार व्यापक पैमाने पर जनधन खाते खोलने और “आधार” को बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में शामिल करने से ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इससे वित्तीय समावेशन के लैंगिक अंतर को कम करने में मदद मिली है और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है। महिलाएं खुद से अब डिजिटल लेनदेन करने लगी हैं।  

विश्व बैंक की यह रिपोर्ट बैंक के माध्यम से बचत, उधारी, डिजिटल लेनदेन और वित्तीय तौर-तरीकों के बारे में दुनिया भर से जुटाये गये आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 में भारत की केवल 53 प्रतिशत आबादी के पास ही बैंक खाते थे, लेकिन 2017 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई। अब 83 प्रतिशत पुरुषों और 77 प्रतिशत महिलाओं के पास अपने बैंक खाते हैं, जो भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में किये जा रहे कार्यों की सफलता की कहानी बताते हैं।   

सांकेतिक चित्र

यह रिपोर्ट डिजिटल भुगतान में आ रही तेजी की भी पुष्टि करती है। यह रिपोर्ट बताती है कि बैंक खाता रखने वाले 36 प्रतिशत से अधिक भारतीयों ने अपनी जीवन में कभी-न-कभी डिजिटल लेनदेन जरूर किया है। सरकारी योजनाओं को लागू करने में भी डिजिटल लेनदेन किया जा रहा है, जिससे सरकारी प्रणाली में पारदर्शिता आ रही है।

डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया के सरल होने से आम लोगों ने इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। इस वजह से विविध सामाजिक सरोकारों को पूरा करने के क्रम में आने वाले सरकारी खर्च में भी कमी आ रही है। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेंशन का डिजिटल भुगतान किया जा रहा है और हाल के दिनों में इसकी रफ्तार में तेज बढ़ोतरी हुई है। अब नकद पेंशन देने के बजाय बॉयोमेट्रिक स्मार्ट कार्ड के जरिये पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। लोग डेबिट कार्ड के जरिये भी अपना पेंशन ले रहे हैं।

मोबाइल बैंकिंग के लोकप्रिय होने से भारत के दूर-दराज इलाकों में भी बैंक पहुँच गया है। विश्व बैंक की इस रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में कोई भी प्रांत नहीं है, जहाँ मोबाइल की पहुँच नहीं है। आज की तारीख में जहाँ मोबाइल है, वहाँ बैंक भी है। इसीलिये मोबाइल को जेबी बैंक भी कहा जाता है। आज बैंकिंग सुविधा से वंचित कुल वैश्विक आबादी के दो-तिहाई लोग मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में यह अनुपात 50 प्रतिशत का है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस और आधार के जरिये सीधे पैसों के अंतरण की शुरुआत की जा चुकी है, जिससे डिजिटल भुगतान में वृद्धि हुई है। पिछले एक साल में 16 प्रतिशत लोगों को ही डिजिटल माध्यमों से भुगतान मिला है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार बैंक खाते का इस्तेमाल बचत करने, कर्ज लेने एवं डिजिटल भुगतान करने में किया जा सकता है। कुछ लोग इन खातों का इस्तेमाल केवल बचत के लिये कर रहे हैं। वे बैंक जाकर निकासी फॉर्म की मदद से पैसों की निकासी करते हैं, लेकिन डिजिटल लेनदेन में उनकी रुचि नहीं है या वे इससे डरते हैं।

कहा जा सकता है कि भारत के लोगों की मानसिकता डिजिटल लेनदेन के प्रति बदली है। आज सब्जी वाला, खोमचे वाला, चाय वाला आदि भी बड़ी बेबाकी से डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं। डिजिटल लेनदेन में वृद्धि का एक बहुत बड़ा कारण लगभग 30 करोड़ जनधन खातों का खोला जाना है। आज सब्सिडी के के लिए या फिर सामान्य व्यवहार में भी लोग बैंक में खाता खोल रहे हैं, लेकिन डिजिटल लेनदेन को लेकर उनके मन में अभी भी कुछ डर एवं संशय है, जिसे वित्तीय जागरूकता अभियान चला कर तेजी से दूर किया जा सकता है। मौजूदा स्थिति के आधार पर कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में भारत में वित्तीय समावेशन और डिजिटल लेनदेन की दिशा में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में मुख्य प्रबंधक हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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