कर्नाटक चुनाव : मोदी के मैदान में उतरते ही कांग्रेस के माथे पर पसीना आने लगा है !

मोदी की बातों से जाहिर होता है कि वे विकास की राजनीति को मुख्यधारा में रखते हुए चल रहे हैं। मोदी के विपक्षियों पर प्रहार भी विकास से जुड़े मुद्दों पर ही होते हैं। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 2009 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन अपना वादा पूरा नहीं किया, वहीं उनकी सरकार ने सत्ता में आने के चार साल में ही देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी। उन्होंने कहा कि राहुल नामदार हैं, तो हम कामदार। यह कहकर मोदी उन मजदूरों और किसानों के साथ जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश किए, जिनसे राहुल जुड़ाव स्थापित करने में नाकाम रहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के मैदान में आते ही कर्नाटक चुनाव के सारे गणित बदलने लगे हैं। लिंगायत कार्ड खेलकर जो कांग्रेस अपनी ताल ठोंक रही थी, मोदी के आते ही उसके माथे पर पसीना दिखाई देने लगा है। कांग्रेस बैकफुट पर आ गयी है। जैसा कि सभी जानते हैं कि मोदी का चुनावी अंदाज़ तूफानी होता है और वह अपने तर्ज़ पर चुनावी अभियान का संचालन करते हैं।

वैसे, कांग्रेस ने कर्नाटक की सियासत में पहले ही बिसात सजा दी थी, लेकिन अपने करिश्माई अंदाज़ के लिए जाने जाने वाले मोदी ने कांग्रेस की जातिगत और धर्म पर आधारित राजनीति को उजागर कर दिया। आने वाले एक हफ्ते तक पीएम मोदी कर्नाटक में नज़र आएंगे, जहाँ वह कम से कम दर्जन भर जनसभाओं को संबोधित करेंगे। मोदी का ये प्रचार अभियान कांग्रेस पर भाजपा को हावी रखेगा, ऐसी स्थिति नजर आ रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चामराजनगर जिले के सांथेमरहल्ली में अपनी पहली रैली में विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में बीजेपी की हवा नहीं, आंधी चल रही है। कर्नाटक बदलाव का इंतजार कर रहा है, इतनी गर्मी होने के बाद भी लोग भाजपा के साथ खड़े हैं। 

मोदी की बातों से जाहिर होता है कि वे विकास की राजनीति को मुख्यधारा में रखते हुए चल रहे हैं। मोदी के विपक्षियों पर प्रहार भी विकास से जुड़े मुद्दों पर ही होते हैं। मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने 2009 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन अपना वादा पूरा नहीं किया, वहीं उनकी सरकार ने सत्ता में आने के चार साल में ही देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी। उन्होंने कहा कि राहुल नामदार हैं, तो हम कामदार। यह कहकर मोदी उन मजदूरों और किसानों के साथ जुड़ाव स्थापित करने की कोशिश किए, जिनसे राहुल जुड़ाव स्थापित करने में नाकाम रहते हैं।

देखा जाए तो राहुल गांधी को दलितों की जिंदगी और उनके रहन-सहन को समझने के लिए कम से कम खूब झोपड़ियों के दर्शन करवाए गए। लेकिन, इस तरह की कोशिशों से जनता से कोई नेता थोड़े जुड़ पाता है। उसके लिए गरीबों के जीवन और उनकी समस्याओं की समझ होनी चाहिए, जो राहुल में अभी नहीं है।

पीएम मोदी ने पिछली यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने जो वादा किया, उसको पूरा नहीं कर पाए। मोदी ने यह भी कहा कि राहुल मनमोहन सिंह की बात नहीं मानते, लेकिन अपनी माँ की बात तो मान लेनी चाहिए। 2014 तक आप सत्ता में बैठे थे, क्यों काम नहीं किया, क्यों देश को गुमराह किया।

गौरतलब है कि पूरे देश में आईटी क्रांति की पहली रोशनी बंगलुरु शहर में आई और आज भी वही छवि लोगों के जेहन में बसी हुई है। लेकिन, बंगलुरु में आई सम्पन्नता के साथ साथ कर्नाटक में बहुत से ऐसे अँधेरे कोने रह गए, जहाँ विकास की धारा नहीं पहुँच पाई। कर्नाटक के लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही कि बंगलुरु के अलावा बाकी शहरों का बराबर विकास नहीं किया गया।

आज अगर विकास के मुद्दे को लेकर ग्रामीण कर्नाटक के लोग गुस्से में हैं, तो कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार को सचेत हो जाना चाहिए। इधर, नरेन्द्र मोदी के आक्रामक तेवर और विकासवादी राजनीति कर्नाटक में कांग्रेस के गले की फांस अलग है। कांग्रेस को अंदर-अंदर इस स्थिति का अंदाजा हो गया है, इसीलिए शायद राहुल गांधी ने भी बीदर में जनसभा को संबोधित किया, लेकिन मोदी की आक्रामक शैली और सवालों के समक्ष ज़्यादातर बचाव की ही मुद्रा में ही नजर आए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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