सुरक्षा, विकास और राष्ट्रीय गौरव के चार वर्ष !

कांग्रेस-नीत संप्रग सरकार में नित नए घोटाले सामने आते थे। ऐसा लगता था मानो कांग्रेस के मंत्री घोटाले के सिवाय कुछ करना जानते ही नहीं हों। 2जी घोटाला, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्‍थ घोटाला आदि ऐसे बड़े घोटाले थे, जिन्‍होंने कांग्रेस का तो नुकसान किया ही, देश को भी बहुत पीछे ला खड़ा किया। आज 4 साल हो गए हैं और भाजपा सरकार पर एक भी घोटाले का आरोप तक नहीं है। वही सरकारी मशीनरी है, वही नौकरशाह हैं, फिर यह बदलाव कैसे हो गया ? जवाब एक ही है – नेतृत्‍व।

केंद्र में भाजपा की सरकार के चार वर्ष पूरे होने वाले हैं। 16 मई, 2014 की तारीख को लोकसभा चुनाव के परिणाम सामने आए थे और साफ़ हो गया था कि देश की जनता ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए भाजपा को विशाल बहुमत दे दिया है। दूसरे अर्थों में इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि जनता की पूरे मन से भाजपा को ही सत्‍ता में लाने की उत्‍कट कामना थी, जो नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के रूप में परिणित हुई। आज इस घटना के चार वर्षों बाद भाजपा ने उन सारे मतदाताओं का धन्‍यवाद अपनी उपलब्धियों एवं कार्यों के ज़रिये कर दिया है जिन्‍होंने पूरे विश्‍वास के साथ भाजपा को अपना वोट दिया था। निश्चित ही इस दौरान सरकार की उपलब्धियों की संख्‍या अधिक है, इसलिए उन्‍हें गिनाना संभव नहीं है, लेकिन मूल स्‍वर पर जरूर बात की जा सकती है।

नरेंद्र मोदी ने देश को उन्नत और समर्थ देशों की पंक्ति में ला खड़ा किया है

मूल स्‍वर यही है कि आज पूरे विश्‍व में भारत की छवि एक उन्‍नत और समर्थ राष्‍ट्र की बन गई है। इसी के चलते विश्‍व के बड़े और शक्तिशाली देश भी भारत के प्रति सम्‍मान एवं सहयोग की भावना प्रकट कर रहे हैं। असल में यह अपने आप में एक बड़ा मापदंड है कि देश के बाहर अंतरराष्‍ट्रीय मंच पर आपके देश की क्‍या स्थिति है। देश के हर नागरिक का सीना गर्व से चौड़ा हो जाना चाहिये कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत को अग्रणी राष्‍ट्रों की पंक्ति में ला खड़ा किया है। इन चार सालों में विश्व भर में भारत के गौरव में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि नरेंद्र मोदी को 2014 में देश जिस हालत में मिला था, उन्‍होंने उसे अपने मात्र चार वर्षों के कार्यकाल में ही वहाँ से कहीं आगे ले जाकर दिखा दिया है। सफलता की बातें और सफलता को साझा करना सभी को अच्‍छा लगता है, लेकिन संघर्ष पर कम बातें होती हैं। 2014 में देश की हालत हर तरह से डांवाडोल थी। हमें यह भी जानना चाहिये कि आखिर क्‍यों पूरे देश के मन में तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार के प्रति गुस्‍से का उबाल था। आखिर कौन सी वजहें थीं, जिनके चलते मतदाताओं ने एकजुट होकर कांग्रेस को सत्‍ता से उखाड़ फेंका और भाजपा की ताजपोशी की।

कांग्रेस की सरकार में नित नए घोटाले सामने आते थे। ऐसा लगता था मानो कांग्रेस के मंत्री घोटाले के सिवाय कुछ करना जानते ही नहीं हों। 2जी घोटाला, कोयला घोटाला, कॉमनवेल्‍थ घोटाला आदि ऐसे बड़े घोटाले थे, जिन्‍होंने कांग्रेस का तो नुकसान किया ही, देश को भी बहुत पीछे ला खड़ा किया। आज 4 साल हो गए हैं और भाजपा सरकार पर एक भी घोटाले का आरोप तक नहीं है। वही सरकारी मशीनरी है, वही नौकरशाह हैं, फिर यह बदलाव कैसे हो गया ? जवाब एक ही है-नेतृत्‍व।

तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, मगर शासन कहीं और से चलता था

तब देश का नेतृत्‍व कांग्रेस जैसे दल के हाथ में था, जिसमें प्रधानमंत्री तो मनमोहन सिंह थे, पर कार्य सत्ता का नेहरू-गाँधी परिवार के पास ही था। अब शासन भाजपा के हाथ में है और प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का मजबूत नेतृत्व है। आपको याद होगा कि जिस दिन नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उन्‍होंने राष्‍ट्र से आहवान किया था कि अब आप चिंता छोड़ दीजिये। अच्‍छे दिनों का जुमला महज वाक्‍य-विन्‍यास अथवा शब्‍दों की लफ्फाजी भर नहीं है, वह गहरे अर्थों में एक कार्य-संस्‍कृति है। वह एक आचरण है, एक शैली है, एक विचारधारा है। अच्‍छे दिनों का जिक्र करने का अर्थ यही होता है कि अभी तक निश्चित ही अच्‍छे दिन नहीं थे, इसलिए अब आने वाला समय अच्‍छा होगा। अच्‍छे से आशय किसी कल्‍पनालोक से नहीं वरन धरातल से है।

देश में हर मोर्चे पर बदलाव आया है। जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, फसल बीमा योजना, सौभाग्य योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, आयुष्मान योजना आदि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास की धारा को पहुँचाने वाली अनेक योजनाओं सहित राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति आदि हर बिंदु पर बड़ा बदलाव देखा जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करें तो सबसे बड़ा बदलाव इससे संबंधित मामलों में पाएंगे। पहले आए दिन देश के किसी ना‍ किसी शहर में बम विस्‍फोट की खबरें आया करती थीं और ऐसा लगता था मानो राष्‍ट्र के नागरिक हर पल मौत, आतंक, खौफ के साये में जीने को विवश हैं। आज हालात बदल गए हैं। भारतीय सेना पहले से बहुत अधिक सशक्‍त और आत्‍मविश्‍वास से भरी नजर आने लगी है।

पिछले 4 साल में सीमा पर, सैन्‍य इलाकों में जरूर आतंकी हमले हुए और सुरक्षाबलों ने उनका मुंहतोड़ जवाब भी दिया, लेकिन आतंकवादी राज्‍यों की सीमा पार करके शहरों में प्रवेश नहीं पा सके। सीमा की भी बात करें तो उड़ी जैसे नृशंस हमले का प्रतिशोध सरकार ने सर्जिकल स्‍ट्राइक जैसे बड़े ऑपरेशन को अंजाम देकर ले लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की सूझबूझ और साहस के बूते यह हो पाया। पहले कश्‍मीर घाटी में आए दिन आतंकवादियों के हमले की खबरें आती थीं, लेकिन अब भारतीय सेना द्वारा आतंकियों के मार गिराए जाने की खबरें आती हैं। बुरहान वानी के पूरे दल का हाल ही में सफाया हो चुका है। आतंक निरोधी ऑपरेशन के चलते भारतीय सेना लगातार आतंकवादियों को खदेड़ने में सफल रही है। कांग्रेस की सरकार के समय ऐसा नहीं था। भाजपा के आने के बाद आतंकियों के पाँव उखड़ने लगे हैं।

यदि हम अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो हर छोटे से छोटे व्‍यक्ति की परचेसिंग पॉवर यानी क्रय क्षमता में पहले से इजाफा हुआ है। गांवों में भी अब स्‍मार्ट उपभोक्‍ता पाए जाने लगे हैं। डिजिटल क्रांति का ऐसा सूत्रपात हुआ है कि बड़ी संख्‍या में लोग ऑनलाइन कारोबार, लेनदेन, भुगतान सफलतापूर्वक कर रहे हैं।

इंटरनेट के इस शिखर युग में युवाओं ने स्‍टार्ट-अप्‍स खोले और स्‍वयं की कमाई के अलावा दूसरों को भी रोजगार देने की दिशा में बढ़ रहे हैं। ये वही लोग हैं, जो पहले किसी स्‍थापित संस्‍थानों या कारोबारियों पर ही आश्रित थे, लेकिन अब इनके लिए स्‍व-रोजगार की संभावनाएं अपने वृहद परिप्रेक्ष्‍य में उभरकर सामने आईं हैं। मोबाइल फोन में बैलेंस डालने जैसी रोजमर्रा की जरूरत के लिए भी पहले उपभोक्‍ता को बाजार पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन अब वह घर बैठे खुद अपने मोबाइल से बैलेंस डाल सकता है। डिजिटल क्रांति का इससे बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता।

नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता केवल भारत में ही सीमित नहीं है, वे अब एक वैश्विक राजनेता बन चुके हैं। इजराइल जैसे राष्‍ट्र ने भी भारत की ओर दोस्‍ती का हाथ बढ़ाया और वहां के प्रधानमंत्री ने भारत की यात्रा की। यह सब पहले सहज नहीं हुआ करता था। रूस और अमेरिका जैसे परस्पर विरोधी देशों से भी संबंधों का शानदार संतुलन मोदी ने स्थापित किया है।

प्रायः किसी भी सरकार या नेता के कार्यकाल के दौरान उसकी लोकप्रियता में कमी ही देखने को मिलती है, मगर नरेंद्र मोदी इस मामले में अपवाद हैं। आए दिन कई प्रकार के सर्वे में उनकी लोकप्रियता के प्रतिमानों की सूचनाएं भरी पड़ी रहती हैं। सोशल मीडिया के प्‍लेटफार्म से लेकर गणराज्‍यों तक मोदी प्रभावशाली व्‍यक्तियों की सूची में दर्ज हैं। देश में उनकी लोकप्रियता में वृद्धि ही देखने को मिल रही है।

चार सालो में विपक्ष के रूप में केवल नकारात्मक राजनीति की है कांग्रेस

अब बात करते हैं विपक्ष की। कहने की जरूरत नहीं है कि इन बीते 4 वर्षों में कांग्रेस एक विपक्ष के तौर पर बुरी तरह असफल रही है। वह ठीक से विपक्ष का काम भी नहीं कर पाई। ठीक से काम करना आता तो हाथ से सत्‍ता ही क्‍यों जाती। असल में विपक्ष का दल होना साधारण बात नहीं है, इसमें भी एक योग्‍यता की दरकार होती है। विपक्ष के भीतर भावी पक्ष बनने की संभावना होती है। इसके लिए दूरदर्शिता और योग्‍यता चाहिये। एक विपक्ष के तौर पर भाजपा पूरी तरह सक्रिय और सफल रही थी, तभी 2014 में वह सत्‍ता में आ पाई। लेकिन, कांग्रेस तो सत्‍ता से हटाए जाने के बाद विपक्ष के रूप में भी लचर, कमजोर, सतही, असफल और कुंद रही है।

विपक्ष के रूप में कांग्रेस ने नकारात्मक राजनीति के अतिरिक्त और कुछ नहीं किया है। कांग्रेस के पास विरोध करने के लिए कोई ठोस या रचनात्‍मक मुद्दा नहीं था, तो कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने शालीनता की हदें पार करते हुए घटिया भाषा का उपयोग किया और प्रधानमंत्री सहित अन्‍य वरिष्‍ठ नेताओं पर व्‍यक्तिगत आक्षेप किए, जिसका प्रतिफल उसे 2014 के बाद हुए अनेक राज्यों के विधानसभा चुनावों में जनता ने दिया भी। मगर, फिर भी कांग्रेस को होश आता नहीं दिख रहा।

कांग्रेस ने अक्‍सर गलत ढंग से हावी होने की नाकाम कोशिशें की, लेकिन जनता की आंखें खुल चुकी हैं। अब अवाम देख-समझ रहा है कि मौजूदा सरकार ने 4 सालों में काम ही काम किया है। नरेंद्र मोदी की सरकार ने बिना भ्रष्‍टाचार के एक आरोप के बेदाग़ ढंग से शासन चलाए जाने की मिसाल कायम की है। निश्चित ही 2019 के चुनाव में भी देश की जनता इसी प्रकार भाजपा पर विश्‍वास बनाए रखेगी और नरेंद्र मोदी फिर से एक बार प्रधानमंत्री बनकर सामने आएंगे ताकि वे अपनी देश सेवा का अभियान जारी रख सकें और भारत का प्रगति रथ अविरत गति से यूं ही आगे बढ़ता रहे।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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