मोदी सरकार की नीतियों का असर, सात वर्षों के सबसे उच्च स्तर पर पहुँचा रोजगार सृजन !

सेवा, विनिर्माण क्षेत्र में बेहतरी आने से अर्थव्यवस्था में गुलाबीपन आ रहा है। मार्च और अप्रैल महीने में जीएसटी से राजस्व संग्रह में तेजी आई है। इसके अलावा रोजगार सृजन मार्च, 2011 के बाद से सबसे तेज है, जो माँग में सुधार को दर्शाता है। रोजगार सृजन पिछले सात वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। जीडीपी में भी लगातार बेहतरी आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के अनुसार भारत की जीडीपी दर में अभी और भी बेहतरी आयेगी।

सेवा क्षेत्र में सुधार का दौर जारी है। कारोबारी गतिविधियां में तेजी आने और रोजगार सृजन के उच्च स्तर पर बने रहने से अर्थव्यवस्था में बेहतरी दृष्टिगोचर हो रही है। ‘निक्केई इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स’ अप्रैल महीने में 51.4 पर पहुँच गया, जो मार्च महीने में 50.3 पर था। नये कारोबारी माँग में वृद्धि और मुद्रास्फीति दबाव कम होने से माँग में सुधार आया है और सेवा क्षेत्र की कंपनियों के उत्पादन में तेजी देखने में आ रही है।

सांकेतिक चित्र

आज रोजगार सृजन मार्च, 2011 के बाद से सबसे तेज है, जो माँग में सुधार को दर्शाता है। रोजगार सृजन पिछले सात वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र के आंकड़े सकारात्मक रहे हैं। माँग में तेजी आने से उत्पादन में वृद्धि बरकरार है। फरवरी में आई अस्थाई गिरावट के बाद सेवा क्षेत्र में तेजी से सुधार हुआ है। पिछले महीने के आंकड़े सेवा क्षेत्र में ज्यादा ऑर्डर मिलने की पुष्टि करते हैं।

अप्रैल के दौरान विनिर्माताओं को मिलने वाले नये ऑडरों में लगातार छठवें महीने तेजी रही।  निक्केई इंडिया सविर्सिज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मार्च माह में 50.3 अंक पर पहुंच गया, जो एक माह पहले फरवरी में 47.8 पर था। इससे मार्च के दौरान सेवा क्षेत्र में गतिविधियों के बेहतर होने का संकेत मिलता है। 

विनिर्माण अैर सेवा दोनों क्षेत्र में वृद्धि से कंपोजिट पीएमआई में सुधार आया है। फरवरी माह में गतिविधियों में जो गिरावट आई थी, उसका असर अल्पकालिक रहा और भारत की सकल आर्थिक गतिविधियां मार्च में वापस वृद्धि के दौर में पहुंच गई। मांग बढ़ने और मौजूदा संसाधनों पर दबाव बढ़ने से सेवा प्रदाताओं ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना शुरू किया और जून 2011 के बाद इसमें सबसे ज्यादा तेजी आई है। अर्थव्यवस्था को अधिक से अधिक औपचारिक तंत्र में लाने के सरकार के प्रयासों के प्रतिक्रिया स्वरूप ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन हुआ है। ताजा पीएमआई आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। 

कहा जा सकता है कि सेवा, विनिर्माण क्षेत्र में बेहतरी आने से अर्थव्यवस्था में गुलाबीपन आ रहा है। मार्च और अप्रैल महीने में जीएसटी से राजस्व संग्रह में तेजी आई है। जीडीपी में भी लगातार बेहतरी आ रही है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के अनुसार भारत की जीडीपी दर में अभी और भी बेहतरी आयेगी।

खुदरा मुद्रास्फीति में गिरावट आने और थोक मुद्रास्फीति के नरम रहने से कटौती के लिये माहौल अनुकूल है। अस्तु, आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये नीतिगत दरों में कटौती की दरकार है। ऐसे में अगर रिजर्व बैंक मुख्य दर में कटौती करता है, तो उससे विकास दर में और भी तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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