नोएडा में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री, पैदा होंगे रोजगार के भारी अवसर

बहुत योजनाएं ज्यादा समय लेती हैं। लेकिन पांच वर्ष में उनकी स्प्ष्ट दशा दिशा तो दिखनी ही चाहिए। नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी विचार को महत्व दिया है। आज इस सरकार के पास अपनी उपलब्धियां बताने को बहुत कुछ है। योगी आदित्यनाथ ने भी उत्तर प्रदेश की व्यवस्था में बदलाव किया है, जिसके कारण निवेश के अनुकूल माहौल बन रहा है।

संविधान के अनुसार सरकार में निरन्तरता होती है। प्रकृति और प्रजातन्त्र के आधार पर व्यक्ति और दल में बदलाव होता रहता है। इसी में विकास की भावना भी समाहित है। यदि कोई सरकार पांच वर्ष में आधे अधूरे कार्यो, शिलान्यास या एमयूएम तक सीमित रहती है, तो इनको पूरा करना अगली सरकार की जिम्मेदारी होती है। यह  निरन्तरता के सिद्धांत का तकाजा है।

उत्तर प्रदेश में तो दो हजार तीन से लेकर सात तक के अमयूएम लंबित पड़े थे। इस बीच दो पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनीं, लेकिन उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वैसे भी यह कालखंड निवेश की दृष्टि से उत्साहजनक नहीं था। उत्तर प्रदेश निवेश और उद्यग के क्षेत्र में बीमारू ही बना रहा। अनेक उद्योग बन्द हुए, अनेक का प्रदेश से पलायन हो गया। अनुकूल माहौल बनाने के कारगर प्रयास नहीं हो सके। ऐसे में केवल समझौते या शिलान्यास से ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य का प्रारंभ हो जाना है, जिससे निश्चित अवधि में कार्य पूरा हो जाये। अन्यथा अगली सरकार उसका क्रियान्वयन करे तो आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री जब अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे, तब वह शिलान्यास के समय ही उद्घाटन की तारीख पूछ लिया करते थे। यह सबक उन्होंने अपने कार्यकाल से सीखा था। उनके समय में भी निवेशक सम्मेलन हुए, लेकिन जमीन पर कुछ दिखाई नहीं दिया। यह मानना होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की इस स्थिति को बखूबी समझा है। उन्होंने निवेश के लिए प्रयासों के साथ ही अनुकूल माहौल बनाने को अहमियत दी। सिंगल विंडो सिस्टम इस दिशा में कारगर माना जाता है। योगी ने इसे महत्व दिया। इस संबन्ध में उनकी सरकार ने अनेक प्रभावी कदम उठाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई प्रधानमंत्री मून जे इन द्वारा नोएडा में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री का उदघाटन किया गया

उन्हें नोएडा में सैमसंग कम्पनी के कार्यक्रम का निरीक्षण करना था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेशी मेहमान के आगमन की तैयारी का जायजा लेना था। इस यात्रा का भी उन्होंने बेहतर उपयोग किया। वह पहले मुरादाबाद पहुंच गए। यहां ‘एक जिला एक उत्पाद’ से जुड़े उद्यमियों के साथ बैठक की।

उन्होंने कहा कि मुरादाबाद के उद्योगों की मैपिंग, मार्केटिंग, डिजायनिंग आदि की व्यवस्था की जा रही है। अगले महीने  प्रदेश के सभी जिलों के एक एक उत्पाद को लेकर लखनऊ में बड़ा आयोजन होगा जिसमें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल होंगे। मुरादाबाद का मेटल हैंडीक्राफ्ट, संभल का हड्डी सींग, बिजनौर की काष्ठ कला, अमरोहा का ढोलक और रामपुर के जरी पैच वर्क देश एवं दुनिया भर के बाजारों में लोकप्रिय हैं। इन उत्पादों की लोकप्रियता कायम रखने और कठिनाइयों के निराकरण का प्रयास किया जाएगा।

नोएडा में सैमसंग का प्लांट वस्तुतः मेक इन इंडिया की प्रगति को रेखांकित करता है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारत में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री  उत्तर प्रदेश के नोएडा में स्थापित की  है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के साथ सैमसंग के इस प्लांट का उद्घाटन किया। इसमें पांच हजार  करोड़ रुपये का निवेश होगा। भारत में दस हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। जबकि चार से पांच लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

मेक इन इंडिया को लेकर विपक्ष ने बहुत तंज किये हैं। लेकिन इसकी सफलता अब दिखाई देने लगी है।  मेक इन इंडिया  की  शुरुआत के समय मोबाइल कंपनियों का बाजार करीब उन्नीस हजार करोड़ रुपये का था।  लेकिन मेक इन इंडिया के तहत इसमें करीब तीन सौ पचहत्तर प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कुछ पुराने आंकड़े के अनुसार, मेक इन इंडिया अभियान के तहत करीब  चालीस  मोबाइल फोन कंपनियों ने अपने  प्लांट भारत में स्थापित किए हैं। अब तक ये आंकड़ा और भी बढ़ गया होगा। नोएडा की इस फैक्ट्री में बारह करोड़ मोबाइल तैयार किये जाएंगे। नोएडा की यह फैक्ट्री उन्नीस सौ सत्तानबे में शुरू हुई थी और सन दो हजार पांच में यहां मोबाइल का उत्पादन शुरू हुआ था। लेकिन दक्षिण कोरिया द्वारा अन्य विकसित देशों को नजरअंदाज करके यहां सबसे बड़ी फैक्ट्री लगाना सामान्य बात नहीं है।

बताया जाता है कि चीन और अमेरिका दोनों इस बात का प्रयास कर रहे थे कि यह निवेश उनके यहां हो। इसमें कोई संदेह नहीं कि उन देशों में सैमसंग को ज्यादा सुविधाएं मिलती। चीन में तो सस्ते श्रम की सुविधा भी है। इसके बावजूद दक्षिण कोरिया ने अपना इरादा नहीं बदला। यह वस्तुतः नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की भी सफलता है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से उनके अच्छे संबन्ध थे। इसलिए उन्होंने अमेरिका, चीन व कुछ यूरोपीय देशों के प्रस्ताव नकार दिए। विरोधी दल विदेश नीति को लेकर भी मोदी पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन मोदी कहीं आगे तक की सोच रहे थे। सैमसंग के निवेश से मेक इन इंडिया का मजाक बनाने वालों पर तमाचा भी पड़ा है। इधर योगी आदित्यनाथ ने भी निवेश के अनुकूल माहौल बनाया। इसका भी लाभ उत्तर प्रदेश को मिलने लगा है।

सरकारों के एजेंडे में अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं रहती है। प्रत्येक सरकार का आकलन इस बात से होता है कि उसने किस प्रकार इन योजनाओं का विभाजन किया और कैसे उनकी समय सीमा का निर्धारण कर उन्हें पूरा किया। नरेंद्र मोदी ने पिछली सरकारों की अनेक योजनाओं को मंजूर किया। लेकिन काम ऐसा किया जिसमें जमीन-आसमान का अंतर था।

बहुत योजनाएं ज्यादा समय लेती हैं। लेकिन पांच वर्ष में उनकी स्प्ष्ट दशा दिशा तो दिखनी ही चाहिए। नरेंद्र मोदी की सरकार ने इसी विचार को महत्व दिया है। आज इस सरकार के पास अपनी उपलब्धियां बताने को बहुत कुछ है। योगी आदित्यनाथ ने भी उत्तर प्रदेश की व्यवस्था में बदलाव किया है, जिसके कारण निवेश के अनुकूल माहौल बन रहा है।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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