‘शशि थरूर समझ लें कि यह देश हर हाल में हिन्दू हिन्दुस्तान था, है और हमेशा रहेगा’

हमें यह बताया गया है कि जन्म नहीं, कर्म महान होता है। इसलिए इस देश के हर आदमी की पहचान उसके देशहित या देशविरोधी कर्मों से ही होगी, किसी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक परिवार में जन्म लेने से नहीं। इस देश की मिट्टी में, हवा में, पानी में वो बात है, इस देश के हर शख्स में वो जज्बात हैं कि किसी भी सूरत में यह देश ‘हिन्दू पाकिस्तान’ बन ही नहीं सकता। इसलिए शशि थरूर समझ लें कि यह देश हर हाल में हिन्दू हिन्दुस्तान था, है और हमेशा ही रहेगा।

वैसे तो शशि थरूर और विवादों का नाता कोई नया नहीं है। अपने आचरण और बयानों से वे विवादों को लगातार आमन्त्रित करते आएँ हैं। इस क्रम में सबसे ताजा “हिन्दू पाकिस्तान” का उनका बेहद आपत्तिजनक बयान है जिसने बड़ा विवाद खड़ा किया है और इसपर कोलकाता कोर्ट ने उन्हें समन भी भेजा है। लेकिन, इस बयान पर बात करने से पहले हमारे लिए यह जानना भी जरूरी है कि पिछले साल इन्होंने अपनी किताब  ‘इन्ग्लोरियस एम्पायर’ के सिलसिले में ब्रिटेन के टीवी चैनलों को दिए अपने इंटरव्यू से लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया था।

इसमें उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन की समृद्धि में भारत जैसे उपनिवेशों की लूट का बहुत बड़ा योगदान है। जाहिर है, उनके इस बयान से इनकी यह पुस्तक लोगों में चर्चा का विषय बनी। और अब हाल ही में इन्होंने “व्हाई आई एम अ हिन्दू” यानी ‘मैं हिन्दू क्यों हूँ’ शीर्षक से एक पुस्तक लिखी है जिसमें उन्होंने संघ और बीजेपी के हिन्दुत्व और हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा पर निशाना साधा है।

अब उनके ताजा बयाना पर गौर करें तो शशि थरूर का कहना है कि अगर बीजेपी दोबारा लोकसभा चुनाव जीतती है तो भारत  “हिन्दू पाकिस्तान” बन जाएगा।  अल्पसंख्यकों को मिलने वाली “बराबरी” खत्म कर दी जाएगी। संविधान के बुनियादी सिद्धांतों को तहस-नहस करके एक नया संविधान लिखा जाएगा जो कि हिन्दू राष्ट्र के सिद्धांतों पर आधारित होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह वो भारत नहीं होगा जिसके लिए महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद और बाकी स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया था। हालांकि थरूर ने ये नहीं बताया कि उनकी इन वायवीय बातों के पीछे आधार क्या है ? 

खैर जैसा कि होता आया है, कांग्रेस ने थरूर के इस बयान से तत्काल ही किनारा कर लिया। अब कांग्रेस की स्थिति तो आज ऐसी है कि ‘हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहाँ दम था/ हमारी कश्ती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था’। पहले मणिशंकर अय्यर, गुलाम नबी आजाद और अब शशि थरूर। इसलिए उसके पास इन नेताओं और उनके बयानों से खुद को किनारे करने के अलावा कोई चारा बचता भी नहीं है। लेकिन कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व द्वारा अपने नेताओं के ऐसे बयानों पर खामोश रहना तथा इन्हें चेतावनी तक न देना गंभीर सवाल खड़े करता है।

रही थरूर के हिन्दू पाकिस्तान के बयान की बात तो यह जो नई शब्दावली इन्होंने गढ़ी है, उसकी नींव ही कमजोर है। क्योंकि जिस शब्द में  “हिन्दू” शब्द जुड़ जाता है, वो स्वयं ही बन्धन मुक्त हो जाता है। न तो उसे किसी सीमा में बाँधा जा सकता है, न किसी एक विचार में। क्योंकि हिन्दू होना हमें यह आजादी देता है कि हम ईश्वर को मानें या ना मानें फिर भी हम हिन्दू हो सकते हैं; हम मूर्ति पूजा करें या न करें फिर भी हम हिन्दू हो सकते हैं; हम ईश्वर को किसी भी रूप में देखें या फिर न भी देखें, फिर भी हम हिन्दू हो सकते हैं; हम मन्दिर जाएं या न जाएं फिर भी हम हिन्दू हो सकते हैं; हम व्रत उपवास करें या ना करें फिर भी हम हिन्दू हो सकते हैं।

हमें बताया गया है कि एक महाज्ञानी पंडित भी रावण बन सकता है और एक डाकू भी रामायण लिख सकता है। हमें यह भी सिखाया गया है कि जन्म नहीं कर्म महान होता है। इसलिए इस देश के हर आदमी की पहचान उसके देशहित या देशविरोधी कर्मों से ही होगी, किसी अल्पसंख्यक या बहुसंख्यक परिवार में जन्म लेने से नहीं। इस देश की मिट्टी में, हवा में, पानी में वो बात है, इस देश के हर शख्स में वो जज्बात हैं कि किसी भी सूरत में यह देश ‘हिन्दू पाकिस्तान’ बन ही नहीं सकता। यह हर हाल में हिन्दू हिन्दुस्तान था, है और हमेशा ही रहेगा।

(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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