‘सपा के पांच साल में यूपी में जितना निवेश हुआ था, उससे अधिक योगी के एक साल में ही हो गया’

उत्तर प्रदेश अपनी बीमारू छवि से मुक्त होने की दिशा में सतत आगे बढ़ रहा है। पहली बार इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्तावों पर इतना व्यापक क्रियान्वयन शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश को यहां तक पहुंचाने में योगी आदित्यनाथ ने अनवरत प्रयास किया है। अब उसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे है। औद्योगिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश की छवि ठीक नहीं थी। लेकिन यहां सरकार बदलने के साथ ही इसमें निखार आने लगा है।

उत्तर प्रदेश के इतिहास में औद्योगिक विकास का अभूतपूर्व अध्याय जुड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ में 60 हजार करोड़ से ज्यादा के उद्योगों की नींव रखी जिससे लाखों की तादाद में रोजगार पैदा होंगे। नरेंद्र मोदी ने माना कि योगी आदित्यनाथ ने व्यवस्था को बदलने में सफलता की है। इसके चलते ही यह कार्य संभव हो सका।

पिछली दो सरकारों के समय जितने निवेश प्रस्ताव आये थे, उससे अधिक के निवेश प्रस्तावों का शिलान्यास प्रधानमंत्री के कर-कमलों से हुआ। नरेंद्र मोदी ने इसे उचित ही अद्भुत बताया। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके कार्य करने का  यही अंदाज था। मोदीं ने कहा भी कि इतने बड़े प्रस्तावों के लिए व्यवस्था करना आसान नहीं है।

उत्तर प्रदेश अपनी बीमारू छवि से निजात पाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पहली बार इन्वेस्टर्स समिट के प्रस्तावों पर इतना व्यापक क्रियान्वयन शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश को यहां तक पहुंचाने में योगी आदित्यनाथ ने अनवरत प्रयास किया है। अब उसके सकारात्मक परिणाम भी दिखाई देने लगे है। औद्योगिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश की छवि ठीक नहीं थी। लेकिन यहां सरकार बदलने के साथ ही इसमें निखार आने लगा है।

आज स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश  ई मार्केटप्लेस -जेम पर नम्बर वन हो गया है। ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम, कर प्रक्रिया सरलीकरण, ऑनलाइन यूटिलिटी परमिट देने, ओद्योगीकरण हेतु जमीन की  उपलब्धता और उद्योगों को पर्यावरण क्लियरेंस प्रदान करने वाले पांच शीर्ष राज्यों में भी उत्तर प्रदेश शामिल हो गया है। इसके अलावा पारदर्शिता और सूचनाओं के आदान प्रदान में अग्रणी राज्य भी बन गया है। इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश में चार लाख अठ्ठाइस हजार करोड़ के एक हजार पैंतालीस एमओयू करने वाले निवेशकों के साथ संवाद कर उनकी प्रगति जानी और समस्याओं का निराकरण किया।

शिलान्यास से पहले परियोजनाओं से संबंधित मुद्दों को हल करने के लिए एक-एक निवेशक से बात की। सतीश महाना ने कहा कि समिट के जरिए भारतीय एवं विदेशी निवेशकों और उद्योगों ने उत्तर प्रदेश में निवेश करने के लिए राज्य सरकार में विश्वास व्यक्त किया है। विगत पन्द्रह वर्षों में जितना निवेश प्रदेश में हुआ है, उससे अधिक निवेश इस एक ही वर्ष में हुआ है। 

संबंधित विभागों के निवेशकों को प्रोविजनल लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी करने के निर्देश दिए हैं। पचास करोड़ से अधिक के निवेश वाली अस्सी से अधिक बड़ी परियोजनाएं राज्य स्तर पर और एक करोड़ रुपये से अधिक की छह सौ सूक्ष्म, लघु और मध्यम इकाइयां जिला स्तर पर शिलान्यास भी शीघ्र ही किया जाएगा।  एक हजार पैंतालीस में से करीब साठ परियोजनाएं पहले चरण में  शुरू होंगी, ये देश में एक रिकार्ड होगा। अभी तक सभी प्रदेशों में हुई समिट का रिजल्ट बारह  प्रतिशत से अधिक नहीं रहा है। इतना ही नहीं प्रत्येक दो महीने बाद आयोजित किए जाएंगे।

फरवरी में समिट के दौरान निवेशकों ने प्रदेश सरकार के साथ चार लाख अड़सठ हजार करोड़ रुपये के एमओयू किए थे।  इनमें से करीब साठ हजार करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने से लेकर विभिन्न तरह की स्वीकृतियां व अनापत्तियां ले ली गई थीं। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जितना निवेश पांच वर्ष में हुआ है, उससे अधिक राशि से जुड़े निवेश प्रोजेक्ट का एक साथ शिलान्यास करवाकर सरकार बड़ा संदेश देना चाहती थी। इसमें उसे सफलता मिली है। उद्योगपतियों की भी देश के विकास में अहम भूमिका होती है। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने देश हित मे इस तथ्य को पहचाना। समग्र विकास की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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