अखिलेश जिस तरह एक्सप्रेसवे का श्रेय लेते थे, उसी तरह इस हादसे की जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे?

अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि क्या उनका काम इतना ही दमदार है कि जरा-सी बारिश होते ही उसका दम निकल गया? क्यों न माना जाए कि उनकी सरकार पर जिस भ्रष्टाचार का आरोप लगता रहा है, जरा-सी बारिश में जर्जर हो गया ये एक्सप्रेसवे भी उसीका एक नमूना पेश कर रहा है? ये क्यों न कहा जाए कि 13200 करोड़ के बजट वाले इस एक्सप्रेसवे में पैसे का बड़ा खेल हुआ है? अखिलेश यादव जिस तरह से आगे बढ़-बढ़कर इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का श्रेय लेते रहते थे, उसी तरह से उन्हें इस हादसे से उठ रहे सवालों की जवाबदेही के लिए भी आगे आना चाहिए।

21 नवम्बर, 2016 की तारीख थी, जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। इस एक्सप्रेसवे को उनका ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया था। इसपर लड़ाकू विमान उड़ाए गए थे। इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान यह एक्सप्रेसवे अखिलेश यादव के ‘काम बोलता है’ नारे की पृष्ठभूमि में चमचमाता रहा था।

लेकिन, अपने उद्घाटन के दो वर्ष पूरे करने से पूर्व ही इस एक्सप्रेसवे की जो हालत हो रही है, उसने अखिलेश यादव के ‘काम’ को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। गत दिनों इसकी सर्विस लेन एक कार का बोझ न संभाल पाई और धंस गयी जिससे कार नीचे गिर पड़ी। ये तो गनीमत रही कि गिरने के बाद कार नीचे खाई में फंस गयी जिस कारण सवारों की जान पर कोई खतरा नहीं हुआ।

इस दुर्घटना के बाद मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आ रहा है कि ये एक्सप्रेसवे कई जगह से दरक गया है और इसमें  गड्ढे भी बन गए हैं। सवाल यह उठता है कि 13200 करोड़ में बने इस एक्सप्रेसवे, जिसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बताते हुए सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब भी अपनी पीठ थपथपाने से नहीं चूकते थे, की हालत इतनी ख़राब कैसे हो गयी?

अखिलेश यादव को बताना चाहिए कि क्या उनका काम इतना ही दमदार है कि जरा-सी बारिश होते ही उसका दम निकल गया? क्यों न माना जाए कि उनकी सरकार पर जिस भ्रष्टाचार का आरोप लगता रहा है, जरा-सी बारिश में जर्जर हो गया ये एक्सप्रेसवे भी उसीका एक नमूना पेश कर रहा है?

ये क्यों न कहा जाए कि 13200 करोड़ के बजट वाले इस एक्सप्रेसवे में पैसे का बड़ा खेल हुआ है? अखिलेश यादव जिस तरह से आगे बढ़-बढ़कर इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का श्रेय लेते रहते थे, उसी तरह से उन्हें इस हादसे से उठ रहे सवालों की जवाबदेही के लिए भी आगे आना चाहिए।

वर्तमान योगी सरकार ने इस मामले की जांच तीसरे पक्ष द्वारा करवाने का निर्णय लिया है जो कि अपनी रिपोर्ट पन्द्रह दिन में देगा। इसके बाद ही सरकार इस विषय में आगे कोई कार्यवाही करेगी। बहरहाल, उम्मीद कर सकते हैं कि अखिलेश यादव जिस तरह अपने ‘काम’ का जहां-तहां ढिंढोरा पीटते रहते थे, इस हादसे के बाद शायद उसपर थोड़ी लगाम लगाएं।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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