ये आंकड़े बताते हैं कि मोदी सरकार की नीतियों से बढ़ रहे रोजगार के अवसर

सरकार की स्टार्टअप योजना से लोगों को स्वरोजगार शुरू करने का मौका मिल रहा है। साथ ही, इससे दूसरों को भी रोजगार मिल रहा है। एक अनुमान के अनुसार सरकार ने करीब  15,000 स्टार्टअप्स को शुरू करने में कारोबारियों की मदद की है। लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिये सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत की है। इसकी मदद से लोगों को स्वरोजगार शुरू करने के लिये ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 12 करोड़ ऋण दिये जा चुके हैं, जो यह बताता है कि इस योजना की मदद से कम से कम 12 करोड़ रोजगार का सृजन तो अवश्य हुआ है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार वर्ष 2018 में बेरोजगारी की दर भारत में 3.5 प्रतिशत रहेगी, जबकि चीन में यह 4.8 प्रतिशत होगी। आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 1 से 2 दशकों में भारत के सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। इसके अनुसार भारत, बांग्लादेश, कंबोडिया और नेपाल में असंगठित क्षेत्र में करीब 90 प्रतिशत कामगार हैं, जिसमें कृषि क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है। इन देशों में कृषि के साथ-साथ विनिर्माण, थोक एवं खुदरा कारोबार में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। साफ है, दक्षिण एशिया में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने में भारतीय अर्थव्यवस्था के अहम योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। 

पेरोल रिपोर्टिंग 

अप्रैल, 2018 से हर महीने पेरोल के आंकड़े सरकार ने जारी करना शुरू किया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर, 2017 से फरवरी, 2018 के दौरान औपचारिक क्षेत्र में लगभग 31.1 लाख 48 हजार नये लोगों को रोजगार मिला है। यह अनुमान सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में अंशदान करने वालों की संख्या के आधार पर लगाया है। नीति आयोग के मुताबिक कर्मचारी भविष्य निधि के अनुसार सितंबर, 2017 से फरवरी, 2018 तक पेरोल में 31.1 लाख नये लोगों को रोजगार मिला है। बाद में इसमें संशोधन किया गया, जिससे रोजगार पाने वालों की संख्या और भी बढ़ गई। नीचे दी गई तालिकाओं से पेरोल की मौजूदा स्थिति को समझा जा सकता है :-

तालिका 1

सरकार ने औपचारिक क्षेत्र में मासिक पेरोल रिपोर्टिंग की शुरुआत की है। इससे हर महीने  रोजगार के आंकड़ों का पता लगाया जायेगा। नीति आयोग ने कहा है कि पेरोल का मासिक डेटा अर्थव्यवस्था, नये रोजगार और सरकारी नीतियों की साफ तस्वीर पेश करेगा।

तालिका 2

25 अप्रैल को उम्र पर आधारित पेरोल डेटा तीन एजेंसियों यथा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, पेंशन फंड रेग्युलेटरी ऐंड ड़ेवलपमेंट अथॉरिटी, कर्मचारी राज्य बीमा निगम ने साझा किया है। इन संस्थानों के डेटा से रोजगार सृजन के नये आंकड़ों का पता पता चला है, जो बताता है कि हर महीने लाखों की संख्या में रोजगार पैदा हो रहे हैं।

पेरोल रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर महीने में पेरोल पर आने वाले कर्मचारियों की संख्या में 64.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई, वहीं उसके ठीक पहले वाले महीने में 9.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी महीने में नये पंजीकरण में 57 प्रतिशत से ज्यादा कामगार 18 से 25 साल उम्र वाले थे, जबकि 35 साल से ज्यादा उम्र के कामगारों की संख्या 15 प्रतिशत थी।

रोजगार सृजन में सरकारी पहल

सरकार की स्टार्टअप योजना से लोगों को स्वरोजगार शुरू करने का मौका मिल रहा है। साथ ही, इससे दूसरों को भी रोजगार मिल रहा है। एक अनुमान के अनुसार सरकार ने करीब  15,000 स्टार्टअप्स को शुरू करने में कारोबारियों की मदद की है। लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिये सरकार ने प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत की है। इसकी मदद से लोगों को स्वरोजगार शुरू करने के लिये ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के तहत लगभग 12 करोड़ ऋण दिये जा चुके हैं, जो यह बताता है कि इस योजना की मदद से कम से कम 12 करोड़ रोजगार का सृजन तो अवश्य हुआ है।   

निर्माण और पर्यटन क्षेत्र में रोजगार सृजन     

विगत 4 सालों में निर्माण क्षेत्र में बहुत सारे लोगों को रोजगार मिला है, क्योंकि इस अवधि में सड़क, रेल, गृह निर्माण आदि क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है। वर्ष 2017 में पर्यटन क्षेत्र में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में  प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। एयर ट्रैफिक में साल-दर-साल 18 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की जा रही है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा है। देश में चालू हवाई अड्डों की संख्या दोगुनी हो गई है, जिससे इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

निष्कर्ष

कहा जा सकता है कि देश में रोजगार का सृजन हो रहा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, नेशनल पेंशन स्कीम, कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा उपलब्ध कराये गये आंकड़ों से इस तथ्य की पुष्टि होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के आंकड़ों के अनुसार सितंबर, 2017 से अप्रैल, 2018 के दौरान संगठित क्षेत्र में 41 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है। इसी संगठन के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018 में संगठित क्षेत्र में लगभग 67 लाख रोजगार पैदा हुए थे। 

यह सच है कि असंगठित क्षेत्र में ज्यादा रोजगार सृजित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में तकरीबन 3 लाख लोग देशभर में सामान्य सेवा केंद्र चला रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार पैदा हो रहे हैं। मोबाइल निर्माण इकाइयों में करीब 4.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

वर्ष 2014 में देश में गिने-चुने मोबाइल निर्माता कंपनियों की इकाइयाँ थीं, जो आज बढ़कर 120 हो गये हैं। साफ है, सरकार की रोजगार परक नीतियों की वजह से रोजगार सृजन में तेजी आ रही है। भले ही रोजगार असंगठित क्षेत्र में ज्यादा सृजित हो रहे हैं, लेकिन रोजगार मिलने से देश में समावेशी विकास हो रहा है, जिसकी पुष्टि जीडीपी के गुलाबी आंकड़ों से की जा सकती है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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