जीएसटी के जरिये ई-कॉमर्स कंपनियों पर शिकंजे से बढ़ेगा राजस्व

देखा जाये तो राजकोषीय समेकन के मोर्चे पर सरकार को जीएसटी व्यवस्था से सफलता मिल रही है। वैसे, इसका कारण जीएसटी संग्रह नहीं है। इसका फ़ायदा मुख्यतः कर चोरी में कमी आने एवं जीएसटी मुआवजा उपकर से संबंधित कानून में किये गये संशोधन से मिल रहा है। पिछले महीने की शुरुआत में सरकार ने जीएसटी मुआवजा उपकर से संबंधित विशेष कानून में संशोधन किया था।

नये नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत टैक्स डिड्क्कशन एट सोर्स (टीडीएस) एवं टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) देना होगा। इसके लिये केंद्रीय अप्रत्यक्ष एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने उन कंपनियों के लिए ऑडिट और समाधान फॉर्म जारी किया है, जिनका कारोबार 2 करोड़ रुपये सालाना से ज्यादा है। दरअसल, इस नियम की मदद से सरकार जीएसटी की चोरी पर लगाम लगाना चाहती है।

पूर्व में जीएसटी परिषद ने इस प्रस्ताव को सितंबर महीने तक के लिये मुल्तवी कर दिया था। सीबीआईसी ने अब अक्टूबर महीने में केंद्रीय जीएसटी का 1 प्रतिशत टीडीएस लेने की अधिसूचना जारी की है। माना जा रहा है कि राज्य सरकार भी इस तरह की अधिसूचना जल्द जारी करेगी। इस आधार पर माना जा रहा है कि यह सीजीएसटी और एसजीएसटी का एक प्रतिशत और एकीकृत जीएसटी का 2 प्रतिशत होगा। सरकार को इसकी वास्तविक दर तय करनी है।

हालाँकि, कानून के मुताबिक यह सीजीएसटी और एसजीएसटी के एक-एक प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता है। इसके बरक्स सावर्जनिक क्षेत्र की कंपनियां की गई आपूर्ति पर एक-एक प्रतिशत तक सीजीएसटी और एसजीएसटी का टीडीएस लेंगी, लेकिन अभी ई कॉमर्स कंपनियों एवं विभिन्न सरकारी कंपनियों को की गई आपूर्ति पर टीडीएस से संबंधित व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, ताकि 1 अक्टूबर से इन प्रावधानों का अनुपालन किया जा सके। 

सांकेतिक चित्र [साभार : द हिन्दू]

वैसे, ई-कॉमर्स कंपनियां सरकार की इस पहल का विरोध कर रही हैं, लेकिन सरकार इस मामले में गंभीर है। इससे एक तरफ राजस्व में बढ़ोतरी होगी तो दूसरी तरफ सरकार को यह भी पता चलेगा कि ई कॉमर्स कंपनियां कौन-कौन से उत्पाद बेच रही हैं। इन कंपनियों को इस साल दिसंबर तक ऑडिटर के प्रमाणपत्र सहित फॉर्म भरना होगा। गौरतलब है कि पहले के अप्रत्यक्ष कर के दौर में वीएटी का इस्तेमाल राज्य स्तर के ऑडिट रिपोर्ट में होता था। 

देखा जाये तो राजकोषीय समेकन के मोर्चे पर सरकार को जीएसटी व्यवस्था से सफलता मिल रही है। वैसे, इसका कारण जीएसटी संग्रह नहीं है। इसका फ़ायदा मुख्यतः कर चोरी में कमी आने एवं जीएसटी मुआवजा उपकर से संबंधित कानून में किये गये संशोधन से मिल रहा है। पिछले महीने की शुरुआत में सरकार ने जीएसटी मुआवजा उपकर से संबंधित विशेष कानून में संशोधन किया था।

इससे सरकार को अधिशेष संग्रह को भारत की समेकित निधि में रखने और राज्यों के साथ 50:50 के अनुपात में साझा करने के बाद मौजूदा वर्ष में ही इसके इस्तेमाल की अनुमति मिल गई। पहले यह प्रावधान था कि मुआवजा उपकर अधिशेष को सरकारी खाते में रखा जायेगा और वर्ष 2022 से पहले इसका इस्तेमाल नहीं किया किया जायेगा।  

दूसरे शब्दों में कहें तो केंद्र एवं राज्य को वर्ष 2022 तक इंतजार नहीं करना होगा। अब वे उपकर अधिशेष का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2018-19 में कर सकेंगे। जीएसटी के जुलाई 2017 से मई 2018 तक के आंकड़ों के मुताबिक करीब 40 प्रतिशत उपकर अधिशेष है। जुलाई 2017 से मार्च 2019 तक कुल 1.51 लाख करोड़ रूपये जीएसटी मुआवजा उपकर संग्रहित होने का अनुमान है।

इस तरह केंद्र और राज्य इस वित्त वर्ष के दौरान करीब 600 अरब रुपये अधिशेष साझा कर सकेंगे। कहा जा सकता है कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने से एक तरफ कर चोरी पर लगाम लगी है तो दूसरी तरफ ई-कॉमर्स कंपनियाँ भी इसके दायरे में हैं। साथ ही, मुआवजा उपकर से भी सरकार को  राजस्व की प्राप्ति हो रही है।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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