वो पांच बातें जो बताती हैं कि नरेंद्र मोदी क्यों हैं देश के सबसे लोकप्रिय नेता

प्रश्न उठता है कि आखिर मोदी में ऐसी क्या बात है जो एक कार्यकाल समाप्त करने की ओर बढ़ते होने के बावजूद उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आ रही? इस प्रश्न के जवाब नरेंद्र मोदी की अनेक विशेषताएं गिनवाई जा सकती हैं, लेकिन हम यहाँ उन पांच बातों की चर्चा करेंगे जो प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का देश के हर वर्ग से एक जुड़ाव स्थापित करती हैं। यही बातें वो मुख्य कारण भी हैं जिनसे मोदी की लोकप्रियता में कमी नहीं आ रही।

आज देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। मोदी के प्रधानमंत्रित्व ने चार वर्षों से अधिक का समय पूरा कर लिया है और अब अगले लोकसभा चुनाव की दुन्दुभी भी सुनाई देने लगी है। एक कार्यकाल पूरा करने के बाद प्रायः नेताओं की लोकप्रियता में कमोबेश गिरावट आ ही जाती है, लेकिन नरेंद्र मोदी इस मामले में अबतक अपवाद साबित होते नजर आ रहे हैं। कई वैश्विक संगठनों की रिपोर्टों में मोदी की लोकप्रियता इन चार सालों में बढ़ती पाई गयी है।

ऐसा नहीं है कि मोदी को आलोचनाओं व विरोधों का सामना नहीं करना पड़ता। देश में कुछ ऐसे गिरोह हैं जो गुजरात के मुख्यमंत्री रहने से लेकर अब प्रधानमंत्री बनने तक मोदी के पीछे हाथ धोकर पड़े हुए हैं। विविध दुष्प्रचारों के द्वारा ये गिरोह मोदी को घेरने और जनता में उनकी छवि ख़राब करने की कोशिशों में अपने पूरे तंत्र के साथ लगे रहते हैं। बावजूद इसके मोदी की लोकप्रियता बढ़ ही रही है।

प्रश्न उठता है कि आखिर मोदी में ऐसी क्या बात है जो उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है? इस प्रश्न के जवाब में नरेंद्र मोदी की अनेक विशेषताएं गिनवाई जा सकती हैं, लेकिन हम यहाँ उन पांच बातों की चर्चा करेंगे जो प्रधानमंत्री के रूप में मोदी का देश के बालक, युवा और वृद्ध हर वर्ग से एक तार्किक जुड़ाव स्थापित करती हैं। यही बातें वो मुख्य कारण भी हैं जिनसे उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आ रही।

साभार : डेली न्यूज

विकास का एजेण्डा

गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री तक की यात्रा में नरेंद्र मोदी का केवल एक ही एजेण्डा रहा है – विकास। 2014 में विकास के एजेण्डे पर ही सवार होकर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे। संप्रग सरकार की ढुलमुल कार्यप्रणाली, नीतिपंगुता और घोटालों से सत्ता के प्रति नाउम्मीद हो रही जनता को मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ में विकास की उम्मीद दिखाई दी। इसी उम्मीद में मतदाताओं ने मोदी को प्रचण्ड बहुमत देकर केंद्र की गद्दी पर बिठा दिया।

इस विजय के बाद जनाकांक्षाओं को समझते हुए मोदी ने भी अपने शासन का केंद्र-बिंदु विकास को ही बनाया। तीस करोड़ से भी अधिक खाते खुलवाना हो, बेरोजगार युवकों को स्वरोजगार के लिए कर्ज देना हो, महिलाओं को चूल्हे के धुंए से मुक्ति दिलानी हो, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना हो, बुजुर्गों को पेंशन के जरिये सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा देना हो, काले धन पर चोट करना हो, अटकी पड़ी विकास परियोनाओं को अमलीजामा पहनाना हो आदि अनेक विकासपरक कार्य नरेंद्र मोदी ने अपने शासन में किए हैं जिनसे देश के सभी वर्गों तक विकास की रोशनी पहुंची है।

तकनीकी सजगता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

नरेंद्र मोदी अपने मुख्यमंत्रित्व काल से ही नयी तकनीक को लेकर सजग और सक्रिय रहे हैं। सोशल मीडिया पर वे मुख्यमंत्री रहने के समय से ही खूब सक्रिय रहते हैं। इस समय ट्विटर पर वे पॉप फ्रांसिस और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद दुनिया के तीसरे सर्वाधिक अनुसरणकर्ताओं वाले नेता हैं।

फेसबुक पर भी उनके बड़ी संख्या में पसंदकर्ता हैं। इन्स्टाग्राम पर वे दुनिया के सर्वाधिक अनुसरणकर्ताओं वाले नेता हैं। इन सब तकनीकी सोशल माध्यमों पर मोदी की भरपूर सक्रियता होती है और इनका जन-संवाद के लिए सार्थक उपयोग भी करते रहते हैं। पार्टी नेताओं को भी उनकी हिदायत है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें और इसके जरिये जनता से संवाद बनाए रखें।   

साभार : Breakingtube.com

इस तकनीकी सजगता के साथ-साथ मोदी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के भी धनी हैं। अक्सर भिन्न-भिन्न प्रकार के वैज्ञानिक तथ्यों का जिक्र वे अपने वक्तव्यों में करते रहते हैं। ये दुखद है कि उनकी तथ्यपरक और वैज्ञानिक बातों का मर्म समझे बिना ‘कौवा कान ले उड़ा’ की तर्ज पर कुछ लोगों द्वारा उनके सम्बन्ध में भ्रामक दुष्प्रचार किया जाता है।

अभी हाल ही में प्रधानमंत्री ने अपने एक वक्तव्य में नाली के गैस से चाय बनाने की विधि का जिक्र किया, जिसके बाद विपक्ष से लेकर अंधविरोधी गिरोह तक मोदी का उपहास उड़ाने में जुट गया। लेकिन जब मीडिया ने इस विषय की पड़ताल की तो सच सामने आया। श्याम राव सिरके नामक एक शख्स ने सामने आकर बताया कि उन्होंने गटर गैस से चाय ही नहीं, भोजन तक बनाया है। इतना ही नहीं, वे अपनी इस विधि का पेटेंट तक करा चुके हैं। इसके बाद से अन्धविरोधियों की जुबान पर ताला लग गया।

प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि, शासन में विज्ञान और तकनीक के यथासंभव उपयोग की रही है और उनका मानना रहा है कि शासन में तकनीक का रचनात्मक ढंग से जितना अधिक समावेश किया जाएगा, शासन का स्वरूप उतना ही पारदर्शी और प्रभावी होगा। मोदी इस दिशा में ई-गवर्नेंस सम्बन्धी विभिन्न एप्स के जरिये बढ़ भी रहे हैं, जिसके लाभ से तकनीक सेवी जनता परिचित भी होने लगी है। मोदी का ये वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण उन्हें युवाओं से विशेष रूप से जोड़ता है।

साभार : India.com

रचनात्मक सोच

प्रधानमंत्री मोदी के विचारों और कार्यों दोनों ही में उनकी रचनात्मक सोच का स्पष्ट समावेश दिखाई देता है। स्वच्छ भारत अभियान, आदर्श ग्राम तोजना, उज्ज्वला योजना, मुद्रा लोन जैसी अनेक योजनाएं हैं, जिनमें मोदी की रचनात्मक कार्यशैली को देखा जा सकता है। ऐसे ही एक साक्षात्कार में उन्होंने बेरोजगारी के प्रश्न पर स्वरोजगार की बात करते हुए एक पकौड़े बनाने वाले का उदाहरण दिया। ये अलग बात है कि उनके इस उदाहरण को व्यापक अर्थों में समझने की बजाय अंधविरोधी विपक्ष इसके दुष्प्रचार में लग गया।

मोदी स्वरोजगार की बात कहना चाह रहे थे। वे यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि एक बेरोजगार व्यक्ति जब कोई रोजगार स्थापित करता है, तो आगे वो उसके जरिये और कई लोगों को भी रोजगार दे सकता है। इतने बड़े देश में सबको रोजगार देना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं है, इसलिए मोदी की रचनात्मक सोच ही है कि उन्होंने स्वरोजगार का मार्ग निकाला है और इसको प्रोत्साहित करने के लिए मुद्रा लोन, स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाएं शुरू की हैं। विपक्ष इन बातों को भले न समझे, इनसे लाभान्वित जनता इनका मतलब जरूर समझती है।

दृढ़ इच्छाशक्ति

स्वर्गीय अटल जी के बाद संप्रग के दस वर्षों में मनमोहन सिंह के रूप में अधिकार और इच्छशक्ति से हीन एक ढुलमुल प्रधानमंत्री ही देश ने देखा था। मोदी में देश को एक मजबूत और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला प्रधानमंत्री दिखा तथा मोदी ने भी प्रधानमंत्री बनने के बाद लोगों की इस अपेक्षा पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी – ये दो निर्णय ही मोदी की मजबूत इच्छाशक्ति को प्रतिसूचित करने के लिए पर्याप्त हैं। भारतीय राजनीति में ऐसी दृढ़ इच्छशक्ति वाला कोई और नेता अभी नहीं दिखाई देता। ये एक बड़ा कारण है कि जनता अब भी मोदी को पसंद करती है।

जनजुड़ाव

मोदी देश के एस एपहले प्रधानमंत्री हैं जो निरंतर रूप से संवाद के जरिये जनता से अपना जुड़ाव स्थापित किए हुए हैं। हर महीने रेडियो पर प्रसारित उनका कार्यक्रम ‘मन की बात’ हो या जब-तब होने वाले युवाओं, उद्यमियों, योजनाओं के लाभार्थियों आदि से संवाद के कार्यक्रम हों – मोदी जनता से संवाद करने में कभी पीछे नहीं हटते। सोशल मीडिया पर भी वे लोगों से संवाद करते रहते हैं। यहाँ तक कि विदेशी धरती पर भी वे वहाँ की भारतीय आबादी से संवाद करने में नहीं चूकते। इस जन-संवाद के कारण जनता उन्हें अपने बीच पाती है और उनसे एक अलग जुड़ाव अनुभव करती है। 

मोदी की ये विशेषताएं ही कारण हैं कि शासन के पांच वर्ष पूरे होने के निकट पहुँचने के बावजूद उनकी लोकप्रियता बनी हुई है और जनता एकबार फिर उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखने मन बना चुकी है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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