करोड़ों लोगों को गरीबी के दलदल से निकालने में कामयाब रही मोदी सरकार

भले ही मोदी विरोधी प्रधानमंत्री पर संवैधानिक संस्‍थाओं के अपहरण और लोकतंत्र की हत्‍या जैसे हवा-हवाई आरोप लगा रहे हों, लेकिन दुनिया भारत को कुछ और नजर से देख रही है। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत को दुनिया के लिए एक उदाहरण करार दिया। उन्‍होंने कहा कि भारत ने आजादी बरकरार रखते हुए करोड़ों लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला जो कि एक बड़ी उपलब्‍धि है, इससे दूसरे देशों को सबक सीखना चाहिए।

इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि देश में गरीबी मिटाने की सैकड़ों योजनाओं के बावजूद गरीबी बढ़ती गई। हां, इस दौरान ज्यादातर सत्‍ताधारी कांग्रेस से जुड़े नेताओं, ठेकेदारों, भ्रष्‍ट नौकरशाहों की कोठियां जरूर गुलजार होती गईं। यह भ्रष्‍टाचार का ही नतीजा है कि आजादी के सत्‍तर साल बाद भी हम गरीबी, बेकारी, बीमारी, अशिक्षा के गर्त में आकंठ डूबे हुए हैं। आज जब दुनिया उच्‍च शिक्षा पर जोर दे रही है तब हम प्राथमिक शिक्षा तक को सर्वसुलभ नहीं बना पाएं हैं। इसी का नतीजा है कि 1980 तक सैन्‍य मामलों को छोड़कर हर मामले में भारत से पीछे रहने वाला पड़ोसी देश चीन ऊंचीं कूद के जरिए हमें मीलों पीछे छोड़ चुका है।

भारत में गरीबों की तादाद में अपेक्षित कमी न आने की एक बड़ी वजह यह रही कि यहां गरीबी निवारण योजनाओं का स्‍वरूप दान दक्षिणा वाला रहा। दूसरे शब्‍दों में लोगों को सशक्‍त बनाने के बजाए सरकारी योजनाओं पर निर्भर बना दिया गया। इसका दूरगामी नतीजा यह हुआ जनता में मुफ्तखोरी की आदत पड़ गई।

लोग उस पार्टी को प्राथमिकता देने लगे जो उन्‍हें बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को मुफ्त में मुहैया कराए। इससे गरीबी उन्‍मूलन तो नहीं हुआ, लेकिन गरीबों का हिस्‍सा हड़पने वाला एक परजीवी वर्ग जरूर पैदा हो गया। इस वर्ग ने सत्‍ताधारी नेताओं से नजदीकी हासिल कर ली जिसका नतीजा यह हुआ कि सैकड़ों योजनाओं और लाखों करोड़ रूपये खर्च करने के बावजूद गरीबी का सवाल विकराल रूप धारण करता गया। जैसे-जैसे गरीबी बढ़ी वैसे-वैसे गरीबों के नाम पर की जाने वाली लूट भी बढ़ी। 

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही नरेंद्र मोदी ने गरीबों के सशक्तिकरण का वीणा उठाया ताकि न केवल गरीबी के अभिशाप से मुक्‍ति मिले बल्‍कि गरीबों के नाम पर की जाने वाली राजनीति भी बंद हो जाए। प्रधानमंत्री ने सबसे पहले सभी भारतीयों को बैंक खाता सुनिश्‍चित करने के लिए प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरूआत की और महज तीन वर्षों के भीतर 31.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए।

गौरतलब है कि बैंकों के राष्‍ट्रीयकरण के 35 साल बाद भी बैंकों की चौखट गरीबों से दूर ही बनी रही थी। करोड़ों गरीबों के बैंक खाते खुलने से न केवल देश का वित्‍तीय समावेश हुआ बल्‍कि सरकार की सामाजिक सहायता सीधे बैंक खातों में आने लगी। परिणामतः सत्‍तापोषित बिचौलियों का अपने आप खात्‍मा हो गया।

आजादी के बाद बिजलीघर लगे तो गांवों में, लेकिन इन बिजलीघरों से पैदा हुई बिजली से शहरों का अंधेरा दूर किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि बिजलीघरों की चारदीवारी के आगे अंधेरा ही छाया रहा। नरेंद्र मोदी ने गांवों को रोशन करने की नई कवायद शुरू करते हुए सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का समयबद्ध लक्ष्‍य तय किया। ठोस कार्ययोजना और राजनीतिक-प्रशासनिक इच्‍छाशक्‍ति का नतीजा यह हुआ कि तय समय से पहले अप्रैल 2018 में देश के सभी गांवों तक बिजली पहुंचा दी गई।

अब मोदी सरकार हर घर को रोशन करने की मुहिम शुरू कर चुकी है। सौभाग्‍य योजना के तहत 2022 तक हर घर को सातों-दिन चौबीसों घंटे रोशन करने का लक्ष्‍य रखा गया है। बिजली उत्‍पादन के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने बिजली बचाने का भी अभियान चलाया और 30 करोड़ लोगों को रियायती दामों में एलईडी बल्‍बों का वितरण किया जिससे 15000 करोड़ रूपये की बचत हुई। इसी तरह का अभियान गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए चलाया गया। इसके साथ-साथ स्‍वच्‍छता, शौचालय, पेयजल, कृषि उपजों की खरीद, आवास, पिछड़े जिलों के लिए लक्षित योजना, स्‍वच्‍छ ईंधन, जन औषधि केंद्रों की स्‍थापना जैसे ठोस कदम उठाए गए जिससे गरीबों का सशक्तिकरण हुआ।   

गरीबों को सशक्‍त बनाने का यह नतीजा निकला कि करोड़ों लोग गरीबी के बाड़े से निकलने में कामयाब हुए। इसका उदाहरण हाल ही में मिला जब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा को संबोधित करते हुए भारत को दुनिया के लिए एक उदाहरण करार दिया। उन्‍होंने कहा कि भारत ने आजादी बरकारार रखते हुए लाखों लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला।

गरीबी उन्‍मूलन के क्षेत्र में भारत की प्रगति को देखते हुए विश्‍व बैंक भारत को निम्‍न मध्‍यम आय वर्ग वाले देशे से उपर उठकर उच्‍च मध्‍यम आय वर्ग वाले देशों में शामिल होने के लिए मदद करने का फैसला किया है। कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत विश्‍व बैंक भारत को अगले पांच वर्षों में 25 से 30 अरब डालर की वित्‍तीय सहायता मुहैया कराएगा।

इस कार्यक्रम में रोजगार सृजन, मानवीय पूंजी के निर्माण, पर्याप्‍त संसाधन और समावेशी विकास जैसे सबलीकरण के दूरगामी उपाय शामिल हैं। विश्‍व बैंक ने पहली बार यह फ्रेमवर्क भारत के साथ तैयार किया है। यह देश के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

समग्रत: मोदी सरकार की गरीबों के सशक्‍तीकरण और विकास की दूरगामी नीतियों के ठोस क्रियान्‍वयन का ही नतीजा है कि भारत निम्‍न मध्‍यम आय वर्ग से आगे बढ़कर उच्‍च मध्‍यम आय वर्ग की ओर अग्रसर हो रहा है। यह उपलब्‍धि मोदी विरोधियों की चिंता की प्रमुख वजह है।

(लेखक केन्द्रीय सचिवालय में अधिकारी हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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