सरकार के आर्थिक सुधारों का दिख रहा असर, कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भारत की बड़ी छलांग!

सरकार द्वारा उठाये गये सुधारात्मक कदमों की वजह से ही भारत चार सालों के अंदर 142वें स्थान से 77वें स्थान पर पहुँच सका। वित्त मंत्री अरुण जेटली के मुताबिक अगर रियल एस्टेट पंजीकरण, कारोबार शुरू करने और अनुबंधों के प्रवर्तन में लगने वाला समय कम होता है, तो भारत शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार कारोबारी माहौल में सुधार के लिहाज से भारत दुनिया भर में पांचवां सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश रहा है।

केंद्र सरकार ने देश में निवेश को प्रोत्साहन देने और कारोबारी सुगमता को बढ़ाने के लिए तरह-तरह के सुधार किये हैं, जिसे तकनीकी भाषा में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ कहते हैं। पिछले वर्ष ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत ने रिकॉर्ड 30 पायदान सुधार कर 100वां स्थान हासिल किया था। इसबार वह 190 देशों की सूची में 23 पायदान की छलांग लगाते हुए 77वें स्थान पर पहुँच गया है। इसकी जानकारी 31 अक्तूबर, 2018 को जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट “डूइंग बिजनेस 2019-सुधार के लिए प्रशिक्षण” में दी गई।

साभार : सीएनबीसी

देखा जाये तो मोदी सरकार की यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि विश्व बैंक ने भारत को लगातार तीसरे साल उल्लेखनीय सुधार करने वाली अर्थव्यवस्था करार दिया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि मोदी सरकार ने अफसरशाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाया है।

सरकार द्वारा उठाये गये सुधारात्मक कदमों की वजह से ही भारत चार सालों के अंदर 142वें स्थान से 77वें स्थान पर पहुँच सका। जेटली के मुताबिक अगर रियल एस्टेट पंजीकरण, कारोबार शुरू करने और अनुबंधों के प्रवर्तन में लगने वाला समय कम होता है, तो भारत शीर्ष 50 देशों में शामिल हो सकता था। इस रिपोर्ट के अनुसार कारोबारी माहौल में सुधार के लिहाज से भारत दुनिया भर में पांचवां सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश रहा है।

कारोबार सुगमता रैंकिंग में न्यूजीलैंड शीर्ष पर है। उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का स्थान आता है। सूची में अमेरिका आठवें, चीन 46वें और पाकिस्तान 136वें स्थान पर है। विश्व बैंक ने इस मामले में सबसे अधिक सुधार करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत को 10वें स्थान पर रखा है।

कारोबारी माहौल में सुधार को आंकने के लिए विश्व बैंक ने जो 10 मानदंड रखे हैं, उनमें से 6 मानदंडों में भारत ने सुधार किया है। इन मानदंडों में कारोबार शुरू करना, निर्माण परमिट, बिजली की सुविधा प्राप्त करना, कर्ज प्राप्त करना, करों का भुगतान, सीमा पार व्यापार, अनुबंधों को लागू करना और दिवाला प्रक्रिया से निपटना शामिल है।

विदेश व्यापार एवं निर्माण की अनुमति में भारत ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया। विदेश व्यापार में भारत 129वें स्थान से लंबी छलांग लगाते हुए 52वें स्थान पर पहुँच गया। औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग के अनुसार बंदरगाहों पर जोखिम प्रबंधन प्रणाली लागू करने के कारण भारत बेहतर अंक प्राप्त कर सका। ई-संचित मोबाइल ऐप से कस्टम दस्तावेजों के ई-भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराने में भी भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। निर्माण परमिट के मामले में भी वह 129वें स्थान से 52वें स्थान पर आ गया। 

विश्व बैंक हर साल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सूची जारी करता है और वह इसे विगत 15 सालों से जारी कर रहा है। विश्व की ताजा रिपोर्ट में सभी 190 देशों के कारोबार नियमन के 10 क्षेत्रों, जैसे, कारोबार शुरू करना, निर्माण की अनुमति हासिल करना, बिजली कनेक्‍शन देने की प्रक्रिया और उसमें लगनेवाला समय, संपत्ति का पंजीकरण, कर्ज मिलने में लगने वाला समय, अल्‍पसंख्‍यक निवेशकों की सुरक्षा, कर का भुगतान, दूसरे देशों के साथ व्‍यापार करने में सहजता का प्रतिशत, समझौते को लागू कराने और दिवालियापन का समाधान करने में तेजी आदि के आधार पर रैंकिंग का निर्धारण किया जाता है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत नये कारोबार को शुरू करने में लगने वाला समय, खरीद-फरोख्त वाले उत्पादों के लिये वेयर हाउस बनाने में लगने वाला समय, उसकी लागत व प्रक्रिया, किसी कंपनी के लिये बिजली कनेक्शन में लगने वाला समय, व्यवसायिक संपत्तियों के निबंधन में लगने वाला समय, निवेशकों के पैसों की सुरक्षा गारंटी, कर संरचना का स्तर, कर के प्रकार व संख्या, कर जमा करने में लगने वाला समय, निर्यात में लगने वाला समय एवं उसके लिये आवश्यक दस्तावेज़, दो कंपनियों के बीच होने वाले अनुबंधों की प्रक्रिया और उसमें लगने वाले खर्च आदि को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत रैंकिंग तय करने में आधार बनाया जाता है।

विश्व बैंक द्वारा जारी की जाने वाली यह रिपोर्ट कई मायनों में अहम है, क्योंकि इस रिपोर्ट से किसी भी देश के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और वैश्विक स्तर पर उक्त देश की साख में भी इजाफा होता है। सरकार ने हाल फिलहाल में कारोबारी सुगमता को सहज बनाने के लिए कई आर्थिक सुधार किए हैं और इस दिशा में वह लगातार आगे बढ़ रही है। भारत की रैंकिंग में सुधार से वैश्विक स्तर की नामचीन रेटिंग एजेंसियां भारत को वर्तमान के मुकाबले और बेहतर रेटिंग दे सकती हैं, जिससे निवेशकों का हम पर भरोसा बढ़ेगा और देश में कारोबारी माहौल भी बेहतर होगा।

औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के अनुसार भारत 122 सुधारों को लागू कर चुका है और इन्हें मान्यता दिलाने के लिए सरकारी तंत्र विश्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। कारोबारी सुगमता के लिये 90 और सुधारों को हकीकत में बदलने की कोशिश सरकार करेगी। इसके तहत कंस्ट्रक्शन परमिट देने में तेजी लाना, नई कंपनियों के पंजीकरण को आसान बनाना, निदेशकों की पहचान आधार से करना आदि शामिल है।

प्रधानमंत्री कार्यालय, डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, शहरी विकास एवं कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय सहित बहुत सारे दूसरे मंत्रालय इस मोर्चे पर निरंतर काम कर रहे हैं। इस क्रम में ‘डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन’ ईज ऑफ डूइंग बिजनस रैंकिंग को बेहतर करने के लिये नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है।

डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स के सचिव के अनुसार रैंकिंग में सुधार होने से देश में निवेश का सकारात्मक माहौल बनेगा। हालाँकि, अभी भी कई क्षेत्रों में सुधार की गुंजाइश बनी हुई है। भारत की जीडीपी वृद्धि के हिसाब से देश में ईज ऑफ डूईंग बिजनेस की स्थिति और भी बेहतर होगी। गौरतलब है कि मौजूदा समय में जीडीपी रैंकिंग के मामले में भारत चौथे स्थान पर है। अन्य सुधारों के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ फाइनैंशियल सर्विसेज बैंक खाता खोलने के लिये कंपनी की सील की मौजूदा आवश्यकता को समाप्त करने पर विचार कर रहा है।

कैपिटल इक्विपमेंट के आयात पर भी कैश रिफंड को एक वर्ष के अंदर वापिस करने की योजना है। फिलहाल, इस आलोक में इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम करना होता है। इंडस्ट्री डिपार्टमेंट ने भी मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के लिए कई सुधार का प्रस्ताव किया है, जिसमें डिजिटल सिग्नेचर और डायरेक्टर आडटेंफिकेशन नंबर को आधार से बदलना शामिल है। इस क्रम में डिजिटल सिग्नेचर को यूजर नेम या वन-टाइम पासवर्ड से बदला जा सकता है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स कंपनियों के पंजीकरण के बाद एक अलग परमानेंट एकाउंट नंबर देने की प्रक्रिया को भी समाप्त कर सकता है।

इस रिपोर्ट में भारत को छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के पैमाने पर विश्व में अग्रणी माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत ने छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा, ऋण उपलब्धता और विद्युत उपलब्धता के क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत के कंपनी कानून और प्रतिभूति नियमन को भी काफी उन्नत माना गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में उठाये गये सुधारात्मक कदमों से भारत की रैंकिंग में सुधार आया है। उदाहरण के तौर पर वित्त वर्ष 2014-15 में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में भारत की रैंकिंग 142वीं, वित्त वर्ष 2015-16 में 131वीं, वित्त वर्ष 2016-17 में 130वीं और वित्त वर्ष 2017-18 में 100वीं रही है। ताजा रिपोर्ट की अवधि के दौरान दिल्ली एवं मुंबई में क्रियान्वयन में लाये गये सुधारों पर आधारित है। इस दौरान स्थायी खाता संख्या और कर खाता संख्या के आवेदनों को मिलाकर नयी दिल्ली में कारोबार की शुरआत करने की प्रक्रिया तेज हुई है।

इसी तरह मुंबई में मूल्य वर्धित कर और पेशा कर के आवेदनों को मिलाकर कारोबार शुरू करना आसान हुआ है। सरकार ने पिछले एक साल में कई बड़े कदम उठाये हैं। विदेशी निवेश के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुँच चुका है।

कहा जा सकता है कि कारोबार को सुगम बनाने के लिए मोदी सरकार विश्व बैंक के साथ मिलकर ज्यादा से ज्यादा सुधारों को अमलीजामा पहनाने की कोशिश कर रही है। अगर इस प्रयास में सरकार को सफलता मिलती है तो ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस के मामले में भारत अगले साल शीर्ष 50 देशों की श्रेणी में पहुँचने में कामयाब हो जायेगा।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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