‘कांग्रेस पटेल को लेकर मोदी सरकार पर जितने हमले करेगी, उसकी नीयत पर उतने ही सवाल उठेंगे’

कांग्रेस बार-बार कहती है कि पटेल कांग्रेस के सदस्य रहे, फिर भारत रत्न देने में उनके साथ भेदभाव क्यों किया गया? क्यों नेहरू और इंदिरा भारत रत्न लेते वक्त सरदार पटेल का ध्यान नहीं आया? क्या भारत की जनता को कांग्रेस इन सवालों का जवाब देगी? आज नरेन्द्र मोदी ने अगर इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का बीड़ा उठाया है और पटेल को उनका उचित सम्मान मिल रहा है, तो इसपर राजनीति करके कांग्रेस पटेल के प्रति अपनी नकली श्रद्धा की ही पोल खोल रही है।

गुजरात में लौह पुरुष सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा के अनावरण के साथ ही देश का इतिहास एक बार फिर से गौरवान्वित हुआ है। सरदार के कृतित्व और यशोगाथा को और अधिक प्रकाशवान बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी (साभार : इंडिया टुडे)

आज के नौजवानों के लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि आखिर भारत के अमर सपूत सरदार पटेल का योगदान भारतीय राजनीति के लिए अमिट क्यों है? जब देश स्वतंत्र हुआ, उस समय भारत में 500 से ज्यादा रियासतें थीं, जो अपनी किस्मत का फैसला खुद करना चाहती थीं। लेकिन सरदार को पता था कि जब तक उनको एक सूत्र में नहीं पिरोया जाता है, भारत देश का सपना साकार नहीं हो सकता। अपने अटल इरादों के कारण सरदार पटेल ने सभी राजाओं और रजवाड़ों को एक मंच पर इकठ्ठा किया।

इसमें से कुछ राजे ऐसे थे, जो स्वतंत्र रहना चाहते थे, उनकी अपनी शर्तें थीं। सरदार पटेल ने साम, दाम, दंड और भेद का इस्तेमाल करके  सबको भारतीय गणतंत्र का हिस्सा बना दिया। जरूरत पड़ी तो सैन्य बलों का इस्तेमाल भी किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब आज से पांच साल पहले कहा था कि वह सरदार पटेल की एक विशाल प्रतिमा बनवाना चाहते हैं, तब शायद किसी को अंदाज़ा नहीं रहा होगा कि इतना बड़ा प्रोजेक्ट इतने कम समय में पूरा हो सकता है।

कहा जाता है कि प्रधानमंत्री के जेहन में इस प्रोजेक्ट को लेकर इतनी गंभीरता थी कि वह हमेशा ही सरदार पटेल की एक छोटी सी मूर्ति अपने टेबल पर रखा करते थे। यही नहीं, वह विदेशी मेहमानों के साथ भी इस प्रोजेक्ट को लेकर हमेशा चर्चा किया करते थे। सरदार पटेल ने देश को एकीकृत करने का महती कार्य किया था, लेकिन उनके योगदान को कांग्रेस ने इतने सालों में जानबूझ कर नज़रंदाज़ किया। आज ऐसे ही लोग सरदार की प्रतिमा के ऊपर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस को बताना चाहिए कि सरदार पटेल को उनका समुचित सम्मान देने में दशकों क्यों लग गए?

कांग्रेस बार-बार कहती है कि पटेल कांग्रेस के सदस्य रहे, फिर भारत रत्न देने में उनके साथ भेदभाव क्यों किया गया? क्यों नेहरू और इंदिरा को भारत रत्न लेते वक्त सरदार पटेल का ध्यान नहीं आया? क्या भारत की जनता को कांग्रेस इन सवालों का जवाब देगी? आज नरेन्द्र मोदी ने अगर इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का बीड़ा उठाया है और पटेल को उनका उचित सम्मान मिल रहा है, तो इसपर राजनीति करके कांग्रेस पटेल के प्रति अपनी नकली श्रद्धा की ही पोल खोल रही है।

कांग्रेस ने न सिर्फ सरदार पटेल बल्कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस और भीमराव आंबेडकर जैसे कद्दावर राष्ट्रवादी नेताओं को भी इतिहास के पन्नों में दफ़न करने का काम किया। हालाँकि वर्तमान सरकार ने इन नायकों को भी सम्मान देने की दिशा में कदम उठाए हैं।

अपने भाषण में पीएम मोदी ने इस बात को बहुत मजबूती के साथ रखा कि कैसे राष्ट्रवादी सोच वाले नेताओं को जवाहरलाल नेहरू ने किनारे लगाने का प्रयास किया। बहरहाल, ये स्पष्ट है कि कांग्रेस वर्तमान सरकार पर सरदार पटेल को लेकर जितने भी हमले करेगी, उसकी नीयत पर उतने ही सवाल उठेंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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