सेना के सभी अंगों को मजबूत करने में जुटी है मोदी सरकार

गत दिनों देश की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी ‘अरिहंत’ ने अपना परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। वायु सेना को मजबूती देने वाला राफेल सौदा विपक्षी विरोधों के बावजूद प्रक्रिया में है। इन सब बातों से जाहिर है कि मोदी सरकार भारतीय सेना के सभी अंगों को मजबूत बनाने की दिशा में सक्रियतापूर्वक कार्य कर रही है।

शुकवार का दिन भारतीय सेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्‍याय जोड़ने वाला साबित हुआ। देश की स्‍वदेशी निर्माण की नीति ने तो एक नया आयाम प्राप्त किया ही, साथ ही देश को बड़ी सामरिक ताकत बनने की दिशा में एक और पड़ाव पार करने में भी  सफलता प्राप्‍त हुई। भारतीय सैन्‍य बेड़े में बहुप्रतीक्षित होवित्‍जर तोप सहित वज्र व अन्‍य उपकरणों को शामिल कर लिया गया, जिससे अब भारतीय सेना की शक्ति में और बढ़ोतरी हो गई है।

महाराष्‍ट्र के नासिक में देवलाली नामक स्‍थान के तोपखाने पर समारोहपूर्वक यह कवायद पूरी की गई। इस कार्यक्रम में भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत मौजूद रहे। किसी भी देश की ताकत का अंदाजा निश्चित ही उसकी सैन्‍य स्थिति से ही लगाया जा सकता है। प्रसन्‍नता की बात है कि अब भारत इस दिशा में उत्‍तरोत्‍तर प्रगति करता जा रहा है और अपनी सामरिक ताकत बढ़ाता जा रहा है।

अभी अधिक दिन नहीं बीते जब अमेरिका की ख्‍यात कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने भारत में लड़ाकू विमान निर्माण पर मुहर लगाई थी और उसके बाद अब यह नई उपलब्धि प्राप्‍त हुई है। सरकार का लक्ष्‍य है कि आगामी दो वर्षों के भीतर तकरीबन साढ़े चार हज़ार करोड़ रुपए की लागत से तकरीबन सौ की संख्‍या में के-9 वज्र तोपों को भी तोपखाने में शामिल किया जाए।

यह तोप प्रकाश एवं अंधेरा, दोनों स्थितियों में प्रहार करने में सक्षम होती है और इसकी मारक क्षमता भी 39 किलोमीटर तक आंकी गई है। युद्ध के समय इन तोपों की उपयोगिता को देखते हुए इसका अच्‍छा खासा निर्माण किया जाएगा और अहम बात यह है कि इनका निर्माण पूरी तरह से स्‍वदेशी होगा। मेक इन इंडिया नीति के तहत ही इनका निर्माण किया जाएगा।

यह गर्व का विषय है कि अब स्‍वदेशी तकनीक से निर्मित तोप देश के काम आएगी। इससे पहले हमें बाहरी कंपनियों की सेवाएं लेना पड़ती थीं, लेकिन अब हम स्‍वयं निर्माण में सक्षम हो गए हैं। यहां इस तथ्‍य का उल्‍लेख करना अहम होगा कि यह पहला ही अवसर है जबकि देश में किसी तोप का निर्माण हो रहा है।

इसके अलावा देश में एम-777 होवित्‍ज़र तोपों को भी निर्माण किया जाएगा। इनकी अनुमानित संख्‍या 145 बताई जा रही है। अनुमान है कि अगले साल अगस्‍त तक पांच तोपें बनकर तैयार होंगी, जिन्‍हें सेना को सौंप दिया जाएगा। होवित्‍जर तोप का होना देश के लिए बहुत मायने रखता है।

बोफोर्स के बाद, एक लम्बे समय से सेना को नयी तोपों का इंतजार था, जो शुक्रवार को पूरा हुआ। होवित्जर तोप की सामान्‍य जानकारी की बात करें तो इसका एक गोला ही 45 किलो का होता है। वजन में बेहद हल्की यह तोप इतनी सटीक एवं मारक होती है कि यह शत्रु को एक ही वार में तबाह कर सकती। अब यह सवाल उठता है कि आखिर इतना समय और धन खर्च करने पर इन तोपों की उपयोगिता कहां दिखाई देगी। इसका सीधा-सा जवाब है कि इन तोपों को भारत पाकिस्‍तान और भारत चीन की सीमा पर तैनात किया जाना प्रस्‍तावित है।

आंतरिक सुरक्षा एवं आतंकी हमलों की दृष्टि से ये सर्वाधिक संवेदी इलाके हैं। इन तोपों की खासियत यह है कि इन्‍हें दुर्गम से दुर्गम स्‍थानों पर भी रखा जा सकता है। पहाड़ों, बर्फीले क्षेत्रों, घने जंगलों या मरुस्‍थल पर, सभी स्‍थानों पर इनकी तैनाती की जा सकती है। ये तोपें इतनी मजबूत होंगी कि बाहरी वातावरण का इनकी कार्यप्रणाली पर कोई असर नहीं पड़ेगा। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने आधिकारिक तौर पर यह बताया है कि वज्र एवं होवित्‍ज़र तोपों को अब तोपखाने में शुमार कर लिया गया है। निस्संदेह ये भारतीय सामरिक सामर्थ्‍य का एक अभिनव अध्‍याय है।

गौरतलब है कि गत दिनों देश की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी ‘अरिहंत’ ने अपना परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। राफेल सौदा विपक्षी विरोधों के बावजूद प्रक्रिया में है। इन सब बातों से जाहिर है कि मोदी सरकार भारतीय सेना के सभी अंगों को मजबूत बनाने की दिशा में सक्रियतापूर्वक कार्य कर रही है। 

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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