59 मिनट लोन योजना से एमएसएमई कारोबारियों के लिये लोन लेना हुआ आसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 59 मिनट में एमएसएमई कारोबारियों को 1 करोड़ रूपये तक के लोन देने की घोषणा में कहीं भी अतिशयोक्ति नहीं है, लेकिन इसके लिये कारोबारियों को भी बैंक के समक्ष पारदर्शितापूर्ण ढंग से पेश आना होगा। बैंक का मुख्य कारोबार जमा लेना और कर्ज देना ही है, लेकिन अधिकांश कारोबारी आजकल बैंक को पैसा कमाने का सबसे आसान जरिया समझने लगे हैं, जिससे उन्हें बाज आना चाहिए। अगर वास्तविक एमएसएमई कारोबारी इस योजना का लाभ लेते हैं तो निश्चित रूप से इससे बैंक और आम आदमी का भला होगा और अर्थव्यवस्था भी तेजी से मजबूती की ओर अग्रसर होगी।

दे में फिलहाल 6.3 करोड़ से ज्यादा एमएसएमई यूनिट कार्य कर रही हैं, जिनमें 11.1 करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है। देश की जीडीपी में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान करीब 30 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि यदि इस क्षेत्र को मजबूत किया जाये तो देश में रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास, विनिर्माण में तेजी आदि को संभव बनाया जा सकता है। इन्हीं तथ्यों को दृष्टिगत करते हुए एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिये 59 मिनट में लोन देने की योजना लेकर मोदी सरकार सामने आई है।

मौजूदा समय में कारोबारियों को लोन लेने के नियमों की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें लोन लेने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अमूमन, डर की वजह से या देरी होने की आशंका के कारण कारोबारी बैंक से संपर्क नहीं करते हैं। अगर कोई कारोबारी बैंक से संपर्क भी करता है, तो उसे बैंक की कागजी कार्रवाई परेशानी जनक लगती है, क्योंकि उनके पास सभी पेपर नहीं होते हैं। इस प्रकार, देखा जाये तो कारोबारियों को लोन नहीं मिलने का वास्तविक कारण उनमें जागरूकता का अभाव होता है।

सांकेतिक चित्र (साभार : भारत सरकार योजना डॉट कॉम)

जो कारोबारी सही मायनों में कारोबार करना चाहते हैं, वे बैंक लोन के लिये आवश्यक दस्तावेजों को उपलब्ध कराकर एवं दूसरी शर्तों को पूरा करके लोन ले सकते हैं, लेकिन ऐसे कारोबारियों को बैंक के नियमों की जानकारी एक जगह नहीं मिल पाती है। ऐसी समस्याओं के निराकरण हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) कारोबारियों के लिये एक ऐसे पोर्टल का आगाज किया है, जिसके जरिये उन्हें आसानी से 59 मिनट के अंदर 1 करोड़ रूपये लोन की सैद्धांतिक मंजूरी मिल सकती है। वास्तविक मंजूरी हेतु कारोबारियों को बैंक की सभी शर्तों को पूरा करना होगा।

कारोबारियों को 59 मिनट में लोन की सैद्धांतिक मंजूरी लेने के लिये सबसे पहले योजना की वेबसाइट (www.psbloansin59minutes.com) पर जाकर लॉग इन करना होगा, लेकिन इससे पहले कारोबारियों को अपना आईटीआर, जीएसटी विवरण, 6 महीनों का बैंक स्टेटमेंट, डायरेक्टर एवं मालिक का विवरण एवं अन्य जरूरी जानकारियों का विवरण तैयार रखना होगा, ताकि समय से ऑनलाइन विवरण प्रविष्टि में कोई दिक्कत न हो। एमएसएमई कारोबारी को 1 करोड़ रुपये तक के लोन की सैद्धांतिक मंजूरी बेबसाइट पर 10 चरणों की सफल प्रविष्टि के उपरांत मिल सकती है।

पहले चरण में कारोबारी को अपना नाम, ई-मेल एड्रेस और मोबाइल नंबर को रजिस्टर करना होगा, ईमेल और मोबाइल नंबर के सत्यापन हेतु ईमेल एवं मोबाइल पर ओटीपी आयेगा। दूसरे चरण में कारोबारी को कुछ सवालों जैसे, क्या आप जीएसटी में पंजीकृत हैं और अपना जीएसटी रिटर्न नियमित तौर पर भरते हैं, क्या आपने कभी भी कोई लोन डिफॉल्ट किया है आदि सवालों के ऑनलाइन जबाव देने होंगे। तीसरे चरण में जीएसटी विवरण देना होगा, जिनमें जीएसटी नंबर, जीएसटी यूजर नेम और जीएसटी पासवर्ड आदि शामिल हैं।

चौथे चरण में कारोबारी को टैक्स रिटर्न या तो एक्सएमएल फॉर्मेट में अपलोड करना होगा या अपने आईटीआर क्रिडेंशल्स के जरिए लॉग इन करना होगा। पांचवें चरण में बैंक स्टेटमेंट्स को अपलोड करना होगा या फिर नेट-बैंकिंग क्रिडेंशल्स के जरिए लॉग इन करना होगा। छठे चरण में निदेशकों का विवरण देना होगा। सातवें चरण में कारोबार के स्वरूप, लोन का उद्देश्य, कोलेटरल सिक्यूरिटी, कोई लोन पहले लिया हो तो उसकी जानकारी देनी होगी।

आठवें चरण में कारोबारी को उस बैंक का चयन करना होगा, जहाँ से वह लोन लेना चाहता है। अभी इस वेबसाइट से 1 दर्जन बैंक जुड़े हुए हैं। नौवें चरण में कारोबारी को कन्वीनियेंस फी के तौर पर 1000 रुपये और उसपर जीएसटी का भुगतान करना होगा। दसवां चरण आखिरी प्रक्रिया है। इस चरण में आवेदक 1 करोड़ रूपये लोन की सैद्धांतिक मंजूरी वाला लेटर डाउनलोड कर सकता है।

गौरतलब है कि यह प्रक्रिया लोन की सैद्धांतिक मंजूरी हासिल करने के लिये कारोबारियों को पूरा करना है। हालांकि लोन की मंजूरी एवं उसका वितरण तभी किया जायेगा, जब कारोबारी बैंक की सभी शर्तों को पूरा करेंगे, क्योंकि इस पोर्टल के जरिये उपलब्ध कराई गई जानकारी के बाद भी आवश्यक होने पर स्पष्टीकरण हेतु बैंक कुछ दूसरे दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं। जरूरी होने पर वे कोलेटरल सिक्यूरिटी या फिर गारंटी की भी मांग कर सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से आवेदक के प्रोफ़ाइल एवं उसकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगा।    

बहरहाल, बैंक की संभावित शर्तों या मांगे जाने वाले संभावित दस्तावेजों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता है, सरकार द्वारा शुरू किया गया यह पोर्टल बेमानी है। देखा जाये तो सैद्धांतिक मंजूरी हासिल करने के लिये लोन के आवेदकों को जिन जानकारियों को ऑनलाइन पोर्टल में साझा करना होगा वे लोन पाने की शर्तों का ही हिस्सा हैं। अगर लोन के आवेदक पोर्टल में सभी जानकारियों को सही-सही भरेंगे तो बहुत कम मामले ऐसे आयेंगे, जिनमें बैंक को आवेदकों से अतिरिक्त दस्तावेजों की माँग करनी पड़ेगी।

घोषणा में 1 सप्ताह में ऋण वितरण की बात कही गई है, जिसे शत-प्रतिशत लागू करना चुनौतीपूर्ण काम है। बैंक की शर्तों को पूरा करने में या दस्तावेजों को लाने में आवेदकों को कुछ समय लग सकता है। चूँकि, लोन खाते के एनपीए होने पर दोषी बैंककर्मी ही होते हैं और इसके लिये उन्हें सजा भी दी जाती है। इसलिये, लोन देने में उनके द्वारा सावधानी बरतना स्वाभाविक है।

सच कहा जाये तो देश में फिलवक्त ईमानदार कारोबारियों की भारी कमी है। अधिकांश कारोबारी लोन लेकर बैंकों का पैसा हजम करना चाहते हैं, जिसके लिये वे अक्सर नकली दस्तावेजों का सहारा लेते हैं। इस पोर्टल का काला कारोबारी दुरूपयोग न कर सकें, इसके लिये सरकार को कुछ पुख्ता इंतजाम करने होंगे, ताकि अधिक से अधिक वास्तविक कारोबारी इस योजना का लाभ ले सकें।

बहरहाल कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 59 मिनट में एमएसएमई कारोबारियों को 1 करोड़ रूपये तक के लोन देने की घोषणा में कहीं भी अतिशयोक्ति नहीं है, लेकिन इसके लिये कारोबारियों को भी बैंक के समक्ष पारदर्शितापूर्ण ढंग से पेश आना होगा।

बैंक का मुख्य कारोबार जमा लेना और कर्ज देना ही है, लेकिन अधिकांश कारोबारी आजकल बैंक को पैसा कमाने का सबसे आसान जरिया समझने लगे हैं, जिससे उन्हें बाज आना चाहिए। अगर वास्तविक एमएसएमई कारोबारी इस योजना का लाभ लेते हैं तो निश्चित रूप से इससे बैंक और आम आदमी का भला होगा और अर्थव्यवस्था भी तेजी से मजबूती की ओर अग्रसर होगी।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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