जीसैट-29 : दुश्मन देशों के समुद्री जहाजों पर अब आसमान से नजर रखेगा भारत

देखा जाए तो हाल के कुछ सालों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने तेजी से तरक्की की है। 2014 के सितम्बर में भेजा गया मंगलयान हो या स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली विकसित करने हेतु प्रक्षेपित उपग्रह हों अथवा देश के साथ-साथ विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण करना हो, इन तमाम बातों से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का ही पता चलता है।

अभी पिछले साल की ही बात है जब एक ही बार में 104 सेटेलाइट्स सफलतापूर्वक लांच करके भारत ने इतिहास रचा था और अपनी काबिलियत का लोहा सम्पूर्ण विश्व में मनवाया था। इस सफलता के बाद हम उन चंद देशों की सूची में शामिल हो गये हैं, जिनका खुद का सेटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। उसी क्रम में आगे बढ़ते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पुनः देश को गौरवान्वित होने का अवसर दिया है।

इसरो ने गाजा तूफान के खतरे की आशंकाओं के बीच बड़ी सफलता प्राप्त करते हुए आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के नवीनतम संचार उपग्रह जीसैट-29 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। यह श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ 67वां और भारत का 33वां संचार सैटेलाइट है। इसे इसरो ने ‘जीएसएलवी एमके 3-डी2’ रॉकेट के माध्यम से सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया है, जिसका वजन करीब 3,423 किलोग्राम है और इसे 10 साल के मिशन काल के लिहाज से डिजाइन किया गया है।

सांकेतिक चित्र (साभार : आईनेक्स्ट)

इसे इसके भारी भरकम वजन और शक्ति के कारण बाहुबली की संज्ञा दी गई है। ज्ञातव्य हो कि यह सेटेलाइट जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों के दुर्गम क्षेत्रों में हाई स्पीड इंटरनेट और मोबाइल कम्युनिकेशन की सुविधा मुहैया कराएगा। यह प्रक्षेपण महत्वपूर्ण इसलिए भी है, क्योंकि यह महत्वाकांक्षी ‘चंद्रयान-2’ अभियान और देश के ‘मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन’ की नींव डालेगा।

इसके अलावा इस उपग्रह में यूनिक किस्म का हाई रिजॉल्यूशन कैमरा भी लगाया गया है जिसे ‘जियो आई’ नाम दिया गया है, जिसकी मदद से हिंद महासागर में दुश्मन देशों के जहाज़ों की संदिग्ध गतिविधियों को ट्रैक करने में यह खासा मददगार होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इसरो की पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं और कहा कि इससे देश के दूर दराज के इलाकों में संचार की समस्याओं का निदान होगा।

यह उपग्रह मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के लिए भी आवश्यक सिद्ध होगा। इसरो के प्रमुख के. सिवन ने इस पर कहा कि चंद्रयान के साथ रॉकेट का प्रथम ऑपरेशनल मिशन जनवरी 2019 में होने जा रहा है। वहीं, यह शानदार यान अब से तीन साल में मानव को अंतरिक्ष में ले जाने वाला है। सिवन के मुताबिक इसरो ने अंतरिक्ष में देश के महत्वाकांक्षी मानवयुक्त मिशन को 2021 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा है। जबकि प्रथम मानव रहित कार्यक्रम ‘गगनयान’ की योजना दिसंबर 2020 के लिए है।

इस नए रॉकेट को तैयार करने में 15 साल का वक्त लगा है और इसरो के मुताबिक महज 16 मिनट में ही जीएसएलवी एमके 3-डी2 रॉकेट ने जीसैट-29 उपग्रह को पृथ्वी से लगभग 36 हज़ार किलोमीटर दूर स्थित कक्ष में स्थापित कर दिया। यह उपग्रह देश के लिए अति महत्वपूर्ण साबित होने वाला है, क्योंकि इसके द्वारा हम संचार की दिशा में तो प्रगति करेंगे ही, साथ ही भविष्य में भी हम अत्याधुनिक उपग्रह छोड़ने में सफल होंगे। इसरो की माने तो जीसैट-29 उपग्रह के सफल प्रक्षेपण से दुनिया में भारत का दबदबा आने वाले दिनों में और बढ़ेगा।

देखा जाए तो हाल के कुछ सालों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने तेजी से तरक्की की है। 2014 के सितम्बर में भेजा गया मंगलयान हो या स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली विकसित करने हेतु प्रक्षेपित उपग्रह हों अथवा देश के साथ-साथ विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण करना हो, इन तमाम बातों से अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का ही पता चलता है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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