मोदी सरकार के प्रयासों से भारत की तरफ आकर्षित हो रहीं बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ

सरकार देश की आर्थिक एवं कारोबारी माहौल में सुधार लाने की कोशिश कर रही है, ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारत पर भरोसा बढ़ सके। सरकार के प्रयासों के कारण ही कारोबार सुगमता के मामले में भारत ने हाल ही में एक लंबी छलांग लगाई है। फिलवक्त, भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ग्लोबल इनहाउस इकाइयों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जो भारत के प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। माना जा रहा है कि इनके आने से डिग्रीधारी इंजीनियरों को तो रोजगार मिलेगा ही साथ ही साथ डिग्री विहीन हुनरमंदों के लिये भी रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भारत के कुछ इंजीनियरिंग संस्थानों में छात्रों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मुहैया कराई जा रही है, जिनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है। इसी वजह से आईआईटी में प्लेसमेंट प्रक्रिया के दौरान जैगुआर लैंड रोवर, अल्फांसो इंक और एथर एनर्जी जैसी बड़ी कंपनियां छात्रों को बड़े नौकरी के प्रस्ताव दे रही हैं। दिसंबर से शुरू हुए पहले चरण में पिछले साल के मुकाबले अधिक संख्या में नियोक्ता आये हैं। 

आईआईटी मद्रास में स्नातक छात्रों के लिये प्लेसमेंट प्रक्रिया के पहले दौर में 326 कंपनियों ने आने की सहमति दी है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 270 कंपनियां आई थीं। प्लेसमेंट प्रक्रिया के दूसरे दौर की तैयारियां जनवरी के अंत में शुरू होंगी। आईआईटी मद्रास में इस बार अलग-अलग पाठ्यक्रमों और विभागों के 1,300 से अधिक छात्रों ने प्लेसमेंट के लिए नामांकन कराया है।

सांकेतिक चित्र (साभार : Techcrunch.com)

माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऐपल, गोल्डमैन सैक्स और एमेजॉन समेत दूसरी कंपनियों द्वारा दिये  जाने वाले अंतरराष्ट्रीय पैकेज में बढ़ोतरी की संभावना है। पिछले वर्ष आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट सबसे आगे रही थी और कंपनी ने 2.14 लाख डॉलर, रूपये में लगभग 1.39 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था। आईआईटी मद्रास में इस साल प्लेसमेंट सत्र में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, गोल्डमैन सैक्स, मैंकिंजी, इंटेल आदि कंपनियां आ रही हैं।

आईआईटी दिल्ली में पहले चरण के प्लेसमेंट के लिए 30 कंपनियां 500 नौकरी प्रस्तावों के साथ आ रही हैं। इस बार यूरोपीय और एशियाई कंपनियां भी वैश्विक पदों के लिए संस्थान में आ रही हैं। आईआईटी गुवाहाटी के प्लेसमेंट के पहले चरण में 250 से अधिक छात्रों ने नामांकन कराया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है।

कंसल्टिंग फर्म जिनोवा ने एक अध्ययन में पाया है कि भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इंजीनियरिंग, अनुसंधान व विकास केंद्रों की संख्या 2016 में 943 के मुकाबले 2017 में बढ़कर 976 हो गई। इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 1,005 तक पहुंचने का अनुमान है। महत्वपूर्ण यह है कि इनमें से 60 प्रतिशत से ज्यादा बहुराष्ट्रीय कंपनियां अमेरिका की हैं, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसा नहीं चाहते हैं। इससे साफ हो जाता है कि कारोबार के लिये बहुराष्ट्रीय कंपनियां कोई भी समझौता नहीं करना चाहती हैं।

आईआईटी खड़गपुर में 362 से अधिक कंपनियां पहले ही पंजीकृत हैं और छात्रों के पास 618 से अधिक क्षेत्रों में नौकरी करने का मौका है। छात्रों को पहले दिन यानी 1 दिसंबर को 256 को पूर्व-नियुक्ति प्रस्ताव और करीब 150 को नवीनतम प्रस्ताव मिला।क्वालकॉम और माइक्रोसॉफ्ट ने सबसे अधिक 21 लोगों को नौकरी दी है, जिनमें 12 अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव शामिल हैं। इसमें से छह मरकरी, जापान और चार माइक्रोसॉफ्ट से है।

दरअसल, धीरे-धीरे सूचना एवं प्रौद्योगिकी, उद्योगों की धुरी बन रही है। लिहाजा, इंजीनियर सभी कंपनियों के अभिन्न अंग बनते जा रहे हैं। चूँकि,भारत में अनिवार्य कौशल वाले इंजीनियर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं, इसलिये बहुराष्ट्रीय कंपनियां उन्हें मनचाही नौकरी दे रही हैं। अधिकांश नौकरी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भारत स्थित इकाईयों में दी जा रही है। ऐसी इकाइयों को ग्लोबल इनहाउस सेंटर्स कहा जाता है।

सांकेतिक चित्र (साभार : Indiaeducation.net)
इन इकाइयों में कर्मचारियों की संख्या में प्रति वर्ष 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। यहाँ वर्ष 2016 में कर्मचारियों की संख्या 3 लाख 43 हजार थी, जो वर्ष 2017 में बढ़कर 3 लाख 96 हजार पर पहुंच गई, जिसके इस वर्ष 4 लाख 45 हजार होने का अनुमान है। ये इकाइयां  भारत की सूचना एवं प्रौद्योगिकी उद्योग में शानदार वेतन देने वाले संस्थानों के तौर पर उभरकर सामने आई हैं।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने इन ग्लोबल इनहाउस इकाइयों पर आधारभूत संरचना एवं वेतन के मदों पर वर्ष 2016 में 13 अरब डॉलर, रूपये में तकरीबन 9.33 खरब रुपये और वर्ष 2017 में 15 अरब डॉलर, रूपये में लगभग 10.76 खरब रुपये खर्च किये। भारत में ग्लोबल इनहाउस इकाइयां  स्थापित करने वाले एशियाई देशों की कंपनियों की संख्या में भी अब इजाफा हो रहा है। वर्ष 2017 में सिंगापुर की कंपनी ग्रैब टैक्सी और चीन की कंपनी ग्रेट वॉल मोटर ने भारत में अपनी-अपनी इकाइयां बनाई हैं।

देखा जाये तो बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारत की तरफ आकर्षित होने का सबसे बड़ा कारण यहाँ प्रतिभाशाली इंजीनियरों का होना है। नेटफ्लिक्स, डिजनी जैसी कंपनियां भी टेलिकॉम, मीडिया एवं मनोरंजन के क्षेत्र में भारत में अपनी इकाईयां शुरू करने वाली हैं। डेलॉयट और अंर्स्ट ऐंड यंग जैसी पेशेवर कंपनियां विश्लेषणात्मक उत्पाद बना रही हैं।ये सभी कंपनियाँ भारतीय इंजीनियरों की भर्ती करना चाहती है, क्योंकि भारतीय इंजीनियरों का प्रदर्शन हर जगह बहुत ही बढ़िया है।

आज शिक्षा का अर्थ सिर्फ रोजगार हासिल करना नहीं है। शिक्षा का अर्थ एक सुशिक्षित समाज का निर्माण करना है। आज जरूरत लोगों को अक्षर ज्ञान कराने के साथ-साथ उनके अंदर में मौजूद हुनर को निखारने की है। हुनरमंद लोगों के लिए रोजगार का अकाल नहीं है। यदि किसी के पास रोजगार नहीं है तो वह स्व-रोजगार के माध्यम से जीवनयापन कर सकते हैं। कुछ लोगों ने अपने हुनर की बदौलत जीवन में सर्वोच्च को हासिल भी किया है।

सरकार देश की आर्थिक एवं कारोबारी माहौल में सुधार लाने की कोशिश कर रही है, ताकि बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भारत पर भरोसा बढ़ सके। सरकार के प्रयासों के कारण ही कारोबार सुगमता के मामले में भारत ने हाल ही में एक लंबी छलांग लगाई है।फिलवक्त, भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों और ग्लोबल इनहाउस इकाइयों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जो भारत के प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। माना जा रहा है कि इनके आने से डिग्रीधारी इंजीनियरों को तो रोजगार मिलेगा ही साथ ही साथ डिग्री विहीन हुनरमंदों के लिये भी रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

बदले परिवेश में नामचीन वैश्विक संस्थानों में भारतीय छात्रों की मांग बढ़ रही है। हुनरमंद युवा स्व-रोजगार शुरू कर सकें, इसके लिये सरकार ने मुद्रा योजना का आगाज किया है, जिसके तहत लाखों की संख्या में युवाओं को रोजगार एवं स्व-रोजगार मिल रहा है। इसके अलावा भी सरकार युवाओं के कौशल को बढ़ाने के लिये योजना चला रही है। कहा जा सकता है कि सरकार के प्रयासों से देश में रोजगार एवं स्व-रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसंधान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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