नए भारत के निर्माण का रोडमैप है नीति आयोग का रणनीतिक दस्तावेज़

बिना सोच और सुनियोजित नीति के देश में बदलाव नहीं आ सकता है। ऐसे में रणनीतिक दस्तावेज को आम आदमी के सपने की संज्ञा दी जा सकती है। मोदी सरकार देश में खुशहाली लाने का सपना देख रही है। अगर सरकार योजनाबद्ध तरीके से रणनीतिक दस्तावेज में सुझाये गये उपायों को अमल में लाने में कामयाब होती है तो निश्चित रूप से देश जल्द ही और भी तेजी से प्रगति पथ पर अग्रसर होगा।

नीति आयोग ने अपने रणनीतिक दस्तावेज में 2022-23 तक हर साल 8 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने का लक्ष्य रखा है। आयोग चाहता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को 4 लाख करोड़ डॉलर का बनाया जाये और सरकार 8 प्रतिशत की जगह सीधे 9 प्रतिशत के विकास दर को पाने के लिये कोशिश करे।  

जाहिर है, इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सरकार को शिद्दत से कोशिश करनी होगी। हालाँकि, वित्त वर्ष 2015-16 में 8 प्रतिशत के वृद्धि दर को हासिल किया जा चुका है। लिहाजा, विगत 4 सालों में किए गये आर्थिक सुधारों को देखते हुए नीति आयोग के अनुमानों को अतिरंजना पूर्ण नहीं कहा जा सकता है।    

साभार : प्रभासाक्षी

रणनीतिक दस्तावेज़ को पेश करने से पहले नीति आयोग ने 2107-18 से 2019-20 के लिए तीन वर्षीय कार्ययोजना जारी किया था, लेकिन इनसे सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को नहीं हासिल किया जा सकता था। इसलिये, अब पंचवर्षीय योजना की जगह नीति आयोग ने  न्यू इंडियाके सपने को साकार करने के लिये रणनीतिक दस्तावेज पेश किया है।

इसके  अनुसार निवेश को जीडीपी के मौजूदा 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 2022-23 तक 36 प्रतिशत किया जायेगा। इस महती कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिये सरकार बुनियादी क्षेत्रों में निवेश करेगी। इस वृद्धि दर के लक्ष्य को पाने के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्यात को मौजूदा 478 अरब डॉलर से बढ़ाकर 800 अरब डॉलर करने का लक्ष्य भी सरकार ने रखा है।

कृषि की अड़चनों को दूर करने, किसानों को कृषक उद्यमी बनाने, श्रम कानूनों को संहिता का रूप देने तथा उद्यमियों के कारोबार को आगे बढ़ाने के लिये सहयोग एवं सहायता मुहैया कराने वाले कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिये जाने का प्रस्ताव है।  

रणनीतिक दस्तावेज में 2022-23 तक मुद्रास्फीति को 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुद्रास्फीति कम रहने पर देश में विकासात्मक कार्यों को बढ़ावा दिया जा सकेगा और आम आदमी भी महंगाई डायन के चंगुल से आजाद रह सकता है। इसी क्रम में माल ढुलाई बढ़ाने एवं रेल विकास प्राधिकरण को स्थापित करने का प्रस्ताव भी दस्तावेज़ में किया गया है।

रणनीतिक दस्तावेज में कृषि क्षेत्र के लिए कर्ज माफी या आय के प्रत्यक्ष हस्तांतरण योजना का उल्लेख नहीं किया गया है। सरकार का मकसद कृषि ऋण को माफ करने के बजाय किसानों की समस्याओं को दूर करना है। अस्तु, किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 2015-16 से 2022-23 के दौरान कृषि क्षेत्र में 10.4 प्रतिशत के विकास दर को हासिल करने की दिशा में सरकार हर संभव प्रयास करेगी।

दस्तावेज में एपीएमसी कानूनों में संशोधन करने की बात कही गई है, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। सरकार चाहती है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य की जगह न्यूनतम आरक्षित मूल्य की अवधारणा देश में लाई जाये। इससे किसानों को उनकी उपज की वास्तविक कीमत मिल सकेगी।

रणनीतिक दस्तावेज़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बदलाव लाकर उसे मौसम आधारित बीमा योजना में तब्दील करने की बात कही गई है। इससे फसल बर्बाद होने पर किसानों को वाजिब मुआवजा मिल सकेगा। विभिन्न मंडियों में नीलामी की पारदर्शी व्यवस्था करने की भी सरकार कोशिश करेगी, ताकि किसानों का बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके।   

साभार : आउटलुक हिंदी

सभी सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप में ग्राम पंचायत स्तर तक पहुंचाने कोशिश होगी। रणनीतिक दस्तावेज में 1,50,000 स्वास्थ्य और वेलनेस सेंटर के साथ “आयुष्मान भारत” कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू कराने की बात कही गई है। शहरी क्षेत्रों में सस्ते आवास के लिए आने वाले वर्षों में सरकार सब्सिडी के माध्यम से आम आदमी के घर के सपने को पूरा करने की कोशिश करेगी। सरकार चाहती है कि रणनीतिक दस्तावेज के बाद दृष्टि पत्र जारी किया जाये। इसमें अगले 15 सालों के लिए भारत की विकास की गति का खाका खींचा गया है।  

रणनीतिक दस्तावेज में कहा गया है कि वैश्विक व्यवहार के मुताबिक किसी कामगार की सेवा समाप्त होने पर उसे मुआवजा देने की व्यवस्था की जाये। सरकार को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 का दायरा बढ़ाकर इसमें सभी तरह के रोजगारों को शामिल करना चाहिये। कामगारों को चेक या आधार के माध्यम से वेतन का भुगतान करना चाहिये। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के पहले चरण को यथाशीघ्र पूरा किया जाना चाहिए, ताकि आम आदमी को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके। दस्तावेज़ में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई को दोगुनी कर 2022-23 तक 2 लाख किलोमीटर तक बनाने का लक्ष्य भी रखा गया है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि 2018-19 से 2022-23 तक औसतन सालाना 8 प्रतिशत की वृद्धि दर का लक्ष्य हासिल करना मुमकिन है, लेकिन इसके लिये सरकार को देश में समावेशी विकास करने की दिशा आगे बढ़ना होगा। निवेश को 29 प्रतिशत से बढ़ाकर 36 प्रतिशत करने के लिये सरकार को नीतिगत माहौल बनाना होगा साथ ही साथ कारोबारी एवं सरकार दोनों को मामले में सकारात्मक तरीके से काम करना होगा।  

वित्त मंत्री अरुण जेटली के अनुसार ठोस आर्थिक एवं सामाजिक नीति बनाकर गरीबी उन्मूलन के लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है। उनके अनुसार ठोस नीति अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला सकती है। लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने पर स्वतः गरीबी दूर हो जायेगी। जेटली ने कहा कि हमने जो तरीका अख्तियार किया है, उसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं। वित्त मंत्री के अनुसार रणनीतिक दस्तावेज का लक्ष्य जीडीपी की वृद्धि दर को 8 प्रतिशत करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य देश को 2030 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थवव्यवस्था की ओर ले जाना है।

नीति आयोग के अनुसार देश में डिजिटलीकरण को मूर्त देने के लिये ब्राडबैंड कनेक्टिविटी, डिजिटल पहुँच तथा साक्षरता की समस्याओं से पार पाने एवं साइबर सुरक्षा मसौदे को मजबूत करने की जरूरत है। दस्तावेज़ में 2022-23 तक डिजिटल क्षेत्र में असमानता दूर करने के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचा की अहमियत को रेखांकित किया गया है।

रणनीतिक दस्तावेज़ में सड़क क्षेत्र के लिए सार्वजनिक वाहनों के बेड़े का विस्तार, राजमार्ग नेटवर्क एवं सड़क क्षमता को बढ़ाने, बेहतर अनुपालन के लिए नियामकीय मसौदे में सुधार आदि सुझाव दिये गये हैं। बिजली क्षेत्र के सुधार के लिए स्मार्ट ग्रिड को बढ़ावा देने, बिजली की नीलामी, बिजली वितरण कंपनियों का निजीकरण, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के जरिये सब्सिडी का भुगतान तथा बिजली आपूर्ति के लिए 100 प्रतिशत मीटर लगाने के सुझाव दिये गये हैं। 

साफ है, बिना सोच और सुनियोजित नीति के देश में बदलाव नहीं आ सकता है। ऐसे में रणनीतिक दस्तावेज को आम आदमी के सपने की संज्ञा दी जा सकती है। मोदी सरकार देश में खुशहाली लाने का सपना देख रही है। अगर सरकार योजनाबद्ध तरीके से रणनीतिक दस्तावेज में सुझाये गये उपायों को अमल में लाने में कामयाब होती है तो निश्चित रूप से देश जल्द ही और भी तेजी से प्रगति पथ पर अग्रसर होगा।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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