राहुल गांधी की किसान-कल्याण की सुई कर्जमाफी से आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

तीन राज्यों की जीत के जोश में कर्जमाफी के जरिये ही कांग्रेस 2019 की सत्ता का भी संधान करने की कोशिश में लग चुकी है। किसानों का कल्याण कांग्रेस के लिए कोई विषय नहीं है। अगर होता तो वो कर्जमाफी की पिपिहरी बजाने की बजाय किसानों के हित के लिए अपना कोई कारगर विज़न प्रस्तुत करती।

कर्जमाफी के लोकलुभावन मुद्दे पर तीन राज्यों के चुनावों में जीत करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को जैसे कर्जमाफी के अलावा और कुछ दिख ही नहीं रहा। गत दिनों उन्होंने कहा कि जबतक प्रधानमंत्री पूरे देश का कर्ज माफ़ नहीं करते, वे उन्हें सोने नहीं देंगे। इस बात से संकेत यही निकलता है कि लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी कर्जमाफी को मुद्दा बनाने वाले हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की किसान कल्याण की सुई कर्जमाफी से आगे क्यों नहीं बढ़ रही?

गौरतलब है कि 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने कर्जमाफी को मुद्दा बनाया था और उसे जीत भी मिली थी, लेकिन इससे किसानों की दशा में कोई बदलाव नहीं आया। उनकी बदहाली बढ़ती ही गयी। ये तो नहीं कह सकते कि कर्जमाफी एकदम ही गलत है, लेकिन जरूरत से इतर केवल वोट बटोरने के लिए हर चुनाव में इसका इस्तेमाल ठीक नहीं है। हालांकि हर हाल में कर्जमाफी महँगी पड़ने वाली एक फौरी राहत ही होती है, कोई स्थायी समाधान नहीं। किसानों का भला कर्जमाफी से नहीं, बल्कि उनको इस रूप में मजबूत करने से हो सकता है कि वे समय पर कर्ज चुका सकें।   

अभी कर्जमाफी का शिगूफा उछाल बड़े किसान हितैषी बन रहे राहुल गांधी को बताना चाहिए कि 2014 से पूर्व के दस सालों में कांग्रेस सरकार ने किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में क्या किया? किसानों की दशा क्यों इतनी बिगड़ गयी कि 2008 में कांग्रेस को पूरे देश के किसानों का कर्ज माफ करना पड़ा? और 2008 की कर्जमाफी के बाद भी यदि आज किसानों की दशा बुरी ही है, तो फिर वे किस आधार पर प्रधानमंत्री से किसानों का कर्ज माफ़ करने की मांग कर रहे? जाहिर है, इन सवालों का कोई ठोस उत्तर कांग्रेस नेताओं के पास नहीं होगा।  

मोदी सरकार की बात करें तो उसने किसानों को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। जिस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने को लेकर अक्सर शोर मचता रहता है, उसकी ज्यादातर सिफारिशें मोदी सरकार लागू कर चुकी है। जैसे कि किसानों को उपज का डेढ़ गुना मूल्य देना, किसानों को बढ़िया बीज उपलब्ध कराना, प्राकृतिक आपदाओं से हुई हानि से किसानों को बचाने के लिए फसल बीमा योजना लाना आदि जो पहलें मोदी सरकार ने की हैं, ऐसी ही सिफारिशें स्वामीनाथन आयोग भी कर चुका है।

इसके अलावा नीम कोटेड यूरिया, किसान चैनल, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसे क़दमों से भी इस सरकार ने किसानों की मजबूती देने की कोशिश की है। ये बात ठीक है कि किसानों की समस्याएँ बहुत अधिक हैं और उन्हें मजबूत करने के लिए अभी और बहुत कुछ करने की जरूरत है, जिस दिशा में सरकार सक्रिय है।

लेकिन कांग्रेस की नज़र में ये सब कुछ नहीं है, उसके लिए किसानों की समस्याओं का समाधान बस कर्जमाफी ही है। वास्तव में कांग्रेस को किसान हितों से कोई सरोकार ही नहीं है, उसे केवल सत्ता से सरोकार है। तीन राज्यों की जीत के जोश में कर्जमाफी के जरिये ही वो 2019 की सत्ता का भी संधान करने की कोशिश में लग चुकी है। किसानों का कल्याण कांग्रेस के लिए कोई विषय नहीं है। अगर होता तो वो कर्जमाफी की पिपिहरी बजाने की बजाय किसानों के हित के लिए अपना कोई कारगर विजन प्रस्तुत करती।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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