आखिर क्यों विशेष है इस बार का कुम्भ आयोजन?

भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश देती है। कुम्भ देश की विविधता एवं समृद्ध संस्कृति को सीखने, जानने और समझने का अवसर है। कुम्भ के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को विभिन्न प्रदेशों की अनेक कलायें देखने को मिलेंगी। कुम्भ का शुभारम्भ मकर संक्रांति से होगा, परन्तु आज की झलकी उसकी भव्यता का परिचायक है। भारत का सांस्कृतिक वैभव देखना है तो कलाग्राम उसका प्रमाण है।

प्रत्येक सरकार अपने स्तर से कुंभ मेले की तैयारियां करती है। लेकिन इस बार तैयारियों के साथ आस्था का भी समावेश हुआ है। योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में चली तैयारियों में ऐसा होना भी था। योगी का दावा है कि पचास वर्षों में पहली बार तीर्थयात्रियों को इतना शुद्ध जल स्नान हेतु मिलेगा। पहली बार तीर्थयात्री पौराणिक अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन कर सकेंगे।

सांकेतिक चित्र 

ये बात अलग है कि सरकारी मशीनरी के माध्यम से अनेक निर्माण कार्य चलाये जाते हैं। तीर्थयात्रियों  को समुचित सुविधा मिले, असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके प्रयास किये जाते हैं। लेकिन इस बार प्रयागराज कुंभ की तैयारियां बिल्कुल अलग ढंग की हैं।  तैयारियों में आस्था का समावेश हुआ है। इसे अब प्रत्यक्ष रूप में देखा जा सकता है।

दस जनवरी को राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कई केंद्रीय व प्रदेश सरकार के मंत्री प्रयागराज में थे। इससे भी अनुमान लगाया जा सकता है कि वर्तमान सरकार कुंभ के प्रति कितनी आस्थावान है। तैयारी तो बिना आस्था के भी हो सकती है। लेकिन जब आस्था जुड़ी होती है, तब पूरा माहौल ही बदल जाता है। 

राम नाईक ने प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के कलाग्राम परिसर का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी यहां की तैयारियों का निरीक्षण किया।  राम नाईक ने कलाग्राम परिसर में ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ कार्यक्रम का द्वीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ किया, जिसमें विभिन्न प्रदेशों के लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की सामूहिक प्रस्तुति दी।

इसके साथ ही राज्यपाल ने प्रयागराज संग्रहालय में प्रवेश हेतु कुम्भ मेला दो हजार उन्नीस के विशेष टिकट का लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि कुम्भ देश की संस्कृति एवं आध्यात्मिकता का प्रतीक है। सरकार कुम्भ के भव्य आयोजन के लिये वृहद् स्तर पर व्यवस्था कर रही है। कुम्भ पर्व पर देश एवं विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को इस कलाग्राम  में भारतीय लोक-संस्कृति से परिचित होने का अवसर मिलेगा। कुम्भ केवल भारत का ही नहीं बल्कि विश्व का पर्व है। यूनेस्को ने कुम्भ को मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की संज्ञा दी है।

सरकार ने प्रयागराज एवं अयोध्या का पौराणिक नाम पुनःस्थापित किया है जो स्वयं अपनी पहचान बताती है। सरकार ने कुम्भ के अवसर पर अक्षयवट  एवं सरस्वती कूप को श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला है जिसे केवल भारत ही नहीं बल्कि विदेश के लोग भी देखने आयेंगे।

भारतीय संस्कृति ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश देती है। कुम्भ देश की विविधता एवं समृद्ध संस्कृति को सीखने, जानने और समझने का अवसर है। कुम्भ के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को विभिन्न प्रदेशों की अनेक कलायें देखने को मिलेंगी। कुम्भ का शुभारम्भ मकर संक्रांति से होगा, परन्तु आज की झलकी उसकी भव्यता का परिचायक है। भारत का सांस्कृतिक वैभव देखना है तो कलाग्राम उसका प्रमाण है।

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने कुम्भ को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाकर भारत की विशिष्ट पहचान बनायी है। प्रयागराज को उसका प्राचीन नाम दिलाने में राज्यपाल राम नाईक का महत्वपूर्ण योगदान है। कलाग्राम में विभिन्न प्रदेशों से आये पन्द्रह सौ कलाकार अपनी कला से कुम्भ को यादगार बनायेंगे। कुम्भ के दिव्य एवं भव्य आयोजन हेतु केन्द्र एवं राज्य सरकार संकल्पबद्ध हैं।

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पन्द्रहवें अप्रवासी भारतीय सम्मेलन में आए प्रवासी कुम्भ में आयेंगे।  ये  टेंट सिटी में ही प्रवास करेंगे। यह पहला अवसर होगा जब विशिष्ट विदेशी मेहमान इतने औपचारिक रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। पिछले महीने इकहत्तर देशों के राजदूत मेला क्षेत्र के भ्रमण हेतु आये थे। शुद्ध जल के लिये गंगोत्री से लेकर प्रयागराज तक गंदे नालों को गंगा में गिरने से रोका गया था।

योगी ने तैयारियों के रिपोर्ट कार्ड की जानकारी दी। पन्द्रह  फ्लाईओवर, अण्डर ब्रिज बने, दो सौ चौसठ सड़कों का चौड़ीकरण हुआ है। चौराहों का भी चौड़ीकरण और सौन्दर्यीकरण किया गया है। मेला क्षेत्र का एरिया पहले के मुकाबले बढ़ाया गया है, बाइस पान्टून ब्रिज बनाए गए, 

करीब सवा  लाख शौचालय बनाये गए,  बीस हजार से ज्यादा डस्टबिन मेला क्षेत्र में रखे गए हैं,  दस हजार श्रद्धालुओं की क्षमता का गंगा पंडाल बनाया गया है,  चार सांस्कृतिक पंडाल बनाये गए हैं,  बीस  हजार श्रद्धालुओं के मेला क्षेत्र में रुकने की व्यवस्था की गई है।  इसके अलावा तेराह सौ हेक्टेयर में चौरानवे पार्किंग स्थल  बनाये गए हैं। 

पहली बार पांच सौ से अधिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरे मेला क्षेत्र में होंगे,  पेंट माई सिटी में पन्द्रह  लाख वर्ग फीट में दीवारें पेंट की गई हैं। इसमें संदेह नहीं कि इस बार कुंभ मेले की तैयारियां अद्भुत, आकर्षक और बेजोड़ हैं। इसका अनुभव सभी तीर्थ यात्रियों को होगा।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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