संसद में मोदी ने जो कहा है, उसकी गूँज दूर तक जाएगी!

पिछले दिनों अपनी सरकार के अंतिम संसदीय भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में जो कुछ कहा, उसकी गूँज बड़ी दूर और देर तक सुनाई देगी। इसमें न केवल सरकार की उपलब्धियों का तथ्यवार वर्णन है, बल्कि विपक्ष पर जोरदार हमला भी है। आने वाले महीनों में चुनाव प्रचार के दौरान भी इस भाषण का असर रहेगा।

बीते दिनों संसद के बजट सत्र का समापन हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना महत्‍वपूर्ण भाषण दिया। भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल का यह अंतिम भाषण था, इसलिए भी इसका विशेष महत्‍व था। इसमें उन्‍होंने न केवल विपक्ष के समय-समय पर लगाए जाने वाले आरोपों का सिलसिलेवार, तथ्‍यपरक जवाब दिया बल्कि मौजूदा सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष के व्‍यक्तिगत प्रहारों का भी जमकर पलटवार किया।

प्रधानमंत्री के भाषण में गौर करने योग्‍य बात यह थी कि यह भाषण आम भाषणों से कुछ अलग था। हालांकि मोदी जी ने अपनी चिर-परिचित ओजस्‍वी शैली में संबोधन दिया लेकिन उनका भाषण इस बार कुछ आक्रामक और आत्‍मविश्‍वास से लबरेज रहा। आमतौर पर प्रधानमंत्री इस प्रकार की आक्रामकता कम और रचनात्‍मकता, संवेदनशीलता अधिक दर्शाते हैं, लेकिन इस बार विपक्ष के बेसिर पैर के आरोपों को सिरे से नकारने के लिए उन्‍होंने कुछ अलग शैली दिखाई।

अपने धारदार भाषण में उन्‍होंने उन सभी सतही आरोपों को निराधार साबित कर दिया जो विपक्ष द्वारा उन पर लगाए जाते रहे हैं। यह एक ऐसा भाषण था जिसमें उन्‍होंने बहुआयामी अभिव्‍यक्ति की। बहुआयामी इस अर्थ में कि उन्‍होंने भाजपा सरकार के किए गए कार्यों के अलावा आगे की कार्ययोजना पर भी प्रकाश डाला और साथ ही कांग्रेस के वंशवाद को भी आड़े हाथों लिया।

रोजगार से अपनी बात का आरंभ करते हुए उन्‍होंने संगठित क्षेत्र में रोजगार के अवसर की बात कही। जबसे भाजपा सरकार सत्‍ता में आई है तब से ही प्रधानमंत्री देश व विदेश के मंचों पर मेक इन इंडिया का नारा बुलंद करते रहे हैं। यह बात अलग है कि विपक्ष उनके रोजगारो न्‍मुखी चिंतन पर सदा सवाल उठाता रहा है। विपक्ष के इन आरोपों का पीएम ने तथ्‍यपरक जवाब दिया।

आयकर, पेंशन और पीएफ में इजा़फा

उन्‍होंने बताया कि सितंबर 2017 से लेकर नवंबर 2018 के बीच करीब पौने दो लाख लोग ऐसे हैं जिनका पीएफ पहली बार कटना शुरू हुआ। इनमें भी अधिकांश लोग ऐसे हैं जिनके जीवन में यह नौकरी का पहला अनुभव है। पेंशन योजना के अंतर्गत रजिस्‍ट्रर्ड लोगों की संख्‍या भी पिछले साढ़े चार साल में 65 लाख से बढ़कर सवा करोड़ हो चुकी है।

इन तथ्‍यों से पता चलता है कि नौकरियों का सृजन बड़े पैमाने पर हो रहा है। देश में कारपोरेट क्षेत्र के विस्‍तार से नौकरियां बढ़ी हैं तो आयकर भी बढ़ा है। पीएम मोदी ने बताया कि आयकर रिटर्न की संख्‍या गैर कारपोरेट क्षेत्र से अधिक बढ़ी है। निजी प्रोफेशनल्‍स का इसमें बड़ा योगदान मिला है।

ऑटोमोबाइल और पर्यटन के क्षेत्र में खुले अवसर

ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में भी हुई बिक्री के आंकड़ों को प्रस्‍तुत करते हुए प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि 27 लाख नए ऑटो की बिक्री हुई है, जिससे इस सेक्‍टर में रोजगार के नए अवसर न‍िर्मित हुए हैं क्‍योंकि इस बिक्री से वाहन संचालन और वाहन मरम्‍मत जैसे कार्यों को भी मौका मिला है। चूंकि देश में धार्मिक पर्यटन के अलावा सीजनल पर्यटन की भी अच्‍छी संभावनाएं हैं। इसके चलते मौजूदा सरकार ने पर्यटन पर ध्यान दिया है। परिणामतः इस सेक्‍टर में डेढ़ करोड़ नई नौकरियों की राह खुली है। साथ ही, होटलों की संख्‍या भी 50 प्रतिशत बढ़ी है।

स्‍टार्ट-अप्‍स से बढ़ता स्‍वावलंबन

यदि आपने ‘आपकी अदालत’ नामक टीवी शो का वह एपिसोड देखा है जिसमें पीएम बनने से पूर्व मोदी का साक्षात्‍कार हुआ था, तो आपने गौर किया होगा कि मोदी ने स्‍वयं को गर्व से अहमदाबादी बताते हुए कहा था कि किस प्रकार अवसरों को सदुपयोग किया जाता है। उन्‍हें सदा से नवाचार का शौक रहा है। वे आज से 25 साल पहले भी उस दौर की नई चीजों को पकड़ते थे ताकि समय के साथ चल सकें। उनका यही शगल आज उन्‍हें संसार के अग्रणी राजनेताओं की अग्रपंक्ति में ले आया है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्‍होंने किया भी कुछ ऐसा ही है। उन्‍होंने देश में स्‍टार्ट-अप संस्‍कृति को पंख लगा दिए। अपने संबोधन में उन्‍होंने मुद्रा योजना, स्किल इंडिया, स्‍टार्ट अप इंडिया आदि योजनाओं का उल्‍लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से देश में स्‍व-रोजगार को बढ़ावा मिला है। महानगरों में जहां युवाओं ने स्‍टार्टअप संस्‍कृति को अपनाया है, वहीं गांवों-कस्‍बों में युवाओं ने स्‍वयं का उद्धम आरंभ किया है।

महागठबंधन की जमकर खबर ली, महामिलावट करार दिया

सपा और बसपा के गठबंधन के ऐलान के बाद इसी महीने कोलकाता में विपक्षी दल एकजुट हुए थे और महागठबंधन का माहौल बनाया था। इस घटना के बाद यह पहला अवसर था जब प्रधानमंत्री संसद में इस विषय पर बोल रहे थे। कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी की असभ्‍य भाषण शैली पर भी उन्‍होंने निशाना साधा।

लोकतांत्रिक मूल्‍यों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने स्‍पष्‍ट किया कि लोकतंत्र में आलोचनाओं का अपना स्‍थान है। ऐसे में एक सच्‍चे विपक्ष को आलोचना करना चाहिये लेकिन अफसोस है कि विपक्ष के पास सिवाय असंगत और निराधार बातों के कुछ नहीं है। कांग्रेस पर करारा प्रहार करते हुए उन्‍होंने कहा कि उल्‍टा चोर ही चौकीदार को डांट रहा है। विपक्षी दलों द्वारा बनाए जा रहे महागठबंधन पर भी चुटकी लेते हुए उन्‍होंने कहा कि अब महामिलावट की सरकार बनाने की जुगत भिड़ाई जा रही है।

सदन में गूंजी तालियां

पीएम मोदी की एक और खासियत है कि वे संसद में भाषण पढ़ते समय केवल अपनी बात ही नहीं बोलते बल्कि अक्‍सर पुराने संदर्भ और उद्धरण भी पढ़कर सुनाते हैं और तालियां बटोरते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्‍होंने कहा कि आज कांग्रेस जिस नीति आयोग की अनुशंसाओं को गंभीरता से लिए जाने की वकालत करती है, उसे ही कांग्रेस ने एक समय जोकरों का समूह तक कहा था। उन्‍होंने चुटीले अंदाज़ में यह भी कहा कि कांग्रेस मुक्‍त भारत गांधी जी का सपना था, जिसे मैं पूरा कर रहा हूं।

सब पर इल्‍ज़ाम लगाना ही कांग्रेस का मूल चरित्र

कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाया, सेना का भी अपमान किया। कांग्रेस हर युग में विफल रही है और अपनी विफलता का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़ने की आदत रही है। ताजा उदाहरण ईवीएम का लिया जा सकता है। विपक्ष में हमेशा अपनी नाकामी को सीधे ना स्‍वीकारते हुए ईवीएम पर ही सारा दोष मढ़ा है।

गत 1 फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट के दिन भी बजट पर कोई प्रतिक्रिया ना देते हुए विपक्ष ने ईवीएम की दुहाई दी थी। इस पर प्रधानमंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस अध्‍यक्ष बजट के दिन भी ईवीएम का रोना रो रहे थे। आखिर इस विपक्ष को क्‍या हो गया है।  कांग्रेस को किसी पर भी विश्‍वास नहीं है। ना उन्‍हें न्‍याय पालिका पर विश्‍वास है, ना चुनाव आयोग पर। वह केवल धमकाना और आरोप लगाना ही जानती है।

स्‍वच्‍छता के मुद्दे पर सरकार फ्रंट-फुट पर

2 अक्‍टूबर 2015 से आरंभ हुआ स्‍वच्‍छ भारत मिशन इस सरकार की एक बड़ी सफलता है। स्‍वच्‍छता के मुद्दे पर निश्चित ही मोदी सरकार अग्रणी रही है। अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने 55 साल बनाम 55 महीनों की तुलना करते हुए बताया कि देश में 2014 के बाद से 10 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया है।

गैस और बिजली की सुविधाओं से लैस हुए गांव-गरीब

12 करोड़ गैस के कनेक्‍शन बांटे गए हैं। ऐसे-ऐसे गांवों में बिजली पहुंचाई गई है जहां आजादी के बाद से बिजली नहीं थी। बिजलीकरण में काम में तेजी आई है। बैंकिंग में यह सुधार हुआ है कि अब गरीबों के खाते में सीधे पैसे जमा हो रहे हैं और गैस की सब्सिडी के रूप में मध्‍यस्‍थों का अनुचित मुनाफा खत्‍म हो गया है।

घोटाले बनाम यूपीए शासनकाल

इसमें कोई शक नहीं है कि कांग्रेस ने तो अपने शासन काल में घोटालों का शिखर दौर बना दिया था। कॉमनवेल्‍थ गेम घोटाला, टू जी स्‍पेक्‍ट्रम जैसे बड़े घोटाले महज अपनों को उपकृत करने और अनुचित लाभ पहुंचाने की मंशा से किए गए। इस देश ने पिछले तीन दशकों में मिलावट की सरकारें ही देखी हैं लेकिन अब पहली बार पूर्ण बहुमत से कोई सरकार आई है। पीएम मोदी ने कांग्रेस के भ्रष्‍ट तंत्र को पूरी तरह से उजागर करते हुए बताया कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि देश सशक्‍त हो, मजबूत बने।

यही कारण है कि पिछले 55 साल में बिना दलाली के कोई डील हो ही नहीं पाती थी। वर्ष 2009 में भी भारतीय सेना ने बुलेटप्रूफ जैकेट की मांग उठाई थी लेकिन तत्‍कालीन सरकार ने मंजूर नहीं की। 2014 में सत्‍ता में आने के बाद बीजेपी सरकार ने सेना को यह सौगात दी। रक्षा के सौदों में कांग्रेस ने तो हमेशा दलाली का काम करवाया है। लेकिन अब वे इसलिए घबरा रहे हैं क्‍योंकि हम इन्‍हें उजागर कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के भाषण पर सदन में विपक्ष ने हंगामा करने की नाकाम कोशिश ज़रूर की लेकिन इस बार उनकी एक ना चली।

कुल मिलाकर अपनी इस सरकार के अंतिम भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में जो कुछ कहा है, उसकी गूँज बड़ी दूर और देर तक सुनाई देगी। इसमें न केवल सरकार की उपलब्धियों का तथ्यवार वर्णन है, बल्कि विपक्ष पर जोरदार हमला भी है। आने वाले महीनों में चुनाव के दौरान भी इस भाषण का असर रहेगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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