कैग रिपोर्ट के बाद भी राफेल-राफेल कर रहे राहुल गांधी और कितनी फजीहत कराके चुप होंगे?

यह बात पुनः स्थापित हो गयी है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा बचा नहीं है जिस कारण वह अब देश की सुरक्षा को भी दरकिनार करते हुए सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने में लगी हुई है। सरकार से लेकर सेना, सुप्रीम कोर्ट और अब कैग तक सबने राफेल को बेदाग़ बता दिया है, लेकिन राहुल को किसी पर यकीन नहीं।

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी निरंतर इस कोशिश में लगे रहते हैं कि किस तरह राफेल को बोफोर्से जैसा घोटाला साबित किया जाए। वे लम्बे समय से राफेल पर कैग रिपोर्ट पेश करने की बात कह रहे थे, जो कि आखिर संसद में पेश हो गयी है, जिसमें स्पष्ट है कि यूपीए सरकार के मुक़ाबले मोदी सरकार की राफेल डील 2.86 प्रतिशत सस्ती है। साथ ही वर्तमान सरकार के राफेल समझौते में विमानों की डिलीवरी देश को 5 महीने पहले ही हो जाएगी।

भाजपनीत सरकार के दौर में देश ने राफेल सौदे पर 17.08 प्रतिशत की बचत भी सुनिश्चित की है। लेकिन इसे विडम्बना ही कहेंगे कि जिस कांग्रेस को एक परिवार के अलावा देश की किसी संवैधानिक संस्था पर भरोसा नहीं है और यह पुनः सिद्ध हो गया जब राहुल गांधी ने इसे चौकीदार ऑडिटर जनरल की संज्ञा दे दी। यह बात पुनः स्थापित हो गयी है कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा बचा नहीं है जिस कारण वह अब देश की सुरक्षा को भी दरकिनार करते हुए सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने में लगी हुई है। सरकार से लेकर सेना, सुप्रीम कोर्ट और अब कैग तक सबने राफेल को बेदाग़ बता दिया है, लेकिन राहुल को किसी पर यकीन नहीं।   

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा रक्षा मंत्रालय के एक अधूरे नोट को दिखाकर यह साबित करने का असफल प्रयास किया गया कि तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने राफेल सौदे पर पीएमओ से समानांतर वार्ता करने पर एतराज जताया था। यह अधूरा नोट ‘द हिन्दू’ नाम के अखबार ने छापा था जो कांग्रेस अध्यक्ष की नज़र में आया और तुरंत इस झूठ को प्रेस वार्ता के जरिये प्रसारित करने का कार्यक्रम आरंभ हो गया और शाम तक पूरी कांग्रेस पार्टी के जुबान पर यह झूठ चढ़ चुका था।

क्या अध्यक्ष, क्या सांसद, क्या प्रवक्ता कांग्रेस के सभी नेताओं ने मिलकर इसपर झूठ बेचा। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष समेत पूरी पार्टी की समस्या यह है कि वे चाहते हैं कि बिना किसी प्रमाण के देश की जनता कांग्रेस पार्टी को सही मान ले और चौकीदार को भ्रष्ट?

बहरहाल, कांग्रेस पार्टी की देशविरोधी सोच तो किसी से छिपी नहीं है। जाहिर है, लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ के रूप में कार्य करने वाले पत्रकार ही बिना किसी तथ्य के मनगढ़ंत खबरें छापते हैं और इसी के बलबूते कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करती है।

ज्ञात हो कि कैग की रिपोर्ट आने से पहले जिस नोट का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ताक पर रख दिया और प्रधानमंत्री कार्यालय पर सवाल खड़े कर दिये थे, उसपर भी तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने पीएमओ और रक्षा मंत्रालय के बीच समानांतर वार्ता को सिरे से खारिज कर दिया था।

मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि ‘पीएमओ और फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय राफेल मामले पर सिर्फ निगरानी कर रहा है।’ तत्कालीन रक्षामंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि आखिर क्यों इस बयान को अखबार द्वारा छुपाया जाना आवश्यक था? गौरतलब है कि खुद राफेल सौदे के वार्ताकार एसबीपी सिन्हा ने ही पीएमओ के हस्तक्षेप की बात को खारिज कर दिया, और तो और जिनके कथन का हवाला देकर कांग्रेस पार्टी झूठ बोलने निकली थी, उन्हीं तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने साफ कर दिया कि उन्होने कभी दाखल की बात नहीं की थी और राफेल की कीमतों पर भी सवाल नहीं उठाए थे।

बहरहाल, यह राफेल डील देश की वायुसेना के लिहाज से तो अति महत्वपूर्ण है। ऐसे में, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राष्ट्र की सुरक्षा पर जिस संवेदनहीनता का परिचय दिया है, वह निंदनीय है। लेकिन राफेल पर हर बार मुंह की खाने के बाद भी कांग्रेस पार्टी सुधरने को तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि लोकसभा में कैग की रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद कांग्रेस के सांसदों का सदन में जैसा आचरण था उसे लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने ‘स्तरहीन’ करार देते हुए कहा कि विपक्ष के नाते यह आचरण अनुचित है। बहरहाल, जो राहुल गांधी अपनी माँ सोनिया गांधी सहित जमानत पर हैं, जिनके दिवंगत पिता पर बोफोर्स का दाग रहा है और जीजा रोबर्ट वाड्रा जमीन घोटाले में जांच एजेंसियों की राडार पर चल रहे हैं, वो जब देश की संवैधानिक संस्थाओं के मत को खारिज करते हुए राफेल सौदे में भ्रष्टाचार की बात करते हैं, तो इसे सिवाय बेशर्मी के और क्या कहा जाएगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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