आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई के बाद देश की एक ही आवाज – मोदी हैं तो मुमकिन है!

पुलवामा हमले के बाद नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि बदला लिया जाएगा और अब बदला लिया गया है। भारतीय इतिहास में ऐसा समय था आया था 1999 में, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कारगिल हमले का ज़ोरदार जवाब दिया था। 20 साल बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जोरदार जवाब दिया है।

पुलवामा में भारतीय सैनिकों पर हुए कायराना हमले के बाद भारतीय वायु सेना ने जैश के ठिकानों को तबाह कर बदला लिया है। सरकार की तरफ से ये कदम अपेक्षित था।  यह स्पष्ट हो चुका है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस कार्रवाई को बाखूबी अंजाम दिया गया। खबर यही है कि जिस समय पाकिस्तान के आतंकी कैम्पों पर हमले किये जा रहे थे, मोदी खुद वॉर रूम में मौजूद थे। इस कार्यवाही का प्लान उसी दिन तय कर लिया गया था जिस दिन पाकिस्तान ने पुलवामा में कायरतापूर्ण हमले को अंजाम दिया था। 

पुलवामा हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास जो विकल्प थे, वो ये कि वह पाकिस्तान में मौजूद आतंकी केन्द्रों को तबाह करने का कदम उठाएं, पाकिस्तान की चारो तरफ से घेरेबंदी जारी रखें, पाकिस्तान के असली चेहरे को बेनकाब करें –  मोदी ने ये सब किया है।  

पुलवामा हमले के बाद नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि बदला लिया जाएगा और अब बदला लिया गया है।  भारतीय इतिहास में ऐसा समय था आया था 1999 में, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कारगिल हमले का ज़ोरदार जवाब दिया था। 20 साल बाद पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी पाकिस्तान को उसी की भाषा में जोरदार जवाब दिया है।

मोदी ने आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए वायु सेना का प्रयोग किया, जब पाकिस्तान ने इतने बड़े हमले के लिए सोचा भी नहीं होगा। अब जब भारत ने अपनी तरफ से कार्यवाही कर दी तो भारत को पाकिस्तान की जवाबी कार्यवाही के लिए भी तैयार रहना होगा। 

पूरी दुनिया में ऐसा जनमत बन रहा है कि पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों का सफाया किया जाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सही कहा था कि भारत पुलवामा पर हुए हमले के बाद कुछ “बड़ा करने जा रह है” वो बड़ा क्या था, अब सामने आ गया है। आज के समय में आतंक का सरगना पाकिस्तान अमेरिकी मदद के लिए वाशिंगटन की तरफ मुंह उठाकर नहीं देख सकता।

अमेरिका की तरफ से भी उसपर दबाव है कि वो आतंकवाद के खिलाफ बड़े कदम उठाये, नहीं तो कार्रवाई होगी। कश्मीर में आतंकवादियों ने आग में घी डालने का काम किया और उस घी की सप्लाई पाकिस्तान से होती रही है। बहरहाल, इस हमले के जरिये नरेन्द्र मोदी ने आतंकवाद के प्रति अपनी जीरो टोलरेंस की नीति की छवि को बरकरार रखा है, वहीं इमरान खान की छवि एक ऐसे नेता की है जो सेना और आईएसआई के हाथों की कठपुतली भर हैं। भारत में अब यह बात कही जाने लगी है कि मोदी हैं तो सब मुमकिन है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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