गठबंधन के लिए कांग्रेस के आगे घुटने क्यों टेक दिए हैं केजरीवाल?

जो केजरीवाल कभी किसी दल से  गठबंधन नहीं करने की कसमें खाते थे, आज कांग्रेस के समक्ष घुटने टेक दिए हैं और बार-बार इस बात का रोना रो रहें है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं कर रही। आखिर केजरीवाल की इस बेबसी का कारण क्या है? इसका तो एक ही मतलब निकलता है कि कहीं न कहीं केजरीवाल यह समझ चुके हैं कि दिल्ली की जनता अब उन्हें अपना समर्थन नहीं देने वाली है।

राजनीति बदलने का दावा कर सत्ता तक का सफर तय करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राजनीति को तो नहीं बदल पाए, लेकिन खुद जरूर बदल गए हैं। आज केजरीवाल अपनी कही हर बात से पलटते हुए नज़र आ रहें है। हैरत इस बात की भी है कि जो केजरीवाल कभी किसी दल से  गठबंधन नहीं करने की कसमें खाते थे, आज कांग्रेस के समक्ष घुटने टेक दिए हैं और बार-बार इस बात का रोना रो रहें है कि कांग्रेस गठबंधन नहीं कर रही। आखिर केजरीवाल की इस बेबसी का कारण क्या है? क्या केजरीवाल यह समझ चुके हैं कि दिल्ली की जनता अब उन्हें अपना समर्थन नहीं देने वाली है?

गौरतलब है कि केजरीवाल भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्वेष के कारण यहां तक कह चुके हैं कि भाजपा को हराने के लिए वो किसी से भी गठबंधन करने को तैयार हैं। यह दिखाता है कि आज केजरीवाल के लिए भ्रष्टाचार, लोकपाल, राजनीतिक शिष्टाचार, स्वच्छ राजनीति की बातें अलहदा हो गई हैं बल्कि वो खुद राजनीति को सबसे निचले स्तर पर ले जाने वाले एक नेता बनकर उभरे हैं।

चाहे संघीय ढांचे का सवाल हो अथवा संवैधानिक पदों एवं संस्थाओं के मर्यादा की बात हो, केजरीवाल इन मर्यादाओं को कई बार तार-तार करते नज़र आये हैं। यह सर्वविदित है कि जब भी उनका कोई विधायक, मंत्री अथवा नेता किसी आरोप से घिरता है और उसपर कार्यवाही होती है तो केजरीवाल तुंरत आपातकाल का जुमला उछाल देते हैं और केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगाकर अपने जवाबदेही की इतिश्री कर लेते हैं।

गौरतलब है कि जनता के हित के बड़े-बड़े काम करने का वादा करके सत्ता में आने वाले केजरीवाल ने दिल्ली के विकास के लिए तो कुछ किया नहीं मगर अपने विभिन्न कारनामों को लेकर खूब चर्चा में रहे हैं। कभी अपने मंत्रियों की गिरफ़्तारी तो कभी नजीब जंग से लेकर अनिल बैज़ल तक दिल्ली के उपराज्यपालों से खींचतान को लेकर केजरीवाल अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। ताजा मामला है कि आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बालियान के ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापेमारी की और बड़ी मात्रा में काला धन जब्त किया।   

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल आये तो थे भ्रष्टाचारियों से लड़ने, लेकिन यह जाहिर हो चुका है कि उनके आधे से ज्यादा विधायक खुद ही भ्रष्टाचार में रचे बसे हुए हैं। कुल मिलाकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के हितों को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार से जंग छेड़कर बस काम नहीं करने का बहाना बनाया है। केजरीवाल के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जैसा अहम मुद्दा भी उनकी छिछली राजनीति का हिस्सा मात्र है।

सीआरपीएफ जवानों पर आतंकी हमले पर भी बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान देते हुए केजरीवाल ने इस संवेदनशील विषय का राजनीतिकरण करने की कोशिश की है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले खुद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कराए हैं।

इसके बाद वायुसेना द्वारा एयरस्ट्राइक पर केजरीवाल ने यहाँ तक कह दिया कि 300 सीटें जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी जवानों को शहीद करवा रही है। यूँ केजरीवाल के इन बयानों को देश में तो कोई गंभीरता से नहीं लेता है, लेकिन पाकिस्तान में इनके बयानों पर ताली जरूर बजती है। इससे पहले सर्जिकल स्ट्राइक पर भी सबूत मांगने वालों की पंक्ति में दिल्ली के मुख्यमंत्री सबसे आगे थे।

बहरहाल, आये दिन दिल्ली को लंदन और सिंगापुर बनाने का दावा करने वाले केजरीवाल ने विकास के नाम पर सिर्फ दिल्ली की जनता को बरगलाने का काम किया है और निरंतर केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार हमें काम नहीं करने दे रही है। लेकिन वास्तविकता यह है कि आम आदमी पार्टी सरकार का एकमात्र काम है बस दूसरों पर आरोप लगाना और खुद को पाक साफ करार देना।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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