परिवहन के क्षेत्र में एक नयी बिजली क्रांति लाने में जुटी मोदी सरकार

बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

दुनिया भर में बिजली खपत में भारी असमानता पाई जाती है। इतना ही नहीं जहां विकसित देशों में जीवन के हर पहलू में बिजली की भरपूर भागीदारी रही है, वहीं भारत जैसे विकासशील देशों में बिजली की भूमिका रोशनी और औद्योगिक गतिविधियों तक सिमटी रही।

दशकों की उपेक्षा के बाद भारत में भी बिजली की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास शुरू हो चुके हैं। देश के हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी ने सातों दिन-चौबीसों घंटे बिजली मुहैया कराने का महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य तय किया है। इसके साथ-साथ सरकार देश के समूचे परिवहन तंत्र को पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली आधारित करने की महत्‍वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। रेल लाइनों का विद्युतीकरण और 2030 तक कुल वाहनों के 25 फीसदी को इलेक्‍ट्रिक वाहन करने का लक्ष्‍य है।

सांकेतिक चित्र

इलेक्‍ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने 2015 में फास्‍टर एडॉप्‍शन एंड मैनुफैक्‍चरिंग ऑफ इलेक्‍ट्रिक ह्विकल (फेम)-1 शुरू किया था। इसे मिली कामयाबी को देखते हुए 28 फरवरी को कैबिनेट ने फेम के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी। इसके तहत देश में इलेक्‍ट्रिक वाहनों को प्रोत्‍साहन देने के लिए 10,000 करोड़ रूपये का आवंटन किया गया है।

यह राशि इलेक्‍ट्रिक वाहनों और इलेक्‍ट्रिक इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च की जाएगी जिससे 2030 तक 100 फीसदी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक बनाने का काम किया जा सके। फेम-2 के अंतर्गत इलेक्‍ट्रिक वाहनों की खरीद को सस्‍ता बनाने और चार्जिंग स्‍टेशनों की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था पर काम किया जाएगा।

1 अप्रैल से शुरू हो रही फेम-2 योजना के तहत इलेक्‍ट्रिक वाहन 20,000 से 2.5 लाख रूपये तक सस्‍ते हो जाएंगे। वाहनों को सस्‍ता बनाने के लिए वाणिज्‍यिक वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार का लक्ष्‍य है कि तय समय के भीतर देश में 10 लाख इलेक्‍ट्रिक दोपहिया, पांच लाख इलेक्‍ट्रिक तिपहिया, 55000 इलेक्‍ट्रिक कार और 70000 इलेक्‍ट्रिक बस खरीदी जाएं। यह प्रोत्‍साहन सिर्फ उन्‍हें दिया जाएगा जो लिथियम इयान बैटरी से युक्‍त वाहन खरीदेंगे।

योजना के तहत महानगरोंटू टियर शहरों और पहाड़ी इलाकों में 2700 चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे। इन शहरों में हर तीन किमी पर एक चार्जिंग स्‍टेशन और राजमार्गों पर हर 25 किमी पर चार्जिंग स्‍टेशन लगाने का लक्ष्‍य रखा गया है। इसके साथ-साथ रिहाइशी इलाकों में भी चार्जिंग स्‍टेशन लगाए जाएंगे।

इस दिशा में आंध्र प्रदेश सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए 2024 तक पेट्रोल-डीजल कारों के पंजीकरण रोकने और अगले पांच वर्षों में सड़कों पर 10 लाख इलेक्‍ट्रिक वाहन लाने की घोषणा की है। इसके साथ-साथ 2024 तक सभी सरकारी वाहनों को इलेक्‍ट्रिक वाहनों में बदल दिया जाएगा। कमोबेश इसी तरह की पहल कर्नाटक सरकार ने भी की है।

अधिक से अधिक लोग पेट्रोल-डीजल के बजाए बिजली से चलने वाले वाहन अपनाएं इसके लिए सरकार खुद पहल कर रही है। हाल ही में सरकार ने टाटा मोटर्स से 10,000 इलेक्‍ट्रिक वाहन खरीदने का समझौता किया है। बिजली मंत्रालय के मुताबिक इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा कीमत है लेकिन एलईडी बल्‍ब का उदाहरण सरकार के लिए प्रेरणा का काम कर रहा है। गौरतलब है कि शुरू में एलईडी बल्‍ब बहुत महंगे पड़ते थे लेकिन जब देश में इनका बड़े पैमाने पर उत्‍पादन होने लगा तब इनकी कीमतों में तेजी से कमी आई। इसी तरह बैटरी रिक्‍शा व सोलर पंप को मिल रही लोकप्रियता भी सरकार का उत्‍साह बढ़ा रही है।

फिर लीथियन ऑयन आधारित बैटरी की कीमतों में गिरावट से इलेक्‍ट्रिक वाहनों की लागत कम हो रही है। दूसरी ओर कठोर उत्‍सर्जन मानकों के कारण पेट्रोल-डीजल वाहनों की कीमत लगातार बढ़ रही है। मौजूदा अनुसंधान को देखें तो अगले पांच वर्षों में डीजल-पेटोल व बिजली से चलने वाले वाहनों की लागत लगभग एक समान हो जाएगी।

स्‍पष्‍ट है, यदि भारत ढांचागत बदलाव नहीं करता तो उसे बड़े पैमाने पर इलेक्‍ट्रिक वाहन व संबंधित कल-पुर्जा आयात करना पड़ेगा। जर्मनीचीनअमेरिका जैसे देश पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्‍ट्रिक वाहन पर फोकस कर चुके हैं। इन देशों में वाहन निर्माताओं को 30-40 फीसदी सब्‍सिडी मिल रही है। भारत में इतनी सब्‍सिडी संभव नहीं है। इसलिए उसे समय पर कदम उठाना पड़ेगा।

भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी पेट्रोलियम पदार्थ आयात करता है। ऐसे में परिवहन क्षेत्र में हो रही बिजली क्रांति से न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी बल्‍कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्‍ट्रिक वाहनों के इस्‍तेमाल से 2030 तक सड़क परिवहन में खपत होने वाली ऊर्जा में 64 फीसदी और कार्बन उत्‍सर्जन में 37 फीसदी की कमी आएगी।

स्‍पष्‍ट है, बिजली से चलने वाले वाहन अर्थव्‍यवस्‍था के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी मुफीद साबित होंगे। इसी प्रकार इलेक्‍ट्रिक वाहन पेरिस जलवायु समझौते की शर्तों के अनुपालन में भी मददगार बनेंगे। इतना ही नहीं इलेक्‍ट्रिक वाहनों के साथ आने वाली स्‍वचालन तकनीक से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। स्‍पष्‍ट है, मोदी सरकार ने जो कदम उठाया है वह देश में एक नई बिजली क्रांति का आगाज करेगा।

(लेखक केन्द्रीय सचिवालय में अधिकारी हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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