‘चौकीदार को चोर बताने का राहुल गांधी का दाँव उल्टा पड़ गया है’

राहुल का ‘चौकीदार चोर है’ का यह दांव उल्टा पड़ गया है। नरेन्द्र मोदी ने इसे मुद्दा बना दिया। यह भावना फैला दी है कि देश को घोटालों से रोकने के लिए सभी को चौकीदार की भावना से कार्य करना होगा। प्रियंका गांधी ने कहा था कि चौकीदार अमीरों के यहां होता है। उनका विचार यहीं तक सीमित था। नरेंद्र मोदी ने इसको व्यापक रूप दे दिया।

चौकीदार को चोर बताना राहुल गांधी को अब भारी पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी ने इसे सुशासन और नेशन फर्स्ट की अवधारणा से जोड़ दिया है। इस आधार पर मोदी ने अपने पांच वर्षों के शासन का हिसाब दिया, साथ ही कांग्रेस के शासन को भी कसौटी पर रखा है, जिस पर आर्थिक गड़बड़ी के बहुत आरोप रहे हैं।

अब एक साथ पांच सौ क्षेत्रों तक नरेंद्र मोदी ने तकनीक की मदद से संवाद कर चौकीदार को ही  मुद्दा बना दिया। इसे इतना  व्यापक स्वरूप प्रदान किया कि इसमें भारत के सभी नागरिक शामिल हो गए। इस चिंतन में चौकीदार केवल वह नहीं है जो किसी बड़े आदमी के घर या किसी भंडार में नौकरी करता है, बल्कि अपने कर्तव्यों का निर्वाह करने वाले सभी नागरिक चौकीदार हैं। प्रधानमंत्री भी इसी में शामिल हैं।

मोदी ने कहा भी कि देश का नागरिक टैक्स देता है, इस पर देश के गरीबों का हक होता है। मेरी कोशिश रहेगी कि जनता के पैसों पर कोई पंजा नहीं पड़े। मैं अपनी जिम्मेदारी निभाउंगा। ऐसा नहीं कि यह सिद्धांत केवल नरेन्द्र मोदी ने दिया है। यह गांधीजी का सिद्धांत रहा है। उन्हें लगता था कि अंग्रेज हमारे देश की संपदा चोरी कर रहे हैं, लूट रहे हैं। इसलिए इनको बाहर निकालना है। लेकिन कांग्रेस  इस विचार का मखौल बना रही है।

मोदी ने कहा कि देश  के कोने-कोने में बैठा हर व्यक्ति, जो गांव का है, जो खेत में काम करता है, जो अनपढ़ है वो भी, जो डॉक्टर है वो भी, हर कोई चौकीदार है।  स्पष्ट है कि चौकीदार के भाव का निरंतर विस्तार होता जा रहा है। ये भाव जितना प्रबल होगा उतना ही अच्छा होगा। नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी चौकीदार विचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि हमारे जवान इसी भावना से अपनी जान की बाजी लगा देते हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने  कहा था कि जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें पाई-पाई लौटानी पड़ेगी। अपने कार्यकाल के दौरान  ऐसे लोगों को जेल के दरवाजे तक पहुंचाने व उनपर कार्यवाई करने में मोदी सरकार को सफलता मिली है। मोदी ने कहा कि ऐसे लोगों में कोई जमानत पर है, कोई डेट ले रहा है। नए अफसर आने के बाद अब कागज भी हाथ लगने लगे हैं, जिसने नौ हजार करोड़ रुपये का घपला किया, उनके चौदह हजार करोड़ जब्त किए। दुनिया के किसी भी कोने में प्रापर्टी होगी, जब्त होकर रहेगी। भारत के कानून की शरण में आना होगा। 

मोदी का इशारा विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोगों की तरफ था। इन्हीं का नाम लेकर राहुल गांधी चौकीदार को चोर बता रहे थे। उनका कहना था कि नरेंद मोदी ने गरीबों की जेब से पैसा निकाल कर विजय माल्या और नीरव मोदी की जेब मे डाल कर भगा दिया, इसलिए चैकीदार चोर है। राफेल खरीद पर यूपीए सरकार नाकाम थी। मोदीं सरकार ने खरीदा तो राहुल हमला करने लगे। उनके पास कोई प्रमाण नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने भी सौदे की प्रक्रिया को सही करार दिया था। इसके बाद भी राहुल ने चौकीदार को चोर बताना शुरू कर दिया। लेकिन अब ‘मैं भी चौकीदार’ अभियान के बाद राहुल चौकीदार को चोर नहीं बोल पा रहे।

राहुल का यह दांव उल्टा पड़ गया है। नरेन्द्र मोदी ने इसे मुद्दा बना दिया। यह साबित किया कि देश को घोटालों से रोकने के लिए सभी को चौकीदार की भावना से कार्य करना होगा। प्रियंका गांधी ने कहा था कि चौकीदार अमीरों के यहां होता है। उनका विचार यहीं तक सीमित था। नरेंद्र मोदी ने इसको व्यापक रूप दे दिया।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आठ  करोड़ लोग ऐसे निकाले जो फर्जी थे, और आर्थिक लाभ उठा रहे थे। नरेंद मोदी ने आधार  को सही ढंग से लागू करके लाखों करोड़ के घपले पर रोक लगाईं। डीबीटी योजना के कारण एक लाख करोड़ रुपये  से ज्यादा की रकम बच गई। जाहिर है, प्रधानमंत्री जब चौकीदार की भावना से काम करता है तो देश की संपत्ति की सुरक्षा होती है। मोदी ने अपनी इस भावना को अब देशवासियों से जोड़ लिया है, जिसका चुनाव में व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

(लेखक हिन्दू पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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