कभी ‘जनेऊधारी हिन्दू’ तो कभी मुस्लिम लीग के झंडे, ये दोहरापन ही कांग्रेस का असल चरित्र है!

बहुत दिन नहीं बीते जब राहुल खुद को जनेऊधारी हिंदू बताते थक नहीं रहे थे और गोत्र का भी प्रचार करते फिर रहे थे। और जब मुस्लिम बाहुल्य सीट पर पहुंचे तो मुस्लिमों का ध्रुवीकरण करने के लिए मुस्लिम प्रतीकों को प्रदर्शित करते झंडों के जरिये ध्रुवीकरण की कोशिश करने लगे। लेकिन विडंबना देखिये कि ‘वंदे मातरम’ और ‘जय श्री राम’ कहने में साम्प्रदायिकता खोज लेने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों को राहुल की इन गतिविधियों में साम्प्रदायिक राजनीति नजर नहीं आ रही। 

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को केरल की वायनाड सीट से अपना नामांकन भर दिया। इसके बाद राहुल ने वायनाड में एक रोड शो भी किया और मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रोड शो में कांग्रेस के अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के भी झंडे लहराते हुए देखे गए। सोशल मीडिया पर इनकी तस्‍वीरें और वीडियो वायरल हो गए। यूजर्स ने जमकर तीखी टिप्‍पणी करते हुए राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया और राहुल के इरादों पर सवाल उठा दिए।

लोगों ने इस झंडे को पाकिस्‍तान का झंडा बताते हुए आरोप लगाया कि क्‍या राहुल भारत से चुनाव लड़ रहे हैं या पाकिस्‍तान से खड़े हुए हैं। कांग्रेस समर्थित कुछ मीडिया समूहों ने तो इसकी वकालत करते हुए बकायदा स्‍पष्‍टीकरण भी देते हुए बताया कि यह पाकिस्‍तान का झंडा नहीं है।

तकनीकी तौर पर देखा जाए तो मुस्लिम लीग और पाकिस्‍तान के झंडे की बनावट और डिजाइन में बहुत समानता है लेकिन अंतर केवल रंगों का है। पाकिस्‍तान के झंडे में सफेद और हरे रंग में चांद-सितारे की डिजाइन है, जबकि हूबहू यही डिजाइन मुस्लिम लीग के झंडे में भी है, लेकिन उसका कपड़ा पूरे हरे रंग का है।

बहरहाल, मुद्दा यह नहीं है कि वह झंडा किसका था, असल में मुद्दा तो कुछ और ही है। यहां जिस बिंदु को देखा जाना चाहिये वह है राहुल गांधी का अवसरवादी रवैया और उनका राजनीतिक दोहरापन जो नित नए ढंग से प्रकट हो रहा है। यदि उनकी रैली में मुस्लिम लीग के भी झंडे लहराए गए हैं तो सवाल यह होना चाहिये कि क्‍या ये वही राहुल गांधी हैं जो उत्‍तर भारत और गुजरात में स्‍वयं को ढोल पीट-पीटकर जनेऊधारी हिंदू साबित करने पर तुले हुए थे।

बहुत दिन नहीं बीते जब राहुल खुद को जनेऊधारी हिंदू बताते थक नहीं रहे थे और गोत्र का भी प्रचार करते फिर रहे थे। और जब मुस्लिम बाहुल्य सीट पर पहुंचे तो मुस्लिमों का ध्रुवीकरण करने के लिए मुस्लिम प्रतीकों को प्रदर्शित करते झंडों के जरिये ध्रुवीकरण की कोशिश करने लगे।  

उनके साथ प्रियंका गांधी भी थीं जो खुद हाल ही में बनारस में हिंदू परिधान पहनकर, रुद्राक्ष की माला डालकर हास्‍यास्‍पद रूप से खुद को हिंदू साबित करने पर आमादा थीं। उनकी यह असफल कोशिश थी, क्योंकि ऐसे मौसमी शिवभक्तों को देश खूब समझता है। क्‍या यह सब बहुत अजीब नहीं लगता कि राहुल, प्रियंका जैसे लोग महज चुनाव जीतने के लिए धर्मों का मखौल उड़ाते फिर रहे हैं और इस पर कोई संज्ञान भी नहीं लिया जा रहा।

असल में उनको प्रयोजन तो मुस्लिमों से भी नहीं है, ना ही वे मुस्लिमों के हितरक्षक हैं, उन्‍हें तो केवल अपनी थोथी राजनीति और मुस्लिमों के वोट से मतलब है। यदि वे सचमुच ही मुस्लिमों के हिमायती होते तो मुस्लिमों को पिछड़ेपन के दायरे से बाहर निकालते। लेकिन दशकों तक सत्‍ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने ऐसा कुछ नहीं किया। इसके उलट, मोदी सरकार ने मुस्लिमों को आगे बढ़ाने का काम किया है। तीन तलाक, हलाला जैसी कुप्रथाओं पर लगाम लगाकर मुस्लिम महिलाओं के उन्‍नयन की दिशा में कार्य किया, जबकि कांग्रेस ने मोदी के मुस्लिम विरोधी होने का दुष्‍प्रचार किया।

इतना ही नहीं, कांग्रेस ने हिंदू आतंकवाद नाम का एक झूठा शब्‍द गढ़ा और मीडिया में इसे प्रचारित किया। कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह, सुशिल कुमार शिंदे और शशि थरूर भी हिंदू एवं भगवा-आतंकवाद जैसे झूठे शब्‍दों की दुहाई दे चुके हैं। अब राहुल गांधी से सवाल पूछा जाना चाहिये कि यदि उन्‍हें हिंदुओं से तकलीफ है और हिंदुत्‍व को वे आतंकवाद से जोड़कर देखते हैं तो किस मुंह से खुद हिंदू बनने का स्‍वांग रचा रहे हैं।

आखिर वे हिंदुत्‍व ओढ़ने की नौटंकी क्‍यों कर रहे हैं। और मौका मिलते ही यह अवसरवादी व्‍यक्ति मुस्लिम बाहुल्‍य के बीच जाकर बैठ गया और वहां लहराते मुस्लिम झंडों के बीच खुद को मुस्लिमों का हिमायती बनने का दावा कर रहा है। कांग्रेस ने कभी ना देश की चिंता की, ना मतदाताओं की, ना ही किसी संप्रदाय की। उन्‍हें जहां अपना वोट दिखता है, वे उस समय वही बन जाते हैं।

राहुल वायनाड गए कि उनमें अमेठी से लड़ने का साहस नहीं था क्‍योंकि अमेठी में उनके पूरे खानदान ने बरसों से कोई विकास कार्य नहीं किया और अब चूंकि जनता का सामना करना पड़ेगा इसलिए कायरों की तरह मैदान ही छोड़कर भाग गए। बात यहीं पर खत्‍म नहीं होती, निर्लज्‍जता की हदें तो तब पार हो गईं जब राहुल ने केरल में मुस्लिम लीग के कार्यकताओं को कहा कि यह झंडा लेकर यूपी में ना आएं अन्‍यथा वहां के मतदाता नाराज़ हो जाएंगे।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ट्वीट करके राहुल के इस चुनावी हथकंडे को उजागर किया। योगी ने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि ये मुस्लिम लीग से समझौता कर चुनाव लड़े तो सेक्युलर? हम ‘सबका साथ सबका विकास’ करें तो भी साम्प्रदायिक?

सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सही लिखा है कि लगता है राहुल गांधी रावलपिंडी से चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल गांधी उत्‍तर और दक्षिण भारत में हिंदू एवं मुस्लिम वोटों के धुव्रीकरण करने का लाख प्रयास कर लें, उन्‍हें यह पता नहीं है कि चुनाव झूठ से नहीं, विकास कार्य करके जीते जाते हैं। राहुल गांधी का यह झूठ अधिक चलने वाला नहीं है, चुनाव में मतदाता उन्‍हें आईना दिखाकर रहेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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