नीतिगत दरों में कटौती से आमजन को राहत मिलने के आसार

शक्तिकांत दास के अनुसार नीतिगत दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को देना ज्यादा जरूरी है, अन्यथा कटौती का मकसद बेकार हो जायेगा। पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक सुनील मेहता के अनुसार बैंकों ने दरों में 10 से 12 आधार अंक की कटौती की है और नीतिगत दरों में और कटौती करने और नकदी की स्थिति में सुधार होने से बैंक कर्ज की दरों में और भी कटौती कर सकते हैं।

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के छह सदस्यों में से चार ने रेपो दर में 25 आधार अंक कटौती के पक्ष में अपना मत दिया, जबकि दो सदस्यों ने इसका विरोध किया। कटौती के बाद रेपो दर 06.00 प्रतिशत हो गया। गौरतलब है कि पिछले मौद्रिक समीक्षा में भी रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी।  

रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि देश में उधारी की रफ्तार जमा से ज्यादा तेज है। इसकी वजह से बैंक जमाओं पर ज्यादा ब्याज की पेशकश कर रहे हैं, ताकि वे प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें। इससे उधार लेने वालों को कटौती का लाभ देने की बैंकों की क्षमता कम हो जाती है।

बैंक जमाओं का इस्तेमाल बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिये भी कर रहे हैं, ऐसे हालात में नीतिगत दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देना जरा मुश्किल है, पर रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्ति कांत दास बैंकों में नकदी की स्थिति को बेहतर करने के लिये लगातार कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि एसएलआर समायोजन, बॉन्ड की खरीद और डॉलर की अदला-बदली से आने वाली नकदी से बैंक कर्ज दरों को कम करने के लिये  प्रोत्साहित होंगे। 

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी हुई है, जो बैंकों की एमसीएलआर गणना में परिलक्षित होगी और अगर प्रतिफल उच्च स्तर पर बना रहेगा तो ग्राहकों को कटौती का फायदा देना मुश्किल हो सकता है। ऐसे माहौल में रिजर्व बैंक को कम से कम एक बार और रेपो दर में कटौती करने की जरूरत है।

वैसे, भारतीय स्टेट बैंक ने कैश क्रेडिट और 1 लाख रुपये से अधिक की लिमिट वाले ओवरड्राफ्ट पर ब्याज दर 25 आधार अंक कम करने की घोषणा कर दी है। ये दरें 1 मई से लागू होंगी। हालाँकि, स्टेट बैंक ने बचत खाते पर ब्याज दर को भी 3.50 प्रतिशत से घटाकर 3.25 प्रतिशत कर दिया है।

शक्तिकांत दास के अनुसार नीतिगत दरों में कटौती का फायदा ग्राहकों को देना ज्यादा जरूरी है, अन्यथा कटौती का मकसद बेकार हो जायेगा। पंजाब नेशनल बैंक के प्रबंध निदेशक सुनील मेहता के अनुसार बैंकों ने दरों में 10 से 12 आधार अंक की कटौती की है और नीतिगत दरों में और कटौती करने और नकदी की स्थिति में सुधार होने से बैंक कर्ज की दरों में और भी कटौती कर सकते हैं।  

रिजर्व बैंक चाहता है कि फ्लोटिंग दरों को बाह्य बेंचमार्क से जोड़ा जाये, जिससे नीतिगत दरों में कटौती का वास्तविक लाभ बैंक कर्जदारों को दिया जा सके। इसमें दो राय नहीं है कि अभी  वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से उधारी दरों में कटौती का लाभ आंशिक रूप से दिया जा रहा है या फिर इसे देने में देरी हो रही है। उदाहरण के तौर पर फरवरी, 2019 में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद रुपये वाले नये कर्ज पर फरवरी, 2019 के दौरान औसत उधारी दर केवल 12 आधार अंक कम हुई थी, वह भी सभी बैंकों ने ऐसा नहीं किया था।

इधर, रिजर्व बैंक द्वारा जारी किये गये 12 फरवरी के परिपत्र को उच्चतम न्यायालय ने 2 अप्रैल, 2019 को निरस्त कर दिया है। माना जा रहा है कि सर्वोच्च न्यायलय के इस निर्णय से गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) कम होगी और फंसे ऋणों के समाधान प्रक्रिया में भी तेजी आयेगी।

उल्लेखनीय है कि 34 बिजली क्षेत्र की कंपनियों पर बैंकों का 2.2 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। कहा जा सकता है कि रिजर्व बैंक के प्रयासों और सर्वोच्च न्यायलय के ताजा फैसले से कर्जदारों, बैंकों और बिजली, कपड़ा एवं सीमेंट से जुड़ी कंपनियों को फायदा होगा, जिससे अर्थव्यवस्था में भी बेहतरी आयेगी।

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के कॉरपोरेट केंद्र मुंबई के आर्थिक अनुसन्धान विभाग में कार्यरत हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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