बनारस ने बता दिया कि 2019 की मोदी लहर 2014 से भी बड़ी है!

बीएचयू के लंका गेट पर जब मोदी पहुंचे तो समर्थकों का भारी जनसैलाब देखते ही बनता था। उन्‍होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण किया और अमूर्त प्रेरणाओं से इस प्रकार अपने अंदाज में आर्शीवाद प्राप्‍त किया। इसके बाद रोड शो का आरंभ हुआ जो कि अपने आप में एक दृष्‍टांत बन गया। दृष्‍टांत इस अर्थ में कि किसी भी नेता की एक झलक देखने के लिए इतनी बड़ी संख्‍या में लोगों को उमड़ना कोई साधारण घटना नहीं थी।

इस सप्‍ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन तक वाराणसी में रहे। ये दो दिन बहुत गहमागहमी, राजनीतिक ऊहापोह से भरे रहे। इन दो दिनों में एक तरह से देश का माहौल ही सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी काशी से सांसद हैं और पिछले लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी वे इसी संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। 25 और 26 अप्रैल को वे यहां रहे और दोनों दिनों के अपने तय कार्यक्रम थे।

25 अप्रैल को उन्‍होंने यहां अभूतपूर्व रोड शो किया और 26 अप्रैल को उन्‍होंने अपना नामांकन दाखिल किया। कहने को तो यह महज औपचारिक घटनाएं थीं जो कि प्रायः किसी भी दल का प्रत्‍याशी करता ही है। इस बार भी तमाम प्रत्‍याशी नियमित रूप से ये गतिविधियां करते ही आए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साथ मामला कुछ दूसरा ही हो जाता है। उनका रोड शो इतना भव्‍य और अभूतपूर्व रूप से सफल रहा कि बरबस ही देश का पूरा ध्‍यान इस पर केंद्रित हो गया।

यह सब अतिश्‍योक्ति कतई नहीं है क्‍योंकि पीएम मोदी के रोड शो पर पूरे देश और दुनिया की निगाहें थीं। यह सब केवल जनता की बदौलत ही संभव है, यदि जनता प्रतिसाद ना दे तो कोई कहीं भी नहीं ठहर सकता, भले ही वह कितनी ही बड़ी हस्‍ती हो। काशी के अवाम की गर्मजोशी का यह आलम था कि 40 डिग्री से अधिक तापमान एवं झुलसा देने वाली गर्मी के बावजूद पूरा शहर अपने प्रत्‍याशी की अगवानी के लिए पलक-पावड़े बिछाकर उत्‍साह से तैयार था। तय कार्यक्रम के अनुसार मोदी यहां शाम साढ़े चार बजे पहुंचे लेकिन आम लोगों की तैयारी तो दिन भर से थी। लोगों ने स्‍वेच्‍छा से अपने प्रतिष्‍ठान बंद रखे और किसी प्रकार का व्‍यवधान उत्‍पन्‍न नहीं होने दिया।

बीएचयू के लंका गेट पर जब मोदी पहुंचे तो समर्थकों का भारी जनसैलाब देखते ही बनता था। उन्‍होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्‍यार्पण किया और अमूर्त प्रेरणाओं से इस प्रकार अपने अंदाज में आर्शीवाद प्राप्‍त किया। इसके बाद रोड शो का आरंभ हुआ जो कि अपने आप में एक दृष्‍टांत बन गया। दृष्‍टांत इस अर्थ में कि किसी भी प्रत्‍याशी की एक झलक देखने के लिए इतनी बड़ी संख्‍या में लोगों को उमड़ना कोई साधारण घटना नहीं थी।

यदि हम मोदी की ही बात करें तो पिछले चुनाव की तुलना में इस बार उन्‍हें देखने, उनका स्‍वागत करने के लिए अधिक संख्‍या में लोग आए। इसका सीधा एवं साफ संकेत है कि इसबार पिछली बार से अधिक मोदी लहर है। यह लहर उनके निर्वाचन क्षेत्र में तो है ही, समूचे देश में भी है।

यह मोदी का पुरुषार्थ है कि वे पहले से ही दो सभाएं कर चुके थे और यहां करीब 8 किलोमीटर लंबे रोड शो में पूरे जोश के साथ बने रहे। उनसे पूछा भी जाता रहा है कि वे इतनी असीम ऊर्जा कहां से पाते हैं, तो उनका सदा जवाब होता है कि देश की जनता से मिल रहा प्रेम और उनका स्‍वयं का कर्तव्‍य बोध उनमें सदा नई ऊर्जा भर देता है और कभी थकने नहीं देता।

मोदी के रोड शो के लिए उनकी सुरक्षा का पहलू भी एसपीजी के लिए एक बड़ी चुनौती था। एसपीजी के साथ ही जिला पुलिस एवं प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए थे। प्रत्‍येक घर, होटलों, धर्मशालाओं में रहने वालों की जानकारी जुटाई गई थी और रोड शो के मार्ग में आने वाले तमाम रास्‍तों, लोगों पर ड्रोन से सूक्ष्‍म निगाह भी रखी गई। पुख्‍ता पहरेदारी के बीच प्रधानमंत्री मोदी जनता से चलित तौर पर रूबरू हुए और जनता ने उन्‍हें जबर्दस्‍त प्रतिसाद भी किया।

असल में, इतना अभूतपूर्व स्‍वागत प्रसन्‍नता का तो विषय है लेकिन यह चौंकाता नहीं है, क्‍योंकि प्रधानमंत्री ने गत पांच वर्षों में इतना अधिक कार्य किया है एवं देश को इतनी तेज गति से विकासशील देशों की कतार में आगे ला खड़ा किया है कि जनता के मन में उनके प्रति 2014 का प्रेम व समर्थन अब और अधिक बढ़ चुका है।

काशी में मोदी के पक्ष में पिछले एक सप्‍ताह से माहौल तेजी से बनने लगा था। यह भी क्‍या संयोग रहा कि जिस दिन उनका रोड शो होना था, उसी दिन कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा बनारस से लड़ने की अटकलों पर विराम लगाते हुए अजय राय की बतौर प्रत्‍याशी घोषणा कर दी। सीधे शब्‍दों में कहा जाए तो प्रियंका गांधी चुनावी मैदान से पलायन कर गईं और इस पलायन में कांग्रेस ने परोक्ष रूप से अपनी पराजय स्‍वीकार कर ली है।

जहां तक मोदी लहर की बात है, वह देश में पहले भी थी और आज भी है। बल्कि आज तो वह कई गुना बढ़ चुकी है। बीते पांच वर्षों में यदि वह कहीं, किन्‍हीं कारणों से अप्रकट भी थी तो अब इस रोड शो के बहाने वह सामने आ गई है और इसी से देश की जनता के रूझान का भी पता चलता है।

इससे यह भी संकेत मिलता है कि लोग किस कदर मोदी के साथ हैं। शुक्रवार को उन्‍होंने वाराणसी से अपना आधिकारित नामांकन भरा। इस प्रयोजन के लिए बड़ी संख्‍या में भाजपा के पदाधिकारी, कार्यकर्तागण और एनडीए के घटक दलों के शीर्ष नेता प्रमुख तौर पर उपस्थित रहे।

नामांकन प्रक्रिया का पालन करने से पहले मोदी ने अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल के चरण स्‍पर्श किए और आर्शीवाद लिया। मीडिया में इसे सुर्खी बनाया गया लेकिन मोदी के लिए यह सब आचरण और पार्टी से मिले संस्‍कारों का अंग है। वे सदा ही अपने वरिष्‍ठों एवं मार्गदर्शकों का आर्शीवाद लेते आए हैं। प्रधानमंत्री मोदी का रोड और नामांकन दो ऐसी घटनाएं हुईं जिनके बाद विपक्षियों को मानो सांप सूंघ गया है।

अदभुत ऊर्जा से लबरेज मोदी अपने परिश्रम से अपनी सफलता की नई गाथा लिखने की ओर बढ़ रहे हैं और अवाम को भी परोक्ष रूप से पुरुषार्थ के लिए प्रेरणा देने का काम कर रहे हैं। वाराणसी का अभूतपूर्व रोड शो और नामांकन के दिन बना जर्बदस्‍त माहौल काशी के मन की बात को स्‍पष्‍ट रूप से रेखांकित करता है। काशी के बहाने देश भर के लोग टीवी पर इन घटनाओं के साक्षी बने और पूरे देश में मोदी लहर एक बार फिर से प्रतिस्‍थापित हुई। समझने वाले समझ सकते हैं कि देश के मतदाता का मन किस ओर है एवं 23 मई को जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

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